'प्रदूषण अब सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं रही, पूरे साल बना रहता संकट': CPCB रिपोर्ट
'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' (CSE) के एक अध्ययन में पाया गया कि फरवरी में 16 दिनों तक दिल्ली में ओजोन ही मुख्य प्रदूषक था. यह इस बात का संकेत है कि ओजोन से होने वाला प्रदूषण अब साल भर की चिंता का विषय बनता जा रहा है. पार्टिकुलेट मैटर (PM) के विपरीत, ओजोन सीधे पर्यावरण में उत्सर्जित नहीं होता है, बल्कि यह सूरज की रोशनी की मौजूदगी में नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के बीच होने वाली प्रतिक्रियाओं से बनता है. ओजोन बनाने वाली ये गैसें मुख्य रूप से वाहनों के धुएं, उद्योगों और ईंधन के जलने से निकलती हैं. दिल्ली-एनसीआर की हवा में ये गैसें हमेशा मौजूद रहती हैं, यही वजह है कि जनवरी जैसे ठंडे महीने में भी ओजोन अक्सर दिल्ली का मुख्य प्रदूषक पाया जाता है.
