प्रदूषित हवा को लेकर किया मंथन
खनिज संपदा से समृद्ध उदयपुर में कई खनिज और पत्थर आधारित उद्योग हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। इसको लेकर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 2019 में ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ के तहत उदयपुर शहर को गैर-प्राप्ति शहरों में सूचीबद्ध किया था। इसके लिए तैयार प्लान पर काम नहीं किया गया। इसको लेकर उदयपुर के एक होटल में कार्यशाला हुई। नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एण्ड एनवायरमेंट के आंकलन ने इन उद्योगों से होने वाले फ्यूजिटिव उत्सर्जन और सड़क की धूल को जिले में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारकों के रूप में चिन्हित किया। इसके लिए सीएसई ने उदयपुर की हवा को साफ करने के लिए एक रोडमैप की पेशकश की है। इस रोडमैप को तैयार करने के लिए सीएसई और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आयोजित कार्यशाला में उदयपुर में वायु प्रदूषण कम करने पर चर्चा की। सीएसई के औद्योगिक प्रदूषण विभाग के कार्यक्रम निदेशक निवित यादव ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण को कम करने की दिशा में कार्यक्रम किए जाने की जरूरत है। आरएसपीसीबी क्षेत्रीय अधिकारी शरद सक्सेना ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण से निजात पाने के लिए मजबूत मानसिकता का निर्माण करना होगा। इस मौके पर सीएसई की औद्योगिक प्रशिक्षण इकाई की उप कार्यक्रम प्रबंधक श्रेया वर्मा ने कहा कि उद्योगों के सतत विकास के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण को अपनाएं। इस दौरान वक्ताओं ने वायु प्रदूषण कम करने के सुझाव भी दिए।
