समुदाय की भागीदारी से जंगल बचाएं
इन दिनों सारी दुनिया पर्यावरण से जुड़ी अनेक समस्याओं का सामना कर रही है। इसका नुकसान क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वार्मिंग , नई नई जानलेवा महामारी के रूप में हम देख रहे हैं। बेहतर दुनिया के लिए हमें अपने पर्यावरण को भी बेहतर बनाना होगा। प्राकृतिक संसाधनों, जंगल का संरक्षण करके हम पर्यावरण को बेहतर बना सकते हैं। इसके लिए जंगलों में रहने वाले जनजातीय समाज को अधिक अधिकारसंपन्न बनाना होगा। आदिवासी समुदाय के सहयोग से ही जंगल बचे रहेंगे। उन्हें जंगल से उत्पादित होने वाली वस्तुओं के उपयोग का अधिक अधिकार देना होगा। जंगल में रहने वाले समुदाय का सामाजिक, आर्थिक विकास कैसे हो इसकी प्रभावी योजनाएं बनाकर उनका शीघ्र क्रियान्वयन करने पर जोर देना होगा। वनवासियों की स्थिति को अधिक सुविधासंपन्न बनाकर जंगलों को बचाया , बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जंगल, जानवर के साथ ही वहां रहने वाले समुदाय का जीवन सुरक्षित, सुविधाजनक हो, इस बारे में ध्यान देना होगा पर्यटन की गतिविधि से होनेवाली आय का बड़ा हिस्सा जनजातीय समुदाय के विकास पर खर्च करना होगा। उक्त आशय के विचार सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद सुनीता नारायण ने वनवासियों के हक अधिकार पर केंद्रित कार्यशाला के दौरान प्रकट किए। इस विषय पर विमर्श के दौरान पत्रकारों के कई सवालों के जवाब विषय विशेषज्ञों द्वारा दिए गए। सेंटर ऑफ़ साइंस एंड एनवायरमेंट की प्रमुख और डाउन टू अर्थ पत्रिका की संपादक सुनीता नारायण ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वनाधिकार कानून इस तरह बनाए जाने चाहिए कि वन्यजीव भी संगठित रहें और स्थाई निवासियों को भी नुकसान ना हो। भुवनेश्वर में आयोजित इस कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार रिचर्ड महापात्रा ने वनवासियों की परेशानियों के बारे में बताया। वनाधिकार कानून के विशेषज्ञ वाय गिरी राव ने इसकी विस्तार से जानकारी देते हुए विसंगतियों पर सवाल उठाए। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार सुपर्णो बनर्जी, प्रियरंजन साहू, दीपक गुरु, डा. सतीश, चंदन, अरिंदम घोष, पूजा अवस्थी, प्रगति, सदाशिव पात्रा कंधमाल, सज्जाद बादशाह झारसुगुड़ा, सोहन दीक्षित भोपाल, मनोज सिंह प्रभात खबर रांची, अपर्णा बोस पीटीआई दिल्ली , विवेक मिश्रा दिल्ली, जी के मिश्रा, चंद्रकांत पारगे कोरिया, श्वेता मीडिया नेक्स्ट चैनल, ल्हासा चेन्नई , श्रीनिवास चल्ला आंध्र ज्योति हैदराबाद , कुमार यू एन आई बैंगलुरु, शुचिता झा , सुकन्या नायर, श्रुति मोकाक्षी, तुषार दास, जतिंद्र दास सहित बड़ी संख्या में पर्यावरणप्रेमी पत्रकार उपस्थित थे।
