India C&D Waste Challenge: भारत में निर्माण कार्यों से हर साल निकल रहा 50 करोड़ टन मलबा, 23 फीसदी नहीं हो पाता रिसाइकल, इसका हम पर ये असर
India C&D Waste Challenge: भारत में कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट का 77 फीसदी हिस्सा ही रिसाइकल किया जा रहा है। बाकि 23 फीसदी को खुले स्थानों या फिर लैंडफिल में छोड़ दिया जाता है जोकि वायु और जल को प्रदूषित कर रहा है। भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार देश में हर साल कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन (C&D) से जुड़ा करीब 50 करोड़ टन कचरा उत्पन्न होता है। जबकि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार करीब 38.5 करोड़ टन सीएंडडी वेस्ट (India C&D Waste Challenge) रिसाइकल हो रहा है। जोकि उत्पन्न हो रहे वेस्ट के 77 फीसदी के बराबर है। इसका मतलब ये हुआ कि 11.5 करोड़ टन सीएंडडी वेस्ट हमारी हवा और पानी में जहर घोल रहा है। आवास एवं शहरी कार्य और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की क्षमता में वर्ष 2014 में मात्र 17 प्रतिशत से 2024 में 77 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यानी इन 10 सालों में देश में सीएंडडी वेस्ट (India C&D Waste Challenge) की रीसाइक्लिंग क्षमता में 4 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। सेंटर फॉर साइंस एंड इवारमेंट की एक रिपोर्ट (CSE Report) के अनुसार 2017 तक 53 शहरों में कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन वेस्ट को रीसाइक्लिंग करने के लिए प्लांट स्थापित करने की योजना थी, लेकिन 2020 तक केवल 13 शहरों ने ऐसा किया है। जबकि यदि निर्माण सामग्री की बात करें तो पत्थर, रेत, लौहा, एल्यूमीनियम और लकड़ी की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में इस कचरे (India C&D Waste Challenge) को रीसाइक्लिंग के बिना ऐसे ही फेंक देना सही नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन ने भी सीएंडडीएस कचरा प्रबंधन की आवश्यकता को मान्यता दी है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के लिए भी सीएंडडी वेस्ट प्रबंधन (India C&D Waste Challenge) के लिए रैंकिंग के 100 अंकों को दोगुना कर दिया था। वहीं स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग को वेटेज दिया गया। इसका असर यह हुआ कि शहरों को जगह-जगह सीएंडडी वेस्ट कलेक्शन सिस्टम लगाना पड़ा। इससे इसके रीसाइक्लिंग क्षमता में वृद्धि हुई।
