गोपाल राय ने उत्तर भारत में प्रदूषण के कारण केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से ‘सक्रिय’ होने की अपील की
नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से ‘‘सक्रिय’’ होने की शुक्रवार को अपील करते हुए कहा कि न केवल राष्ट्रीय राजधानी, बल्कि समूचा उत्तर भारत प्रदूषण की चपेट में है। राय ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहरा रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश और हरियाणा में खराब वायु गुणवत्ता के लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं। राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से ‘‘सक्रिय’’ होने की अपील करते हुए कहा, ‘‘ऐसा नहीं लगता कि दिल्ली में कोई केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय भी है।’’ एक स्वतंत्र थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट’ के एक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में 69 प्रतिशत वायु प्रदूषण पड़ोसी राज्यों से आता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम (दिल्ली) समस्या से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं लेकिन कोई नहीं जानता कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पर्यावरण मंत्री क्या कर रहे हैं।’’ उन्होंने आगाह किया कि समूचे दिल्ली-एनसीआर के लिए अगले 15 दिन अहम है और सभी राज्य सरकारों को चौकन्ना रहना चाहिए और वायु प्रदूष्ण से निपटने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। राय ने कहा कि सरकार को फीडबैक मिला है कि संबंधित विभागों द्वारा गठित वायु प्रदूषण निगरानी दल जमीनी स्तर पर उचित तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अत: हमने इन दलों के कामकाज पर नजर रखने के लिए एक तंत्र बनाने के वास्ते सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं।’’ यह सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं कि वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए केंद्र के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। सीएक्यूएम ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता ‘‘गंभीर’’ श्रेणी में चली जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर में बृहस्पतिवार को गैर-जरूरी निर्माण कार्य, पत्थर काटने और खनन पर प्रतिबंध का आदेश दिया।
