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North India most-polluted region in 2022 summers: CSE

North India emerged as the most-polluted region in the country in summers this year with Delhi-NCR being the hotspot, according to a new analysis by the Centre for Science and Environment (CSE). The green think-tank said the average PM2.5 concentration in north India in summers stood at 71 microgram per cubic metre. It was 69 microgram per cubic metre in east India, 54 microgram per cubic metre in west India, and 46 microgram per cubic metre in central India, it said. Northeast India (35 microgram per cubic metre) and South India (31 microgram per cubic metre) were cleaner compared to other regions, it said. In north India, Delhi-NCR was found to be the most-polluted sub-region, with Bhiwadi reporting the highest average PM2.5 concentration of 134 microgram per cubic metre. Manesar reported average PM2.5 concentration of 119 microgram per cubic metre, Ghaziabad (101 microgram per cubic metre), Delhi (97 microgram per cubic metre), Gurugram (94 microgram per cubic metre) and Noida (80 microgram per cubic metre), it said. PM2.5 summer average of Delhi-NCR region is almost three times the average of the cities in southern India. The CSE used granular real-time data from the Central Pollution Control Board’s portal — Central Control Room for Air Quality Management for the analysis. The data is captured from 356 official stations under the Continuous Ambient Air Quality Monitoring System (CAAQMS) spread across 174 cities in 26 states and Union territories.

North India most-polluted region in 2022 summers: CSE

North India emerged as the most-polluted region in the country in summers this year with Delhi-NCR being the hotspot, according to a new analysis by the Centre for Science and Environment (CSE). The green think-tank said the average PM2.5 concentration in north India in summers stood at 71 microgram per cubic metre. It was 69 microgram per cubic metre in east India, 54 microgram per cubic metre in west India, and 46 microgram per cubic metre in central India, it said. Northeast India (35 microgram per cubic metre) and South India (31 microgram per cubic metre) were cleaner compared to other regions, it said. In north India, Delhi-NCR was found to be the most-polluted sub-region, with Bhiwadi reporting the highest average PM2.5 concentration of 134 microgram per cubic metre. Manesar reported average PM2.5 concentration of 119 microgram per cubic metre, Ghaziabad (101 microgram per cubic metre), Delhi (97 microgram per cubic metre), Gurugram (94 microgram per cubic metre) and Noida (80 microgram per cubic metre), it said. PM2.5 summer average of Delhi-NCR region is almost three times the average of the cities in southern India. The CSE used granular real-time data from the Central Pollution Control Board’s portal—Central Control Room for Air Quality Management for the analysis. The data is captured from 356 official stations under the Continuous Ambient Air Quality Monitoring System (CAAQMS) spread across 174 cities in 26 states and Union territories. PTI

North India most-polluted region in 2022 summers: CSE – Times of India

North India emerged because the most-polluted region in the nation in summers this 12 months with Delhi-NCR being the hotspot, in accordance with a brand new evaluation by the Centre for Science and Environment (CSE). The inexperienced suppose-tank stated the typical PM2.5 focus in north India in summers stood at 71 microgram per cubic metre. It was 69 microgram per cubic metre in east India, 54 microgram per cubic metre in west India, and 46 microgram per cubic metre in central India, it stated. Northeast India (35 microgram per cubic metre) and South India (31 microgram per cubic metre) had been cleaner in comparison with different areas, it stated. In north India, Delhi-NCR was discovered to be the most-polluted sub-region, with Bhiwadi reporting the very best common PM2.5 focus of 134 microgram per cubic metre. Manesar reported common PM2.5 focus of 119 microgram per cubic metre, Ghaziabad (101 microgram per cubic metre), Delhi (97 microgram per cubic metre), Gurugram (94 microgram per cubic metre) and Noida (80 microgram per cubic metre), it stated. PM2.5 summer time common of Delhi-NCR region is nearly 3 times the typical of the cities in southern India. The CSE used granular actual-time knowledge from the Central Pollution Control Board’s portal — Central Control Room for Air Quality Management for the evaluation. The knowledge is captured from 356 official stations underneath the Continuous Ambient Air Quality Monitoring System (CAAQMS) unfold throughout 174 cities in 26 states and Union territories.

Pollution: लोगों का दम घोंट रहा प्रदूषण, छोटे शहर बने नए हॉटस्पॉट, गर्मियों में हालात हुए बद से बदतर

Pollution Causes: प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिससे होने वाली मौतों और इससे होने वाले नुकसान का पता लगाने का कोई वैज्ञानिक आधार फिलहाल मौजूद नहीं है. लेकिन ये एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो 24 घंटे हमें नुकसान पहुंचा रही है. CSE यानी Centre for Science and Environment ने गर्मियों में वायु प्रदूषण के स्तर का डाटा जारी किया है. इस डाटा के मुताबिक केवल दिल्ली जैसे बडे शहर ही नहीं, अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण नए रिकॉर्ड बना रहा है. हालांकि दिल्ली-NCR रीजन अब भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर है. दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तीन गुना ज्यादा है. इस वर्ष पिछली गर्मी के मुकाबले प्रदूषण ज्यादा रहा है. भारत के सबसे प्रदूषित शहर इस रिपोर्ट के लिहाज से देखें तो अब भारत का सबसे प्रदूषित शहर राजस्थान का भिवाड़ी है, जहां गर्मियों के दौरान प्रदूषण का औसत 134 रहा. इसके बाद हरियाणा के मानेसर की बारी आती है जो भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है. यहां गर्मियों के प्रदूषण का औसत 119 रहा. तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला का है, जहां प्रदूषण का स्तर 110 रहा. इसके बाद हरियाणा के रोहतक और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नंबर है. भारत के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 12 शहर दिल्ली एनसीआर के हैं. गर्मियों में भारत के सबसे कम प्रदूषित शहरों की बात की जाए तो मिजोरम का एजवाल और तमिलनाडु का गुम्मीडिपुंडी सबसे कम प्रदूषित है. हालांकि उत्तर भारत के कुछ शहर ऐसे भी हैं, जहां पिछली गर्मियों के मुकाबले इस बार प्रदूषण में कमी दर्ज हुई है. पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश का वाराणसी है जहां प्रदूषण के स्तर में 59% की कमी आई है. इसके अलावा बल्लभगढ़ जालंधर पाली आगरा और श्रीनगर में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है. प्रदूषण के यह आंकड़े 1 मार्च से 31 मई के बीच के हैं. इस दौरान के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का पीएम 2.5 डाटा को एकत्रित कर उसका विश्लेषण किया गया है. सीपीसीबी के 356 स्टेशन से यह डाटा लिया गया. यह स्टेशन भारत के 26 राज्यों के 174 शहरों में मौजूद है. प्रदूषण के मामले में पूरे उत्तर भारत का हाल सबसे खराब है और दिल्ली-एनसीआर गर्मियों के दौरान प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना है. गर्मियों के औसत प्रदूषण का स्तर हुआ बेहद खराब गर्मियों के मौसम में भी उत्तर भारत में पीएम 2.5 का स्तर 71 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. इसके बाद पूर्वी भारत का नंबर आता है जहां पीएम 2.5 का स्तर 69 ग्राम माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. पश्चिमी भारत में यह स्तर 54 रहा है. मध्य भारत में 46 जबकि उत्तर पूर्वी भारत में 35 और दक्षिण के राज्यों में यह स्तर 31 रहा है. भारत में दिल्ली-एनसीआर रीजन सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया. इस रीजन में राजस्थान के भिवाड़ी में सबसे ज्यादा प्रदूषण का स्तर रिकॉर्ड किया गया. यहां प्रदूषण का औसत गर्मियों के दौरान 134 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. मानेसर में यह स्तर 119, गाजियाबाद में 101, दिल्ली में 97, गुरुग्राम में 94 और नोएडा में पीएम 2.5 80 के करीब रहा है. दक्षिण के राज्यों के मुकाबले एनसीआर रीजन का यह स्तर 3 गुना ज्यादा है. हालांकि यह गर्मियों का औसत प्रदूषण निकाला गया है. अगर बात इस बारे में करें कि 1 दिन में किस शहर में या किस इलाके में प्रदूषण पीक पर पहुंचता है तो उसमें बाजी बिहार ने मारी है. बिहार में गर्मियों में प्रदूषण का पीक या चरम 168 रहा है. उत्तर भारत में प्रदूषण का चरम स्तर 142 था. पश्चिमी भारत में 106, मध्य भारत में 89, उत्तर पूर्व में 81 और दक्षिण भारत में यह स्तर 65 रहा है. बिहार जहां प्रदूषण अपने चरम स्तर पर लगभग रोजाना पहुंचता रहा. वहां बिहार शरीफ में प्रदूषण का स्तर 285 तक चला गया. कटिहार में 245 और पटना में यह स्तर 200 तक पहुंचा. उत्तर भारत के रोहतक में भी प्रदूषण का पीक काफी खराब रहा और यह 258 तक पहुंचा. इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण के हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं. पिछले वर्ष की गर्मियों के मुकाबले इस वर्ष गर्मियों में हर रीजन में प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल के मुकाबले हुई बढ़ोतरी उत्तर भारत में पिछले साल के मुकाबले सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई जो 23% की थी. उत्तर भारत में एनसीआर रीजन में ही सबसे ज्यादा प्रदूषण बढ़ा है. पिछले वर्ष के मुकाबले दिल्ली एनसीआर रीजन के लोगों ने 25.8% ज्यादा प्रदूषण झेला. मध्य भारत में 15% की बढ़ोतरी दर्ज हुई. पश्चिमी भारत में 4% पूर्वी भारत में 1.8% दक्षिण के राज्यों में प्रदूषण नहीं बढ़ा नॉर्थ ईस्ट के रीजन में पिछले वर्ष के मुकाबले प्रदूषण के स्तर में कमी दर्ज हुई सीएससी की रिसर्चर अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक, गर्मियों में प्रदूषण के बढ़ने की वजह गाड़ियां इंडस्ट्री पावर प्लांट वेस्ट बर्निंग और धूल का ज्यादा उड़ना है और इन समस्याओं से निजात पाने के लिए बड़े स्तर पर जमीन पर काम करना होगा. जंगलों को कटने से बचाना होगा. शहरों में तापमान कम करने के तरीकों पर काम करना होगा और फसलों में और जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाना होगा.

Pollution: लोगों का दम घोंट रहा प्रदूषण, छोटे शहर बने नए हॉटस्पॉट, गर्मियों में हालात हुए बद से बदतर

प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिससे होने वाली मौतों और इससे होने वाले नुकसान का पता लगाने का कोई वैज्ञानिक आधार फिलहाल मौजूद नहीं है. लेकिन ये एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो 24 घंटे हमें नुकसान पहुंचा रही है. CSE यानी Centre for Science and Environment ने गर्मियों में वायु प्रदूषण के स्तर का डाटा जारी किया है. इस डाटा के मुताबिक केवल दिल्ली जैसे बडे शहर ही नहीं, अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण नए रिकॉर्ड बना रहा है. हालांकि दिल्ली-NCR रीजन अब भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर है. दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तीन गुना ज्यादा है. इस वर्ष पिछली गर्मी के मुकाबले प्रदूषण ज्यादा रहा है. भारत के सबसे प्रदूषित शहर इस रिपोर्ट के लिहाज से देखें तो अब भारत का सबसे प्रदूषित शहर राजस्थान का भिवाड़ी है, जहां गर्मियों के दौरान प्रदूषण का औसत 134 रहा. इसके बाद हरियाणा के मानेसर की बारी आती है जो भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है. यहां गर्मियों के प्रदूषण का औसत 119 रहा. तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला का है, जहां प्रदूषण का स्तर 110 रहा. इसके बाद हरियाणा के रोहतक और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नंबर है. भारत के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 12 शहर दिल्ली एनसीआर के हैं. गर्मियों में भारत के सबसे कम प्रदूषित शहरों की बात की जाए तो मिजोरम का एजवाल और तमिलनाडु का गुम्मीडिपुंडी सबसे कम प्रदूषित है. हालांकि उत्तर भारत के कुछ शहर ऐसे भी हैं, जहां पिछली गर्मियों के मुकाबले इस बार प्रदूषण में कमी दर्ज हुई है. पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश का वाराणसी है जहां प्रदूषण के स्तर में 59% की कमी आई है. इसके अलावा बल्लभगढ़ जालंधर पाली आगरा और श्रीनगर में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है. प्रदूषण के यह आंकड़े 1 मार्च से 31 मई के बीच के हैं. इस दौरान के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का पीएम 2.5 डाटा को एकत्रित कर उसका विश्लेषण किया गया है. सीपीसीबी के 356 स्टेशन से यह डाटा लिया गया. यह स्टेशन भारत के 26 राज्यों के 174 शहरों में मौजूद है. प्रदूषण के मामले में पूरे उत्तर भारत का हाल सबसे खराब है और दिल्ली-एनसीआर गर्मियों के दौरान प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना है. गर्मियों के औसत प्रदूषण का स्तर हुआ बेहद खराब गर्मियों के मौसम में भी उत्तर भारत में पीएम 2.5 का स्तर 71 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. इसके बाद पूर्वी भारत का नंबर आता है जहां पीएम 2.5 का स्तर 69 ग्राम माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. पश्चिमी भारत में यह स्तर 54 रहा है. मध्य भारत में 46 जबकि उत्तर पूर्वी भारत में 35 और दक्षिण के राज्यों में यह स्तर 31 रहा है. भारत में दिल्ली-एनसीआर रीजन सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया. इस रीजन में राजस्थान के भिवाड़ी में सबसे ज्यादा प्रदूषण का स्तर रिकॉर्ड किया गया. यहां प्रदूषण का औसत गर्मियों के दौरान 134 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. मानेसर में यह स्तर 119, गाजियाबाद में 101, दिल्ली में 97, गुरुग्राम में 94 और नोएडा में पीएम 2.5 80 के करीब रहा है. दक्षिण के राज्यों के मुकाबले एनसीआर रीजन का यह स्तर 3 गुना ज्यादा है. हालांकि यह गर्मियों का औसत प्रदूषण निकाला गया है. अगर बात इस बारे में करें कि 1 दिन में किस शहर में या किस इलाके में प्रदूषण पीक पर पहुंचता है तो उसमें बाजी बिहार ने मारी है. बिहार में गर्मियों में प्रदूषण का पीक या चरम 168 रहा है. उत्तर भारत में प्रदूषण का चरम स्तर 142 था. पश्चिमी भारत में 106, मध्य भारत में 89, उत्तर पूर्व में 81 और दक्षिण भारत में यह स्तर 65 रहा है. बिहार जहां प्रदूषण अपने चरम स्तर पर लगभग रोजाना पहुंचता रहा. वहां बिहार शरीफ में प्रदूषण का स्तर 285 तक चला गया. कटिहार में 245 और पटना में यह स्तर 200 तक पहुंचा. उत्तर भारत के रोहतक में भी प्रदूषण का पीक काफी खराब रहा और यह 258 तक पहुंचा. इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण के हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं. पिछले वर्ष की गर्मियों के मुकाबले इस वर्ष गर्मियों में हर रीजन में प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल के मुकाबले हुई बढ़ोतरी उत्तर भारत में पिछले साल के मुकाबले सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई जो 23% की थी. उत्तर भारत में एनसीआर रीजन में ही सबसे ज्यादा प्रदूषण बढ़ा है. पिछले वर्ष के मुकाबले दिल्ली एनसीआर रीजन के लोगों ने 25.8% ज्यादा प्रदूषण झेला. मध्य भारत में 15% की बढ़ोतरी दर्ज हुई. पश्चिमी भारत में 4% पूर्वी भारत में 1.8% दक्षिण के राज्यों में प्रदूषण नहीं बढ़ा नॉर्थ ईस्ट के रीजन में पिछले वर्ष के मुकाबले प्रदूषण के स्तर में कमी दर्ज हुई सीएससी की रिसर्चर अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक, गर्मियों में प्रदूषण के बढ़ने की वजह गाड़ियां इंडस्ट्री पावर प्लांट वेस्ट बर्निंग और धूल का ज्यादा उड़ना है और इन समस्याओं से निजात पाने के लिए बड़े स्तर पर जमीन पर काम करना होगा. जंगलों को कटने से बचाना होगा. शहरों में तापमान कम करने के तरीकों पर काम करना होगा और फसलों में और जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाना होगा.

Pollution: लोगों का दम घोंट रहा प्रदूषण, छोटे शहर बने नए हॉटस्पॉट, गर्मियों में हालात हुए बद से बदतर

Pollution Level: दिल्ली-NCR रीजन अब भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर है. दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तीन गुना ज्यादा है. इस वर्ष पिछली गर्मी के मुकाबले प्रदूषण ज्यादा रहा है. प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिससे होने वाली मौतों और इससे होने वाले नुकसान का पता लगाने का कोई वैज्ञानिक आधार फिलहाल मौजूद नहीं है. लेकिन ये एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो 24 घंटे हमें नुकसान पहुंचा रही है. CSE यानी Centre for Science and Environment ने गर्मियों में वायु प्रदूषण के स्तर का डाटा जारी किया है. इस डाटा के मुताबिक केवल दिल्ली जैसे बडे शहर ही नहीं, अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण नए रिकॉर्ड बना रहा है. हालांकि दिल्ली-NCR रीजन अब भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर है. दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तीन गुना ज्यादा है. इस वर्ष पिछली गर्मी के मुकाबले प्रदूषण ज्यादा रहा है. भारत के सबसे प्रदूषित शहर इस रिपोर्ट के लिहाज से देखें तो अब भारत का सबसे प्रदूषित शहर राजस्थान का भिवाड़ी है, जहां गर्मियों के दौरान प्रदूषण का औसत 134 रहा. इसके बाद हरियाणा के मानेसर की बारी आती है जो भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है. यहां गर्मियों के प्रदूषण का औसत 119 रहा. तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला का है, जहां प्रदूषण का स्तर 110 रहा. इसके बाद हरियाणा के रोहतक और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नंबर है. भारत के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 12 शहर दिल्ली एनसीआर के हैं. गर्मियों में भारत के सबसे कम प्रदूषित शहरों की बात की जाए तो मिजोरम का एजवाल और तमिलनाडु का गुम्मीडिपुंडी सबसे कम प्रदूषित है. हालांकि उत्तर भारत के कुछ शहर ऐसे भी हैं, जहां पिछली गर्मियों के मुकाबले इस बार प्रदूषण में कमी दर्ज हुई है. पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश का वाराणसी है जहां प्रदूषण के स्तर में 59% की कमी आई है. इसके अलावा बल्लभगढ़ जालंधर पाली आगरा और श्रीनगर में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है. प्रदूषण के यह आंकड़े 1 मार्च से 31 मई के बीच के हैं. इस दौरान के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का पीएम 2.5 डाटा को एकत्रित कर उसका विश्लेषण किया गया है. सीपीसीबी के 356 स्टेशन से यह डाटा लिया गया. यह स्टेशन भारत के 26 राज्यों के 174 शहरों में मौजूद है. प्रदूषण के मामले में पूरे उत्तर भारत का हाल सबसे खराब है और दिल्ली-एनसीआर गर्मियों के दौरान प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना है. गर्मियों के औसत प्रदूषण का स्तर हुआ बेहद खराब गर्मियों के मौसम में भी उत्तर भारत में पीएम 2.5 का स्तर 71 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. इसके बाद पूर्वी भारत का नंबर आता है जहां पीएम 2.5 का स्तर 69 ग्राम माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. पश्चिमी भारत में यह स्तर 54 रहा है. मध्य भारत में 46 जबकि उत्तर पूर्वी भारत में 35 और दक्षिण के राज्यों में यह स्तर 31 रहा है.

Pollution: लोगों का दम घोंट रहा प्रदूषण, छोटे शहर बने नए हॉटस्पॉट, गर्मियों में हालात हुए बद से बदतर

Pollution Causes: प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिससे होने वाली मौतों और इससे होने वाले नुकसान का पता लगाने का कोई वैज्ञानिक आधार फिलहाल मौजूद नहीं है. लेकिन ये एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो 24 घंटे हमें नुकसान पहुंचा रही है. CSE यानी Centre for Science and Environment ने गर्मियों में वायु प्रदूषण के स्तर का डाटा जारी किया है. इस डाटा के मुताबिक केवल दिल्ली जैसे बडे शहर ही नहीं, अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण नए रिकॉर्ड बना रहा है. हालांकि दिल्ली-NCR रीजन अब भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर है. दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तीन गुना ज्यादा है. इस वर्ष पिछली गर्मी के मुकाबले प्रदूषण ज्यादा रहा है. इस रिपोर्ट के लिहाज से देखें तो अब भारत का सबसे प्रदूषित शहर राजस्थान का भिवाड़ी है, जहां गर्मियों के दौरान प्रदूषण का औसत 134 रहा. इसके बाद हरियाणा के मानेसर की बारी आती है जो भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है. यहां गर्मियों के प्रदूषण का औसत 119 रहा. तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला का है, जहां प्रदूषण का स्तर 110 रहा. इसके बाद हरियाणा के रोहतक और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नंबर है. भारत के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 12 शहर दिल्ली एनसीआर के हैं. गर्मियों में भारत के सबसे कम प्रदूषित शहरों की बात की जाए तो मिजोरम का एजवाल और तमिलनाडु का गुम्मीडिपुंडी सबसे कम प्रदूषित है. भारत के सबसे प्रदूषित शहर इस रिपोर्ट के लिहाज से देखें तो अब भारत का सबसे प्रदूषित शहर राजस्थान का भिवाड़ी है, जहां गर्मियों के दौरान प्रदूषण का औसत 134 रहा. इसके बाद हरियाणा के मानेसर की बारी आती है जो भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है. यहां गर्मियों के प्रदूषण का औसत 119 रहा. तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला का है, जहां प्रदूषण का स्तर 110 रहा. इसके बाद हरियाणा के रोहतक और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नंबर है. भारत के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 12 शहर दिल्ली एनसीआर के हैं. गर्मियों में भारत के सबसे कम प्रदूषित शहरों की बात की जाए तो मिजोरम का एजवाल और तमिलनाडु का गुम्मीडिपुंडी सबसे कम प्रदूषित है. प्रदूषण के यह आंकड़े 1 मार्च से 31 मई के बीच के हैं. इस दौरान के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का पीएम 2.5 डाटा को एकत्रित कर उसका विश्लेषण किया गया है. सीपीसीबी के 356 स्टेशन से यह डाटा लिया गया. यह स्टेशन भारत के 26 राज्यों के 174 शहरों में मौजूद है. प्रदूषण के मामले में पूरे उत्तर भारत का हाल सबसे खराब है और दिल्ली-एनसीआर गर्मियों के दौरान प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना है. गर्मियों के औसत प्रदूषण का स्तर हुआ बेहद खराब गर्मियों के मौसम में भी उत्तर भारत में पीएम 2.5 का स्तर 71 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. इसके बाद पूर्वी भारत का नंबर आता है जहां पीएम 2.5 का स्तर 69 ग्राम माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. पश्चिमी भारत में यह स्तर 54 रहा है. मध्य भारत में 46 जबकि उत्तर पूर्वी भारत में 35 और दक्षिण के राज्यों में यह स्तर 31 रहा है. भारत में दिल्ली-एनसीआर रीजन सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया. इस रीजन में राजस्थान के भिवाड़ी में सबसे ज्यादा प्रदूषण का स्तर रिकॉर्ड किया गया. यहां प्रदूषण का औसत गर्मियों के दौरान 134 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. मानेसर में यह स्तर 119, गाजियाबाद में 101, दिल्ली में 97, गुरुग्राम में 94 और नोएडा में पीएम 2.5 80 के करीब रहा है.

उत्तर भारत 2022 की गर्मियों में देश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा : सीएसई

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने अपने नये विश्लेषण में कहा है कि 2022 की गर्मियों में उत्तर भारत देश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा और उसमें दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र प्रमुख रहा। -Advertisement- पर्यावरण से जुड़े थिंक टैंक ने कहा कि गर्मियों में उत्तर भारत में प्रदूषकारी तत्व पीएम2.5 की मात्रा 71 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। सीएसई ने कहा कि पूर्वी भारत में यह 69 माइक्रोग्राम, पश्चिमी भारत में 54 माइक्रोग्राम और मध्य भारत में 46 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। उसने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में यह 35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और दक्षिण भारत में यह 31 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। उत्तर भारत में दिल्ली-एनसीआर सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा। इस दौरान भिवाड़ी में पीएम2.5 की मात्रा सबसे ज्यादा 134 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। मानेसर में पीएम2.5 की मात्रा 119 माइक्रोग्राम, गाजियाबाद में 101 माइक्रोग्राम, दिल्ली में 97 माइक्रोग्राम, गुरुग्राम में 94 माइक्रोग्राम और नोएडा में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर में गर्मियों में पीएम2.5 की मात्रा दक्षिण भारत के शहरों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा रही।

उत्तर भारत 2022 की गर्मियों में देश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा : सीएसई

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने अपने नये विश्लेषण में कहा है कि 2022 की गर्मियों में उत्तर भारत देश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा और उसमें दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र प्रमुख रहा। पर्यावरण से जुड़े थिंक टैंक ने कहा कि गर्मियों में उत्तर भारत में प्रदूषकारी तत्व पीएम2.5 की मात्रा 71 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। सीएसई ने कहा कि पूर्वी भारत में यह 69 माइक्रोग्राम, पश्चिमी भारत में 54 माइक्रोग्राम और मध्य भारत में 46 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। उसने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में यह 35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और दक्षिण भारत में यह 31 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। उत्तर भारत में दिल्ली-एनसीआर सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा। इस दौरान भिवाड़ी में पीएम2.5 की मात्रा सबसे ज्यादा 134 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। मानेसर में पीएम2.5 की मात्रा 119 माइक्रोग्राम, गाजियाबाद में 101 माइक्रोग्राम, दिल्ली में 97 माइक्रोग्राम, गुरुग्राम में 94 माइक्रोग्राम और नोएडा में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर में गर्मियों में पीएम2.5 की मात्रा दक्षिण भारत के शहरों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा रही। भाषा अर्पणा अविनाश

उत्तर भारत सबसे प्रदूषित, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र हॉटस्पॉट: अध्ययन

नए आंकड़ों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र हॉटस्पॉट होने के साथ उत्तर भारत सबसे अधिक प्रदूषित है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा किए गए एक राष्ट्रीय आकलन में कहा गया है कि उत्तरी राजधानी क्षेत्र में पार्टिकुलेट मैटर2.5 का औसत दक्षिणी भारत के शहरों के औसत का लगभग तीन गुना है। जबकि इस गर्मी में प्रदूषण पिछली गर्मियों में प्रदूषण से अधिक रहा है; प्रदूषण का उच्चतम दैनिक शिखर बिहार के शहरों में दर्ज किया गया है। यह भी ध्यान रखना दिलचस्प है कि यह मेगा शहर नहीं हैं जो सबसे अधिक प्रदूषित हैं बल्कि छोटे शहर प्रदूषण के हॉटस्पॉट बन गए हैं। राजस्थान का भिवंडी इस सूची में सबसे ऊपर है। गर्मी के प्रदूषण का उच्च स्तर वाहनों, उद्योग, बिजली संयंत्रों, अपशिष्ट जलने, और धूल के स्रोतों और हवा से उड़ने वाली धूल, गर्मी और शुष्क परिस्थितियों से बढ़ने वाले प्रदूषण के संयोजन का परिणाम है। स्टडी के लिए 1 मार्च से 31 मई तक के आंकड़ों पर विचार किया गया है. इस तथ्य के अलावा कि दिल्ली-एनसीआर सबसे अधिक प्रदूषित है, अन्य प्रमुख निष्कर्ष यह है कि पूर्वी भारत में दैनिक पीक प्रदूषण सबसे अधिक था, बिहार के शहरों में उच्चतम स्तर दर्ज किया गया था: पूर्वी भारत के लिए ग्रीष्मकालीन दैनिक पीक पीएम2.5 का स्तर 168 माइक्रोग्राम था। /m³, सभी क्षेत्रों में उच्चतम। उत्तर भारत 142 माइक्रोग्राम प्रति वर्ग मीटर के साथ दूसरा सबसे खराब ग्रीष्मकाल था। पश्चिम भारत (106 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), मध्य भारत (89 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), पूर्वी भारत (81 माइक्रोग्राम प्रति वर्ग मीटर) और दक्षिण भारत (65 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) में भी गर्मी का चरम 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक दर्ज किया गया। उत्तर भारत के भीतर, दिल्ली एनसीआर सबसे प्रदूषित उप-क्षेत्र पाया गया। बिहार के शहरों में गर्मियों में पीएम2.5 का औसत बहुत अधिक दर्ज किया गया, जिसमें बिहारशरीफ ने 285 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के उच्चतम ग्रीष्मकालीन शिखर की रिपोर्ट की। कटिहार (245 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) और पटना (200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) में भी अधिकतम स्तर 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक दर्ज किया गया। रोहतक ने उत्तर भारत में 258 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दैनिक शिखर के साथ उच्चतम शिखर प्रदूषण दर्ज किया। एक अन्य महत्वपूर्ण खोज यह है कि उत्तर भारत में पिछली गर्मियों की तुलना में मौसमी PM2.5 के स्तर में 23 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर भारत के भीतर, मौसमी PM2.5 स्तर में 25.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एनसीआर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला उप-क्षेत्र था। मध्य भारत में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि पश्चिम भारत (4.2 प्रतिशत) और पूर्वी भारत (1.8 प्रतिशत) ने पांच प्रतिशत से कम वृद्धि दर्ज की। दक्षिण भारत ने मौसमी औसत में कोई बदलाव नहीं दिखाया लेकिन मौसमी शिखर में 22 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। पूर्वोत्तर भारत ने मौसमी औसत (-12.8 प्रतिशत) और मौसमी शिखर (-18.3 प्रतिशत) दोनों में गिरावट दर्ज की। पूर्वी भारत एकमात्र ऐसा क्षेत्र था जिसने पिछली गर्मियों की तुलना में अपने मौसमी शिखर में वृद्धि दर्ज की। दक्षिण भारत में, आठ शहरों में वृद्धि की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। कोझीकोड में ग्रीष्म औसत में 76 प्रतिशत और शिखर में 17 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। गर्मियों के औसत में 55 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कोच्चि में सबसे अलग प्रवृत्ति है लेकिन इसकी चोटी में 145 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र में बढ़ती प्रवृत्ति वाले अन्य शहर मदिकेरी, बेंगलुरु, पुडुचेरी, अमरावती, चिक्काबल्लापुर और तिरुवनंतपुरम हैं। “यह विश्लेषण सभी क्षेत्रों में प्रदूषण के अनूठे पैटर्न की पहचान करता है और बड़ी संख्या में कस्बों और शहरों पर रोशनी डालता है जिन्हें नीतिगत ध्यान नहीं मिलता है। शुष्क परिस्थितियों, उच्च गर्मी की गर्मी और तापमान, और अधिक वायुजनित धूल कणों के कारण ग्रीष्मकालीन कण प्रदूषण स्पाइक्स, जो स्थानीय स्रोतों से समस्या को कम करते हुए लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, ”अनुमिता रॉयचौधरी, कार्यकारी निदेशक, अनुसंधान और वकालत, सीएसई ने कहा।

Pollution: लोगों का दम घोंट रहा प्रदूषण, छोटे शहर बने नए हॉटस्पॉट, गर्मियों में हालात हुए बद से बदतर

प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिससे होने वाली मौतों और इससे होने वाले नुकसान का पता लगाने का कोई वैज्ञानिक आधार फिलहाल मौजूद नहीं है. लेकिन ये एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो 24 घंटे हमें नुकसान पहुंचा रही है. CSE यानी Centre for Science and Environment ने गर्मियों में वायु प्रदूषण के स्तर का डाटा जारी किया है. इस डाटा के मुताबिक केवल दिल्ली जैसे बडे शहर ही नहीं, अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण नए रिकॉर्ड बना रहा है. हालांकि दिल्ली-NCR रीजन अब भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर है. दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तीन गुना ज्यादा है. इस वर्ष पिछली गर्मी के मुकाबले प्रदूषण ज्यादा रहा है.

2022 की गर्मियों में उत्तर भारत सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र: CSE

उत्तर भारत इस साल गर्मियों में देश में सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र के रूप में उभरा, जिसमें दिल्ली-एनसीआर हॉटस्पॉट रहा, एक नए विश्लेषण के अनुसार विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ग्रीन थिंक-टैंक ने कहा कि गर्मियों में उत्तर भारत में औसत PM2.5 एकाग्रता 71 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी। यह पूर्वी भारत में 69 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, पश्चिम भारत में 54 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और मध्य भारत में 46 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। पूर्वोत्तर भारत (35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) और दक्षिण भारत (31 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) अन्य क्षेत्रों की तुलना में स्वच्छ थे। उत्तर भारत में, दिल्ली-एनसीआर सबसे अधिक प्रदूषित उप-क्षेत्र पाया गया, जिसमें भिवाड़ी में 134 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की उच्चतम औसत पीएम2.5 सांद्रता दर्ज की गई। मानेसर ने 119 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, गाजियाबाद (101 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर), दिल्ली (97 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) की औसत पीएम2.5 एकाग्रता की सूचना दी। गुरुग्राम (94 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) और नोएडा (80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), यह कहा। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का PM2.5 ग्रीष्मकालीन औसत दक्षिणी भारत के शहरों के औसत का लगभग तीन गुना है। सीएसई ने विश्लेषण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल – वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से वास्तविक समय के डेटा का उपयोग किया। 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 174 शहरों में फैले कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) के तहत 356 आधिकारिक स्टेशनों से डेटा कैप्चर किया गया है।

Summer 2022 battered by heat waves, high particulate pollution, CSE assessment

2022 की गर्मी न केवल असामान्य रूप से गर्म है, बल्कि खराब वायु प्रदूषण भी है, खासकर उत्तरी भारत में। उच्च पीएम 2.5 का स्तर कई शहरों और क्षेत्रों में पाया जाता है क्योंकि प्रदूषण कुछ बड़े शहरों या किसी विशिष्ट क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है – यह एक राष्ट्रव्यापी समस्या बन गई है। यह शहर की प्रयोगशाला की वायु गुणवत्ता ट्रैकर पहल के हिस्से के रूप में गर्मियों की वायु गुणवत्ता के अवलोकन से पता चला था। विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) विश्लेषण के लिए 1 मार्च से 31 मई तक की गर्मियों की अवधि पर विचार किया गया था, क्योंकि कई क्षेत्रों में जून के लिए बारिश निर्धारित है। चूंकि वायु गुणवत्ता निगरानी के विस्तार के साथ कई क्षेत्रों में रीयल-टाइम वायु गुणवत्ता डेटा की उपलब्धता में सुधार हुआ है, इसलिए क्षेत्रीय अंतरों का मूल्यांकन करना और क्षेत्रीय प्रतीकों को समझना संभव हो गया है। “यह विश्लेषण सभी क्षेत्रों में प्रदूषण के विशिष्ट पैटर्न की पहचान करता है और कई अनदेखी शहरों और कस्बों पर प्रकाश डालता है। गर्मियों में प्रदूषण शुष्क मौसम, गर्म और आर्द्र गर्मी, और लंबे समय तक यात्रा करने वाली हवा में बहुत अधिक धूल के कारण प्रयास करता है। स्थानीय क्षेत्रों से समस्याएं पैदा कर रहा है, “अनुमिता रॉयचौधरी, निदेशक, अनुसंधान और परामर्श, सीएसई ने कहा। “इस वायु गुणवत्ता ट्रैकर की अवधारणा ने प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धियों के बीच तुलना के लिए ग्रीष्मकालीन वायु गुणवत्ता को मापने और नीति के बारे में रिपोर्ट किए जाने वाले क्षेत्रीय मतभेदों को समझने में मदद की है। कई क्षेत्रों ने प्रदूषण के उच्च स्तर का अनुभव किया है जबकि वायु तरंगें लैब के वरिष्ठ निदेशक अविकल सोमवंशी ने कहा, “विस्तार और तेज भी किया है।” यह डेटा विश्लेषण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल, वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से वास्तविक समय (15 मिनट औसत) में उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। 26 राज्यों और क्षेत्रों के 174 शहरों में फैले वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (CAAQMS) के तहत 356 कार्यालयों द्वारा डेटा कैप्चर किया गया है। निष्कर्षों के अनुसार, उत्तर भारत सबसे अधिक प्रदूषित है, दिल्ली-एनसीआर गर्मियों में सबसे अधिक प्रदूषित है। उत्तर भारत के लिए गर्मियों का औसत PM2.5 71 ug/m³ है, जो सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक है। पूर्वी भारत 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर गर्मी के औसत के साथ दूसरा सबसे खराब है। पश्चिमी भारत (54 µg/m³) और मध्य भारत (46 µg/m³) में भी 40 µg/m³ की ग्रीष्मकालीन प्रविष्टियां दर्ज की गईं। पूर्वोत्तर भारत (35 µg/m³) और दक्षिण भारत (31 µg/m³) अन्य क्षेत्रों की तुलना में स्वच्छ हैं। पूर्वी भारत में दैनिक प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक है, बिहार के शहरों में उच्चतम स्तर दर्ज किया गया है। यह देखा गया है कि इस गर्मी में औसत प्रदूषण पिछली गर्मियों की तुलना में अधिक है। शहर के औसत दैनिक PM2.5 दो गर्मियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर भारत ने पिछली गर्मियों की तुलना में PM2.5 के स्तर में अविश्वसनीय 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। इस गर्मी में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में छोटे शहर और बड़े शहर सबसे ऊपर हैं। आगे का रास्ता: रॉयचौधरी कहते हैं: “कुल मिलाकर, स्थानीय और क्षेत्रीय प्रदूषकों के प्रभाव और नीति निर्माण को सूचित करने के लिए आवश्यक मौसम और जलवायु के प्रभाव के कारण मौसमी प्रदूषण में महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद है। जलवायु और गर्मी और रेगिस्तान के विकास के कारण , गर्मी के मौसम में अक्सर उच्च धूल प्रभाव देखा जाता है। लेकिन धूल भी ऊर्जा स्रोतों जैसे ऑटोमोबाइल, उद्योग, बिजली संयंत्र और जलने वाले कचरे से एक रासायनिक उत्पाद है। जब समस्या का क्षेत्र यह सभी क्षेत्रों में देखा जाना चाहिए, यह प्रदूषण के सभी स्रोतों से उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए सख्ती से सीमित होना चाहिए, मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए महान प्रयासों के साथ, मिट्टी स्थिरीकरण विकसित करना, और वनीकरण द्वारा हरी-दीवार करना, और कमी। शहरों में लू चल रही है। ”

भारत के छोटे शहर बन रहे हैं प्रदूषण के नए हॉटस्पॉट, यहां देखें आंकड़े

भारत के 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 12 एनसीआर रीजन के शहर हैं. मिजोरम का एजवाल भारत का सबसे कम प्रदूषण वाला शहर है. CSE की नई स्टडी के बारे में जानिए.. प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जिससे होने वाली मौतों और इससे होने वाले नुकसान का पता लगाने का कोई वैज्ञानिक आधार फिलहाल मौजूद नहीं है, लेकिन ये एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो 24 घंटे हमें नुकसान पहुंचा रही है. CSE यानी Centre for science and environment ने गर्मियों में वायु प्रदूषण के स्तर का डाटा जारी किया है. इस डाटा के मुताबिक केवल दिल्ली जैसे बडे शहर ही नहीं, अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण नए रिकॉर्ड बना रहा है. हाालांकि दिल्ली NCR रीजन अब भी प्रदूषण के मामले में टॉप पर है. दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तीन गुना ज्यादा है. इस वर्ष पिछली गर्मी के मुकाबले प्रदूषण ज्यादा रहा है. भारत के सबसे प्रदूषित शहर इस रिपोर्ट के लिहाज से देखें तो अब भारत का सबसे प्रदूषित शहर राजस्थान का भिवाड़ी है जहां गर्मियों के दौरान प्रदूषण का औसत 134 रहा इसके बाद हरियाणा के मानेसर की बारी आती है, जो भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है. यहां गर्मियों के प्रदूषण का औसत 119 रहा. तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला का है जहां प्रदूषण का स्तर 110 रहा इसके बाद हरियाणा के रोहतक और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नंबर आता है. भारत के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 12 शहर दिल्ली एनसीआर के हैं, गर्मियों में भारत के सबसे कम प्रदूषित शहरों की बात की जाए तो मिजोरम का एजवाल और तमिलनाडु का गुम्मीडिपुंडी सबसे कम प्रदूषित है. हालांकि उत्तर भारत के कुछ शहर ऐसे भी हैं जहां पिछली गर्मियों के मुकाबले इस बार प्रदूषण में कमी दर्ज हुई है. वाराणसी में हुई रिकॉर्ड गिरावट पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश का वाराणसी है जहां प्रदूषण के स्तर में 59% की कमी आई. इसके अलावा बल्लभगढ़ जालंधर पाली आगरा और श्रीनगर में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है. प्रदूषण के यह आंकड़े 1 मार्च से 31 मई के बीच के हैं. इस दौरान के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का पीएम 2.5 डाटा को एकत्रित कर उसका विश्लेषण किया गया है. सीपीसीबी के 356 स्टेशन से यह डाटा लिया गया. यह स्टेशन भारत के 26 राज्यों के 174 शहरों में मौजूद हैं. प्रदूषण के मामले में पूरे उत्तर भारत का हाल सबसे खराब है और दिल्ली एनसीआर गर्मियों के दौरान प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना है. गर्मियों के औसत प्रदूषण का स्तर हुआ बेहद खराब गर्मियों के मौसम में भी उत्तर भारत में पीएम 2.5 का स्तर 71 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. इसके बाद पूर्वी भारत का नंबर आता है जहां पीएम 2.5 का स्तर 69 ग्राम माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. पश्चिमी भारत में यह स्तर 54 रहा है. मध्य भारत में 46 जबकि उत्तर पूर्वी भारत में 35 और दक्षिण के राज्यों में यह स्तर 31 रहा है. by Taboola Sponsored Links You May Like 1 करोड़ का टर्म जीवन बीमा मात्र ₹490/माह*. टालो नहीं, ले डालोटर्म जीवन बीमा योजना आपका जन्म 1970-1990 के बीच हुआ है? ₹1 करोड़ के टर्म प्लान का प्रीमियम चेक करें**Max Life Insurance Calculator भारत में दिल्ली एनसीआर रीजन सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया, इस रीजन में राजस्थान के भिवाड़ी में सबसे ज्यादा प्रदूषण का स्तर रिकॉर्ड किया गया. यहां प्रदूषण का औसत गर्मियों के दौरान 134 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा है. मानेसर में यह स्तर 119 गाजियाबाद में 101 दिल्ली में 97 गुरुग्राम में 94 और नोएडा में पीएम 2.5 80 के करीब रहा है, दक्षिण के राज्यों के मुकाबले एनसीआर रीजन का यह स्तर 3 गुना ज्यादा है. हालांकि यह गर्मियों का औसत प्रदूषण निकाला गया है, अगर बात इस बारे में करें कि 1 दिन में किस शहर में या किस इलाके में प्रदूषण पीक पर पहुंचता है तो उसमें बाजी बिहार ने मारी है. बिहार में गर्मियों में प्रदूषण का पीक याचरम 168 रहा है, उत्तर भारत में प्रदूषण का चरम स्तर 142 था. पश्चिमी भारत में 106 मध्य भारत में 89 उत्तर पूर्व में 81 और दक्षिण भारत में यह स्तर 65 रहा है. बिहार में प्रदूषण बना चिंता का विषय बिहार जहां पर प्रदूषण अपने चरम स्तर पर लगभग रोजाना पहुंचता रहा, वहां बिहार शरीफ में प्रदूषण का स्तर 285 तक चला गया. कटिहार में 245 और पटना में यह स्तर 200 तक पहुंचा. उत्तर भारत में रोहतक में भी प्रदूषण का पिक काफी खराब रहा और यह 258 तक पहुंचा इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि अब छोटे शहरों में भी प्रदूषण के हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं. पिछले वर्ष की गर्मियों के मुकाबले इस वर्ष गर्मियों में हर रीजन में प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है. उत्तर भारत में पिछले वर्ष के मुकाबले सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई जो 23% की और उत्तर भारत में एनसीआर रीजन में ही सबसे ज्यादा प्रदूषण बड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले दिल्ली एनसीआर रीजन के लोगों ने 25.8% ज्यादा प्रदूषण झेला. मध्य भारत में 15% की बढ़ोतरी दर्ज हुई, पश्चिमी भारत में 4%, पूर्वी भारत में 1.8%, दक्षिण के राज्यों में प्रदूषण नहीं बढ़ा. नॉर्थ ईस्ट के रीजन में पिछले वर्ष के मुकाबले प्रदूषण के स्तर में कमी दर्ज हुई. सीएससी की रिसर्चर अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक गर्मियों में प्रदूषण के बढ़ने की वजह गाड़ियां इंडस्ट्री पावर प्लांट वेस्ट बर्नींग और धूल का ज्यादा उड़ना है और इन समस्याओं से निजात पाने के लिए बड़े स्तर पर जमीन पर काम करना होगा. जंगलों को कटने से बचाना होगा शहरों में तापमान कम करने के तरीकों पर काम करना होगा और फसलों में और जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाना होगा.

North India Pollution Alert: दिल्ली के साथ हरियाणा और यूपी के कई शहर भी बने वायु प्रदूषण के हॉट स्पॉट

सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के एक अध्ययन में सामने आया है कि पूरे उत्तर भारत के शहरों में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ा है। अध्ययन में यह भी पता चला है कि दिल्ली एनसीआर में भिवाड़ी मानेसर गाजियाबाद दिल्ली और नोएडा प्रदूषण के हॉट स्पॉट बन रहे हैं। इस साल मार्च, अप्रैल और मई माह में गर्मी ही रिकार्डतोड़ नहीं पड़ी, बल्कि वायु प्रदूषण भी उच्च स्तर पर रहा। समूचे उत्तर भारत में पीएम 2.5 का स्तर अधिक रहा। एनसीआर में भिवाड़ी, मानेसर, गाजियाबाद, दिल्ली और नोएडा हाट स्पाट बन रहे हैं। यह निष्कर्ष सामने आया है सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के एक विश्लेषण में। यह विश्लेषण एक मार्च से 31 मई की समयावधि में किया गया। इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आनलाइन पोर्टल के जरिये 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 174 शहरों में कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मानिटरिंग सिस्टम के तहत 356 स्टेशनों से आंकड़े लिए गए। अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष उत्तर भारत सबसे अधिक प्रदूषित है, दिल्ली-एनसीआर गर्मियों में प्रदूषण का हाटस्पाट है। उत्तर भारत में पीएम 2.5 का ग्रीष्मकालीन औसत स्तर 71 माइक्रोग्राम प्रति वर्ग मीटर है, जो सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक है। पूर्वी भारत 69 माइक्रोग्राम प्रति वर्ग मीटर के साथ गर्मियों के औसत के साथ दूसरा सबसे खराब क्षेत्र था। पश्चिम भारत में (54 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) और मध्य भारत में (46 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) ने भी 40 माइक्रोग्राम प्रति वर्ग मीटर सामान्य स्तर से अधिक का ग्रीष्मकालीन स्तर दर्ज किया। अन्य क्षेत्रों की तुलना में पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत स्वच्छ रहे, जहां पीएम 2.5 का यह स्तर क्रमश 35 और 31 माइक्रोग्राम प्रति वर्ग मीटर दर्ज किया गया। उत्तर भारत में दिल्ली एनसीआर सबसे प्रदूषित उप-क्षेत्र पाया गया। दिल्ली-एनसीआर के शहरों में गर्मियों में पीएम 2.5 का औसत बहुत अधिक दर्ज किया गया, जिसमें भिवाड़ी में सर्वाधिक 134 माइक्रोग्राम प्रति वर्ग मीटर रहा। मानेसर (119 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), गाजियाबाद (101 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), दिल्ली (97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), गुरुग्राम (94 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) और नोएडा (80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) भी कम प्रदूषित न थे। एनसीआर क्षेत्र में पीएम 2.5 का औसत स्तर दक्षिणी भारत के शहरों के औसत का लगभग तीन गुना है। उत्तर भारत ने पिछली गर्मियों की तुलना में मौसमी पीएम 2.5 स्तर में 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। उत्तर भारत में मौसमी पीएम 2.5 स्तर में 25.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एनसीआर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला उप-क्षेत्र था। दिल्ली-एनसीआर के 12 शहर इस गर्मी में सबसे अधिक प्रदूषण स्तर वाले शीर्ष 20 शहरों में शामिल हैं। गर्मी के बढ़ते प्रदूषण के रुझान वाले उत्तरी शहर इस क्षेत्र के 19 शहरों में बढ़ती प्रवृत्ति दिखाई देती है, यानी गर्मियों के औसत और पीक दोनों में उनकी पिछली गर्मियों की तुलना में वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ में गर्मियों के औसत में 210 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि और 265 प्रतिशत की औसत वृद्धि देखी गई। हरियाणा के कैथल में गर्मियों के औसत में 123 प्रतिशत की वृद्धि और पीक में 96 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पंजाब और हरियाण समेत कई राज्यों के शहर शामिल वहीं, वायु प्रद्रूषण में वृद्धि दिखाने वाले अन्य शहरों में मुजफ्फरनगर, पंचकुला, कुरुक्षेत्र, रोहतक, अंबाला, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, उदयपुर, यमुना नगर, बहादुरगढ़, हिसार, गुरुग्राम, कोटा, लुधियाना, लखनऊ, खन्ना और मेरठ शामिल हैं। गर्मियों के दौरान औसत और चरम स्तरों में मिश्रित प्रवृत्ति वाले उत्तरी शहर इस क्षेत्र के 23 शहरों में मिश्रित प्रवृत्ति दिखाई देती है, यानी उनकी गर्मी का औसत बढ़ गया है, लेकिन उनकी पिछली गर्मियों की तुलना में चरम प्रदूषण में गिरावट आई है। पिछली गर्मियों की तुलना में केवल भटिंडा अपने ग्रीष्मकालीन औसत (11 प्रतिशत) में गिरावट और चरम प्रदूषण में एक प्रतिशत की वृद्धि दिखा रहा है। हरियाणा का नारनौल और चरखी दादरी भी चर्चा में नारनौल में सबसे अलग प्रवृत्ति है क्योंकि इसकी चोटी के औसत में 52 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन इसका ग्रीष्मकालीन औसत 12 प्रतिशत अधिक है। हरियाणा में चरखी दादरी ने अपने ग्रीष्मकालीन औसत में 85 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की और 27 प्रतिशत कम पीक प्रदूषण दर्ज किया। इसके बाद चंडीगढ़, कनौर, धारूहेड़ा, जयपुर, पटियाला, अजमेर, दिल्ली, करनाल, फरीदाबाद, नोएडा, नारनौल, जींद, भिवाड़ी का स्थान रहा। पलवल, बुलंदशहर, अमृतसर, जोदपुर, ग्रेटर नोएडा, सिरसा, अलवर, गाजियाबाद और भटिंडा। गर्मी के प्रदूषण में गिरावट की प्रवृत्ति दर्ज करने वाले शहर सात शहरों में गिरावट की प्रवृत्ति दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में उनके ग्रीष्मकालीन औसत में 59 प्रतिशत की गिरावट और 64 प्रतिशत कम चोटी के साथ सबसे अधिक गिरावट देखी गई। गिरावट की प्रवृत्ति वाले अन्य शहरों में बल्लभगढ़, जालंधर, पाली, आगरा, मंडीखेड़ा और श्रीनगर शामिल हैं। अनुमिता रायचौधरी (कार्यकारी निदेशक, सीएसई) का कहना है कि यह विश्लेषण सभी क्षेत्रों में प्रदूषण के अनूठे पैटर्न की पहचान करता है। साथ ही बड़ी संख्या में कस्बों और शहरों पर रोशनी डालता है जिन पर नीतिगत ध्यान नहीं दिया जाता। शुष्क परिस्थितियों, उच्च गर्मी और तापमान, अधिक वायुजनित धूल कणों के कारण ग्रीष्मकाल के दौरान प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है।

उत्तर भारत 2022 की गर्मियों में देश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा : सीएसई

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने अपने नये विश्लेषण में कहा है कि 2022 की गर्मियों में उत्तर भारत देश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा और उसमें दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र प्रमुख रहा। पर्यावरण से जुड़े थिंक टैंक ने कहा कि गर्मियों में उत्तर भारत में प्रदूषकारी तत्व पीएम2.5 की मात्रा 71 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। सीएसई ने कहा कि पूर्वी भारत में यह 69 माइक्रोग्राम, पश्चिमी भारत में 54 माइक्रोग्राम और मध्य भारत में 46 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। उसने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में यह 35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और दक्षिण भारत में यह 31 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। उत्तर भारत में दिल्ली-एनसीआर सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा। इस दौरान भिवाड़ी में पीएम2.5 की मात्रा सबसे ज्यादा 134 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। मानेसर में पीएम2.5 की मात्रा 119 माइक्रोग्राम, गाजियाबाद में 101 माइक्रोग्राम, दिल्ली में 97 माइक्रोग्राम, गुरुग्राम में 94 माइक्रोग्राम और नोएडा में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर में गर्मियों में पीएम2.5 की मात्रा दक्षिण भारत के शहरों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा रही। भाषा अर्पणा अविनाश