Ground Report: देश का पहला Zero Dumpsite बना अम्बिकापुर, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट में टॉप
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने अम्बिकापुर को वायु प्रदूषण नियंत्रण का आदर्श माडल बताया है. यह रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वच्छता वायु कार्यक्रम के तहत् जारी किया गया है. छत्तीसगढ़ का सरगुजा अपने हसीन वादियों के लिए देशभर में जाना जाता है, ऐसे में कुछ वर्षों पहले कि बात करें, तो संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर से लगे मडीपुर में शहरा का कचरा डंप होता था, और जब लोग इस रास्ते से गुजरते थे तो अपने नाक बंद कर लेते थे, वज़ह दुर्गंध, लेकिन अब यह कचरा डंपिंग साइड नहीं रहा. यहां नगर निगम ने डंप साइड में स्वच्छता चेतना पार्क का निर्माण कर दिया है, जहां तमाम तरह कि प्रदर्शिनी लगाईं गई है, एफिल टॉवर हो,चाहे हरियाली हो चाहे प्लास्टिक से बना टायर व अन्य वस्तुएं लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. ऐसे में सरगुजा जिले के अम्बिकापुर शहर के डंप साइड को देशभर में जीरो डंप साइड स्वच्छता के क्षेत्र में पहला स्थान हासिल हुआ है और इसकी मुख्य वजह स्वच्छता अभियान नगर निगम ने स्वच्छता दीदी यों कि कि सरहाना,, प्लास्टिक मुक्त शहर अम्बिकापुर. नगर निगम कि पहल से अब लोग कचरे का भरपूर फायदा उठा रहे है, जहां पहले कचरा फेका जाता था. अब उसी कचरे से तरह तरह कि प्लास्टिक कि वस्तुएं तैयार हो रही है जों अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने अम्बिकापुर को वायु प्रदूषण नियंत्रण का आदर्श माडल बताया है. यह रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वच्छता वायु कार्यक्रम के तहत् जारी किया गया है. दरअसल अम्बिकापुर नगर निगम कचरे के प्रबंधन में देशभर के लिए एक मिशाल कायम किया है. पहले कचरे के डंपिंग यार्ड में परिवहन और 45 लाख रुपए खर्च होते थे लेकिन अब पुरी तरह बंद हो गया है. यही नहीं निगम को डंप साइड हटाने से उसी कचरे से अब 12 लाख रुपए और युजर्स चार्ज से 16 लाख रुपए कुल 28 लाख रुपए कि आमदनी हो रही है. इस बदलाव के बाद शहर में प्रतिदिन एकत्र होने वाले प्लास्टिक कचरे को निगम तीन बड़ी सिगरेट, फैक्ट्रीयों के साथ अनुबंध कर सप्लाई कर रहा है जिससे यहां काम करने वाले लोगों कि कमाई का साधन बन चुका है.
