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खराब एयर क्वालिटी IVF लैब्स को प्रभावित कर सकती है; एक्सपर्ट के मुताबिक प्रदूषण स्टिल बर्थ के मामलों को बढ़ा सकते हैं

स्नेहा कुमारी: ग्रीन थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार, अक्टूबर से नवंबर तक की अवधि में दिल्ली पिछले आठ सालों की तुलना में सबसे कम प्रदूषित थी और सर्दियों के मौसम में अब तक कोई गंभीर स्मॉग नहीं देखा गया है. हालांकि ये बहुत अच्छी बात है लेकिन वायु प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है, इससे यह समस्या दूर नहीं होती है. हमारे स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को समझने के लिए की जा रही कई स्टडी के मद्देनजर, एक्सपर्ट ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) की प्रक्रिया के परिणाम पर इनडोर एयर क्वॉलिटी का सीधा प्रभाव पड़ता है. पूरे भारत में आईवीएफ क्लीनिकों के अंदर रियल-टाइम एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) की मॉनिटरिंग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास में, हाल ही में एक स्टडी की गई थी जिसमें लैब में मौजूद पॉल्यूटेंट्स (प्रदूषकों) को हाईलाइट किया गया था जो आईवीएफ प्रक्रिया के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. एयर प्यूरिफायर बनाने वाली कंपनी ऑरा एयर ने देश भर के आईवीएफ क्लीनिकों में इनडोर एयर क्वॉलिटी पर एक रिसर्च की है. मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग की सलाहकार डॉ. गंधाली देवरुखकर ने News9 को बताया, “लैब में किए जाने वाले हर IVF ऑपरेशन के दौरान HEPA फिल्टर का इस्तेमाल किया जाता है. दो मुख्य कारक हैं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ओजोन जो एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (वायु गुणवत्ता सूचकांक) को गिराने का कारण बनते हैं और लोअर बर्थ रेट से जुड़े हैं. इसके अलावा, 10 मिमी या उससे ज्यादा बड़े कणों को गर्भवती महिलाओं के गर्भपात से जोड़कर देखा गया है.” “चूंकि पूरी आईवीएफ प्रक्रिया क्वॉलिटी कंट्रोल के साथ एक नियंत्रित सेटिंग में की जाती है, इसलिए किसी भी गलती का गर्भावस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. HEPA प्यूरीफायर को जितना ज्यादा वायु प्रदूषण बाहर है उस हिसाब से फिलटरेशन करना चाहिए, हालांकि यह पूरी तरह से मशीन की क्वॉलिटी पर निर्भर करता है. आईवीएफ ऑपरेशन रूम के अंदर हवा की गुणवत्ता को बनाए रखा जाना चाहिए. किसी भी कमी का उस महीने की गई हर आईवीएफ प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है. हवा में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड स्टिलबर्थ से जुड़ी है स्टडी के उपायों में AQI, PM 2.5 और PM 10 (पार्टिकुलेट मैटर), VOCs (वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड), CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड), CO (कार्बन मोनोऑक्साइड), तापमान और आर्द्रता शामिल थे. डॉ देवरुखकर ने कहा, “चाहे आईवीएफ लैब के बाहर हो या अंदर सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड सहित अन्य गैसें गर्भपात और प्रजनन दर कम करने में भूमिका निभाती हैं. वायु प्रदूषण के चलते पुरुषों और महिलाओं दोनों ने प्रजनन क्षमता में कमी का अनुभव किया है.” उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ओव्यूलेशन के दौरान अंडों में मौजूद द्रव को प्रभावित करता है और इससे अंडों की गुणवत्ता खराब हो जाती है. इसके चलते प्रजनन दर कम और गर्भपात हो सकता है. मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड स्टिल बर्थ रेट से खास तौर पर जुड़ी हुई है.” AQI कई मौकों पर औसतन 250 से ज्यादा रहता है स्टडी के परिणामों के मुताबिक लैब्स में AQI कई मौकों पर औसतन 250 से ज्यादा हो गया, जिसे अनहेल्दी और घातक माना जाता है. VOC एक कॉमन इनडोर एयर पोल्यूटेंट (वायु प्रदूषक) स्टडी का प्रमुख प्रदूषक था, जिसका रिकॉर्ड किया गया उच्चतम स्तर 2600ppb था, जबकि इसका सुरक्षित स्तर 500ppb से कम है. स्टडी में पाया गया कि CO2, PM 2.5, PM 10 और CO का स्तर सुरक्षित सीमा के अंदर था. स्टडी के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए ऑरा एयर के प्रबंध निदेशक भारद्वाज पीवी ने कहा, “प्रयोगशालाओं में पाए जाने वाले वायु कण या किसी भी प्रकार के प्रदूषक संपूर्ण आईवीएफ प्रक्रिया के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. यह स्टडी वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता की जांच के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए आयोजित की गई थी. यहां तक कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बिल भारतीय आईवीएफ केंद्रों के लिए मासिक वायु-गुणवत्ता रिपोर्ट देना अनिवार्य बनाता है.” “आईवीएफ केंद्रों के पास आज उन उपकरणों के लिए एक बजट है जो VOC के स्तरों पर नजर रखते हैं और उसे कम करते हैं. इनडोर एयर पोल्यूटेंट (वायु प्रदूषकों) को HEPA पर आधारित हाई क्वालिटी वाले फिल्टर के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है. हमें विश्वास है कि मेडिकल लेबोरेटरी, आईवीएफ सेंटर और अस्पताल जल्द ही एयर क्वालिटी को मॉनिटर करने और हानिकारक VOC से छुटकारा पाने के लिए प्यूरिफिकेशन टेक्नोलॉजी में निवेश को प्राथमिकता देंगे क्योंकि यह लैब के परिणामों पर खराब असर डाल सकते हैं.”

Delhi Pollution: दिल्ली के कई इलाकों में खराब हुई हवा, यहां आज भी 200 से कम AQI, जानें मौसम का हाल

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (Centre for Science and Environment)की मानें तो सर्दियों के इस सीजन में अबतक किसी भी दिन गंभीर श्रेणी में स्मॉग दर्ज नहीं क... https://www.aajtak.in/india/delhi/story/aqi-delhi-today-air-quality-improve-15-december-pollution-updates-in-delhi-cpcb-data-safar-mausam-updates-lbs-1595139-2022-12-15

Delhi’s AQI at ‘moderate’, better than usual for December

“Low winds in winter, which usually sees calm conditions, facilitate dispersion of pollutants. This December, the days have been warm which has also broken our fall into severely air-polluted days,” said a Delhi Pollution Control Committee (DPCC) official. A winter breeze has brought Delhi’s air quality from ‘very poor’ to ‘moderate’ in a matter of three days. The city, which usually sees ‘very poor’ or ‘severe’ air quality days in winter, recorded ‘moderate’ air Tuesday and Wednesday morning. While the Air Quality Index (AQI) on Tuesday was 177, it stood at 160 Wednesday morning. “Low winds in winter, which usually sees calm conditions, facilitate dispersion of pollutants. This December, the days have been warm which has also broken our fall into severely air-polluted days,” said a Delhi Pollution Control Committee (DPCC) official. Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal, meanwhile, talking about a Centre of Science and Environment (CSE) report said Wednesday, “The people of Delhi have worked hard to reduce pollution. We are seeing results slowly. We have to reduce it further.”

Delhi Pollution Updates: खुलकर लें सांस, दिल्ली में हैं आप! प्रदूषण से मिली राहत, सभी इलाकों का AQI बेहतर

दिल्ली सरकार प्रदूषण को लेकर समय-समय पर एक्शन ले रही है. जिसका सकारात्मक असर दिल्ली के प्रदूषण के स्तर में देखने को मिल रहा है. इसकी पुष्टि थिंक टैंक ... https://www.aajtak.in/india/delhi/story/aqi-delhi-air-quality-improve-today-14-december-pollution-updates-aqi-moderate-cpcb-data-safar-mausam-updates-lbs-1594470-2022-12-14

स्मॉग का पहरा हुआ कम, दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार, खुल कर ले सकते हैं सांस

सर्दियों के दिनों दिल्ली और एनसीआर की हवा में प्रदूषण का स्तर कुछ अधिक ही रहता है। लेकिन तेज हवा की वजह से प्रदूषण के स्तर में कमी आई है। इसका मतलब ये कि आप खुलकर सांस ले सकते हैं। दिल्ली का एक्यूआई इस समय 133 जोकि मॉडरेट कैटिगरी में है। सीएसई के डेटा के मुताबिक दिसंबर के 13 दिन बीत चुके हैं और इन दिनों में किसी भी दिन गंभीर श्रेणी में स्मॉग नहीं दर्ज किया गया है। अच्छी बात यह है कि दिल्ली के करीब करीब सभी इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहतर हुई है। बता दें कि ग्रेप की तीसरी श्रेणी के तहत पाबंदियों को हटाया गया है हालांकि ग्रेप-2 में पाबंदियां लागू हैं। एक्यूआई में कमी रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर में वायु की गुणवत्ता औसतन 142 के करीब रही है। अगर 2018 से इसकी तुलना करें तो 18 फीसद की कमी और 2016 की अपेक्षा करीह 37 फीसद की कमी है। 2016 का साल इस मायने में खराब साबित हुआ क्योंकि अक्टूबर और नवंबर के महीने में वायु की गुणवत्ता बेहद खराब थी। जानकारों का कहना है कि दिल्ली और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर जमीन पर नजर आ रहा है लेकिन इस दिशा में अभी और कुछ करने की जरूरत है।

दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से उत्पन्न धुंआ कम देखा गया

पंजाब और हरियाणा में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 2016 के बाद सबसे कम रही इतना ही नहीं दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान चार वर्षों में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं सबसे कम देखा गया। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ होता हैं कि 12 अक्टूबर से पराली जलाने से उत्पन्न धुएं की वजह से प्रदूषक कणों-पीएम 2.5 ने इस साल 53 दिन तक वायु प्रदूषण में योगदान दिया। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम है जब 56-57 दिन तक पराली जलाने की वजह से हानिकारक धुंध होती थी लेकिन यह 2018 के 48 दिनों के आंकड़े से अधिक है। पराली जलाने से धुएं का वायु प्रदूषण में योगदान साल 2022 सबसे ज्यादा तीन नवंबर को 34 फीसदी था वहीं पिछले साल यह सात नवंबर को सर्वाधिक 48 फीसदी था। सीएसई ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित धुएं में कमी दिल्ली में दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है पराली जलाने की घटनाओं की संख्या एवं तीव्रता तथा राष्ट्रीय राजधानी में धुएं के परिवहन के लिए अनुकूल मौसम स्थितियां। इसने कहा कि इस साल अक्टूबर-नवंबर में न केवल पराली जलाने की घटनाओं की संख्या और तीव्रता तुलनात्मक रूप से कम रही बल्कि धुएं के परिवहन के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियां भी कम अनुकूल रहीं।

दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से उत्पन्न धुंआ कम देखा गया

पंजाब और हरियाणा में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 2016 के बाद सबसे कम रही इतना ही नहीं दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान चार वर्षों में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं सबसे कम देखा गया। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ होता हैं कि 12 अक्टूबर से पराली जलाने से उत्पन्न धुएं की वजह से प्रदूषक कणों-पीएम 2.5 ने इस साल 53 दिन तक वायु प्रदूषण में योगदान दिया। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम है जब 56-57 दिन तक पराली जलाने की वजह से हानिकारक धुंध होती थी लेकिन यह 2018 के 48 दिनों के आंकड़े से अधिक है। पराली जलाने से धुएं का वायु प्रदूषण में योगदान साल 2022 सबसे ज्यादा तीन नवंबर को 34 फीसदी था वहीं पिछले साल यह सात नवंबर को सर्वाधिक 48 फीसदी था। सीएसई ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित धुएं में कमी दिल्ली में दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है पराली जलाने की घटनाओं की संख्या एवं तीव्रता तथा राष्ट्रीय राजधानी में धुएं के परिवहन के लिए अनुकूल मौसम स्थितियां। इसने कहा कि इस साल अक्टूबर-नवंबर में न केवल पराली जलाने की घटनाओं की संख्या और तीव्रता तुलनात्मक रूप से कम रही बल्कि धुएं के परिवहन के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियां भी कम अनुकूल रहीं।

दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से उत्पन्न धुंआ कम देखा गया

पंजाब और हरियाणा में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 2016 के बाद सबसे कम रही इतना ही नहीं दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान चार वर्षों में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं सबसे कम देखा गया। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ होता हैं कि 12 अक्टूबर से पराली जलाने से उत्पन्न धुएं की वजह से प्रदूषक कणों-पीएम 2.5 ने इस साल 53 दिन तक वायु प्रदूषण में योगदान दिया। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम है जब 56-57 दिन तक पराली जलाने की वजह से हानिकारक धुंध होती थी लेकिन यह 2018 के 48 दिनों के आंकड़े से अधिक है। पराली जलाने से धुएं का वायु प्रदूषण में योगदान साल 2022 सबसे ज्यादा तीन नवंबर को 34 फीसदी था वहीं पिछले साल यह सात नवंबर को सर्वाधिक 48 फीसदी था। सीएसई ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित धुएं में कमी दिल्ली में दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है पराली जलाने की घटनाओं की संख्या एवं तीव्रता तथा राष्ट्रीय राजधानी में धुएं के परिवहन के लिए अनुकूल मौसम स्थितियां। इसने कहा कि इस साल अक्टूबर-नवंबर में न केवल पराली जलाने की घटनाओं की संख्या और तीव्रता तुलनात्मक रूप से कम रही बल्कि धुएं के परिवहन के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियां भी कम अनुकूल रहीं।

Delhi’s AQI at ‘moderate’, better than usual for December

A wintertime breeze has brought Delhi’s aerial prime from ‘very poor’ to ‘moderate’ successful a substance of 3 days. The city, which usually sees ‘very poor’ oregon ‘severe’ aerial prime days successful winter, recorded ‘moderate’ aerial Tuesday and Wednesday morning. While the Air Quality Index (AQI) connected Tuesday was 177, it stood astatine 160 Wednesday morning. “Low winds successful winter, which usually sees calm conditions, facilitate dispersion of pollutants. This December, the days person been lukewarm which has besides breached our autumn into severely air-polluted days,” said a Delhi Pollution Control Committee (DPCC) official. Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal, meanwhile, talking astir a Centre of Science and Environment (CSE) study said Wednesday, “The radical of Delhi person worked hard to trim pollution. We are seeing results slowly. We person to trim it further.” The CSE study had said Delhi has seen the cleanest October-November aerial successful 8 years and that determination had been nary prolonged smog episodes successful the clip framework successful 5 years. Air contamination is simply a analyzable factor, which depends not conscionable connected the input of pollutants but besides connected geographical location, temperature, upwind speed, upwind absorption etc. The archetypal 2 weeks of December person not seen immoderate occidental disturbance and nary rainfall either and the days person been warmer than usual. According to the India Meteorological Department (IMD), the maximum somesthesia till December 20 is going to beryllium astir 25-26 degrees Celsius portion the minimum volition beryllium astir 7-8 degrees Celsius. Shallow fog is expected starting Saturday morning. On Wednesday, the minimum somesthesia (recorded aboriginal morning) was recorded arsenic 10 degrees Celsius, a grade supra normal. The maximum is expected to beryllium astir 27 degrees Celsius, overmuch warmer than accustomed for this clip of the year.

दिल्ली में घटा प्रदूषण का स्तर, जानें कैसे घटा सभी इलाकों का AQI

दिल्ली की हवा में कुछ दिनों से राहत मिलती हुई नजर आ रही है। अभी कुछ दिन पहले जहां राजधानी में स्मॉग का और प्रदूषण का सितम छाया रहता था लेकिन अब आसमान साफ देखने के मिल रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आज राजधानी दिल्ली का AQI रिपोर्ट पेश किया जिसमें दिल्ली की हवा का AQI 157 दर्ज किया गया जो कि मध्मम श्रेणी में आता है। राजधानी में सभी इलाकों का एयर क्वालिटी पहले के मुताबिक काफी बेहतर हुआ है। दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली की सरकार लगातार कई तरह के प्रयास कर रही है जिससे लोगों के नेचुरल एयर मिल पाए। दिल्ली सरकार के प्रयासों से असर देखने को मिल भी रहा है। इसकी पुष्टि थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट’ (सीएसई) के डाटा से भी हो रही है। विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (Centre for Science and Environment)की मानें तो सर्दियों के इस सीजन में अबतक किसी भी दिन गंभीर श्रेणी में स्मॉग दर्ज नहीं किया गया है।

COP 27: Climate Change Mitigation Gains Urgency

More concerted and immediate action will need to be taken to combat the intensifying climate change crisis. This was the message coming out loud and clear at the recently concluded 27th session of the Conference of the Parties of the UNFCCC (COP27) for climate change hosted in Egypt between November 6-18, 2022. The conference could not have come at a more crucial time. From unprecedented floods in Pakistan to drought in China, from wildfires in Europe and Australia to hurricanes in the US, the frequency and severity of extreme climate change disasters have been extracting an ever more devastating humanitarian and economic toll. India has not been immune to the climate crisis. The Centre for Science and Environment (CSE), in its “India 2022: An Assessment of Extreme Weather Events” report, noted that the country experienced extreme weather events on 241 of the 273 days between January 1 and September 30, 2022. India and Climate Action Today, India has the dubious distinction of being the world’s fourth largest emitter, after China, the US, and the European Union. Add to this, over the last decade, India and China have registered the highest emission growth rates. More tellingly, the Global Carbon Budget report, published during the COP27 Conference, estimates that while China and the EU will reduce their emission rates in 2022, India’s emissions will spike by 6%. Nevertheless, the significant point is that India’s relatively high emission growth rate notwithstanding, its per capita emission is still lower than that of China, the US, and the EU, with annual per capita emissions around one-third of the global average. Cognizant of the need for immediate climate control measures, India has been spearheading policy, strategy, initiatives, and investments designed to shift to low-carbon development and reduce emissions. At COP 26 in Glasgow in 2021, India committed to the short-term goal of meeting half its energy needs from renewable sources by 2030 and to the long-term goal of realising net zero emissions by 2070. India has clearly indicated its intention of keeping to its commitments. At COP27, it released its Long-Term Low Emissions Development Strategy, sharing the roadmap of how it plans to transition to low carbon in key economic sectors and foreseeing the expanded use of renewables and nuclear power. This places the country in a select group of only 57 countries that have drawn up similar long-term climate action strategies. To meet its 2030 climate targets, India revised its Nationally Determined Contributions (NDC) in August 2022. The agenda envisages that the country will “reduce the emissions intensity of its GDP by 45% by 2030, from 2005 level, and achieve about 50% cumulative electric power installed capacity from non-fossil fuel-based energy resources by 2030.” Thrust Towards E-Mobility One aspect of India’s thrust towards low-carbon pathways is technology, whether in terms of renewable and alternate energy development or e-mobility and clean energy solutions. E-mobility has been high on the government’s agenda. The Faster Adoption and Manufacture of (Hybrid) and Electric/Hybrid Vehicles (FAME II) scheme, the Production Linked Incentive for Advanced Chemistry Cell Battery Storage (PLI-ACC Scheme), the proposed battery swapping policy, and scrappage policy seek to incentivise the move to electric and hybrid vehicles. While the move to e-mobility is important, India will have to contend with China’s dominance of an already volatile electric vehicle (EV) supply chain. And while there are challenges galore, Atmanirbhar Bharat seeks to reinforce localised supply chains and manufacturing capabilities, along with the expanding use of intelligent transport systems and smart city infrastructure, to create a sustainable mobility ecosystem.

दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से उत्पन्न धुंआ कम देखा गया

पंजाब और हरियाणा में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 2016 के बाद सबसे कम रही इतना ही नहीं दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान चार वर्षों में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं सबसे कम देखा गया। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ होता हैं कि 12 अक्टूबर से पराली जलाने से उत्पन्न धुएं की वजह से प्रदूषक कणों-पीएम 2.5 ने इस साल 53 दिन तक वायु प्रदूषण में योगदान दिया। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम है जब 56-57 दिन तक पराली जलाने की वजह से हानिकारक धुंध होती थी लेकिन यह 2018 के 48 दिनों के आंकड़े से अधिक है। पराली जलाने से धुएं का वायु प्रदूषण में योगदान साल 2022 सबसे ज्यादा तीन नवंबर को 34 फीसदी था वहीं पिछले साल यह सात नवंबर को सर्वाधिक 48 फीसदी था। सीएसई ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित धुएं में कमी दिल्ली में दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है पराली जलाने की घटनाओं की संख्या एवं तीव्रता तथा राष्ट्रीय राजधानी में धुएं के परिवहन के लिए अनुकूल मौसम स्थितियां। इसने कहा कि इस साल अक्टूबर-नवंबर में न केवल पराली जलाने की घटनाओं की संख्या और तीव्रता तुलनात्मक रूप से कम रही बल्कि धुएं के परिवहन के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियां भी कम अनुकूल रहीं।

दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से उत्पन्न धुंआ कम देखा गया

पंजाब और हरियाणा में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 2016 के बाद सबसे कम रही इतना ही नहीं दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान चार वर्षों में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं सबसे कम देखा गया। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ होता हैं कि 12 अक्टूबर से पराली जलाने से उत्पन्न धुएं की वजह से प्रदूषक कणों-पीएम 2.5 ने इस साल 53 दिन तक वायु प्रदूषण में योगदान दिया। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम है जब 56-57 दिन तक पराली जलाने की वजह से हानिकारक धुंध होती थी लेकिन यह 2018 के 48 दिनों के आंकड़े से अधिक है। पराली जलाने से धुएं का वायु प्रदूषण में योगदान साल 2022 सबसे ज्यादा तीन नवंबर को 34 फीसदी था वहीं पिछले साल यह सात नवंबर को सर्वाधिक 48 फीसदी था। सीएसई ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित धुएं में कमी दिल्ली में दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है पराली जलाने की घटनाओं की संख्या एवं तीव्रता तथा राष्ट्रीय राजधानी में धुएं के परिवहन के लिए अनुकूल मौसम स्थितियां। इसने कहा कि इस साल अक्टूबर-नवंबर में न केवल पराली जलाने की घटनाओं की संख्या और तीव्रता तुलनात्मक रूप से कम रही बल्कि धुएं के परिवहन के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियां भी कम अनुकूल रहीं।

दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से उत्पन्न धुंआ कम देखा गया

नई दिल्ली । पंजाब और हरियाणा में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 2016 के बाद सबसे कम रही इतना ही नहीं दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर के दौरान चार वर्षों में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं सबसे कम देखा गया। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ होता हैं कि 12 अक्टूबर से पराली जलाने से उत्पन्न धुएं की वजह से प्रदूषक कणों-पीएम 2.5 ने इस साल 53 दिन तक वायु प्रदूषण में योगदान दिया। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम है जब 56-57 दिन तक पराली जलाने की वजह से हानिकारक धुंध होती थी लेकिन यह 2018 के 48 दिनों के आंकड़े से अधिक है। पराली जलाने से धुएं का वायु प्रदूषण में योगदान साल 2022 सबसे ज्यादा तीन नवंबर को 34 फीसदी था वहीं पिछले साल यह सात नवंबर को सर्वाधिक 48 फीसदी था। सीएसई ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित धुएं में कमी दिल्ली में दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है पराली जलाने की घटनाओं की संख्या एवं तीव्रता तथा राष्ट्रीय राजधानी में धुएं के परिवहन के लिए अनुकूल मौसम स्थितियां। इसने कहा कि इस साल अक्टूबर-नवंबर में न केवल पराली जलाने की घटनाओं की संख्या और तीव्रता तुलनात्मक रूप से कम रही बल्कि धुएं के परिवहन के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियां भी कम अनुकूल रहीं।

Midway through the winter: Overview of Delhi-NCR air quality during October-November

Summary This is the first analysis of the third edition of Urban Lab’s Air Quality Tracker Initiative which was started in 2020-21 winter to study the impact of pandemic lockdowns on Delhi’s air quality. [...] 1 Urban Lab - Centre for Science and Environment Analysis Highlights of the key findings The early phase of this winter (October-November) was the least polluted in last 8 years in Delhi: The average PM2.5 level across 37 functional CAAQMS stations of Delhi stood at 142 µg/m3 for months of October and November. [...] Source: CSE analysis Farm stubble fires this year are about half of the previous year: The total count of farm stubble fires reported this year from Punjab, Haryana and Delhi in months of October and November stood at 54,391 according to NASA’s VIIRS satellite and 11,824 according to NASA’s MODIS satellite (See Graph 5: Trend in farm stubble fire counts in Punjab, Haryana and Delhi during October-. [...] If the FRP (fire radiative power is measure of intensity of fire) is taken into account in addition to the number of fire, it becomes clear that not only the fires were lesser in count but also lesser in intensity compared to previous two years. [...] This October-November not only the quantity and intensity of farm stubble fires have been comparatively lower but also the meteorological conditions have been less conducive for the transport 5 Urban Lab - Centre for Science and Environment Analysis of the smoke.

इस वर्ष अक्टूबर-नवंबर की अवधि दिल्ली में आठ साल में सबसे कम प्रदूषित : सीएसई

थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट’ (सीएसई) के अनुसार, इस साल अक्टूबर से नवंबर तक की अवधि दिल्ली में पिछले आठ वर्षों में सबसे कम प्रदूषित रही है और इस बार सर्दियों के मौसम में अब तक कोई गंभीर स्मॉग नहीं हुआ है। सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, ‘‘गर्म अक्टूबर में दीवाली, फसल में आग लगने की घटनाओं में कमी, प्रदूषण के पूर्वानुमान के आधार पर पहले से की गयी कार्रवाई, और अक्टूबर में विस्तारित वर्षा सहित अनुकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों, सभी ने शुरुआती सर्दियों के प्रदूषण के स्तर को कम करने में योगदान दिया है।’’ लेकिन बाद में प्रदूषण के स्तर में और अधिक उछाल आ सकता है जैसा कि आमतौर पर पिछले वर्षों में देखा गया है। उन्होंने कहा कि सर्दियों के प्रदूषण को संतोषजनक स्तर पर लाने के लिए पहले से किए गए मजबूत उपायों और स्थानीय स्रोतों पर साल भर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।