हेल्थ ब्रीफ:बिना पिल्स और कंडोम के रोकें अनचाही प्रेग्नेंसी, आस्ट्रेलिया में जन्मी ऐसी बच्ची जो रोते हुए भी मुस्कुराती है
आप अपनी और अपने परिवार की सेहत का ध्यान बेहतर ढंग से रख सकें, इसके लिए हम ‘वीकली हेल्थ ब्रीफ’ लाए हैं। इसमें आपको मिलेंगे प्रमुख हेल्थ अपडेट्स, महत्वपूर्ण रिसर्च से जुड़े आंकड़े और डॉक्टरों की रेलेवेंट सलाह। इसे मात्र 2 मिनट में पढ़कर आपको सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारियां मिलेंगी और आप परिवार का बेहतर ख्याल रख पाएंगी। 1. बच सकती थी सिंगर केके की जान, आप भी सीख लें जान बचाने वाली तकनीक बॉलीवुड के मशहूर सिंगर केके की कोलकाता में एक शो के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि अटैक के दौरान केके के हार्ट में ब्लॉकेज हो गया था। अगर समय रहते उन्हें सीपीआर दिया जाता तो उनकी जान बच सकती थी। सीपीआर देने के लिए बीमार को सीधे लिटाकर उसकी छाती पर दबाव दिया जाता है और मुंह से सांसें दी जाती हैं। हार्ट अटैक जैसे मामलों में सीपीआर जान बचाने में सफल रहता है। 2. बिना पिल्स और कंडोम के रिदम मेथड से ऐसे रोकें अनचाही प्रेग्नेंसी रिदम मेथड की मदद से आप बिना पिल्स और कंडोम के अनचाही प्रेग्नेंसी को रोक सकती हैं। यह पूरी तरह से नेचुरल है। इसमें बस आपको अपने मेन्सट्रूअल साइकिल का ध्यान रखना पड़ता है। डॉक्टर्स के मुताबिक पीरियड्स से 14 दिन पहले महिलाओं के एग फर्टाइल होने की स्थिति में होते हैं। उस दौरान सेक्स करने से प्रेग्नेंसी की संभावना सबसे अधिक होती है। अगर आप अपने मेन्सट्रूअल साइकिल के 14 दिन पहले वाले 3-4 दिन के पीरियड में सेक्स न करें तो अनचाही प्रेग्नेंसी का खतरा काफी कम हो जाता है। 3. परमानेंट स्माइल के साथ जन्मी बच्ची, रोते हुए भी मुस्कुराती है ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसी बच्ची का जन्म हुआ जिसके चेहरे पर परमानेंट मुस्कान है। बच्ची सोते हुए भी मुस्कुराती दिखती है। हालांकि डॉक्टर इसे एक डिसऑर्डर बता रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा बाइलेटरल मैक्रोस्टोमिया सिंड्रोम के कारण हुआ है। यह एक रेयर सिंड्रोम है, जिससे पीड़ित बच्चे के गाल के दोनों तरफ एक लकीर-सी खींच जाती है। जिसके चलते वो हमेशा मुस्कुराते दिखाई देते हैं। 4. अधिक उम्र में शादी करने पर डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हो सकते हैं बच्चे डाइन सिंड्रोम एक जन्मजात बीमारी है। इससे पीड़ित बच्चों का मानसिक विकास उनकी उम्र के साथ नहीं हो पाता है। डॉक्टर्स का मानना है कि बच्चों में डाउन सिंड्रोम का सीधा संबंध मां की उम्र से है। मां की उम्र जितनी ज्यादा होगी, बच्चे के डाउन सिंड्रोम से पीड़ित होने का खतरा उतना ज्यादा होगा। नेशनल डाउन सिंड्रोम सोसाइटी के अनुसार 45 साल से अधिक उम्र में मां बनने पर बच्चे में डाउन सिंड्रोम का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस उम्र में हर 30 में से एक बच्चा डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होता है। 5, महिलाएं सुबह और पुरुष शाम को एक्सरसाइज करें तो होगा ज्यादा फायदा‘ फ्रंटियर्स इन फिजियोलॉजी’ की एक नई रिसर्च के मुताबिक महिलाओं के लिए सुबह और पुरुषों के लिए शाम को एक्सरसाइज करना ज्यादा फायदेमंद है। 56 महिलाओं और पुरुषों पर की गई इस रिसर्च में यह बात निकल कर सामने आई कि जो महिलाएं सुबह व्यायाम करती हैं, उनका स्वास्थ्य ज्यादा ठीक रहता है। वहीं शाम को व्यायाम करने वाले पुरुष ज्यादा फिट पाए गए। 6. कोविड और मंकीपॉक्स के बीच MP में चिकपॉक्स फैला, लाल दाने आएं तो डॉक्टर को दिखाएं कोविड और मंकीपॉक्स के खतरे के बीच चिकनपॉक्स भी मध्यप्रदेश में अपने पांव पसार रहा है। पिछले महीने भर में राज्य के 7 जिलों में 31 मरीज मिल चुके हैं। अकेले छिंदवाड़ा में ही 13 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इस संक्रामक बीमारी में छाती, पीठ व चेहरे पर लाल दाने दिखाई देने लगते हैं। चिकनपॉक्स मुख्य रूप से बच्चों, किशोर, वयस्क, गर्भवती महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है। 7. ओवरवेट महिलाओं और स्लिम पुरुषों की हड्डी टूटने का खतरा ज्यादा ओवर वेट महिलाओं को बोन फ्रैक्टर का ज्यादा खतरा होता है। एक जैसी चोट लगने पर पतली या नॉर्मल वेट वाली महिला के मुकाबले ओवर वेट महिला की हड्डी टूटने की संभावना अधिक होती है। दूसरी ओर पुरुषों में बिलकुल इसका उल्टा होता है। यहां मोटे लोगों की हड्डी ज्यादा मजबूत होती है। कनाडा के CHUL रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। 8. प्रेग्नेंसी में खतरनाक हो सकता है ट्रैफिक पॉल्यूशन, मां और बच्चे दोनों को खतरा यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक नई रिसर्च में ट्रैफिक रिलेटेड पॉल्यूशन को प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली कई समस्याओं के लिए जिम्मेदार बताया गया है। रिसर्च में बताया गया है कि गाड़ियों से निकलने वाले पॉल्यूशन पार्टिकल्स के संपर्क में आने से गर्भ-नाल की कोशिका में बदलाव होता है। जिससे मां और होने वाले बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 9. जन्म देने के वॉटर बर्थ और लोटस बर्थ जैसे तरीके हो सकते हैं खतरनाक पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में नॉन ट्रेडिशनल डिलीवरी का चलन बढ़ा है। महिलाएं वाटर बर्थ (पानी में बच्चे को जन्म देना) और लोटस बर्थ (गर्भनाल के खुद से अलग होने का इंतजार करना) जैसे ऑल्टरनेट ऑप्शन को अपनाने लगी हैं। इन महिलाओं का ऐसा मानना है कि बच्चे को जन्म देने के ये नेचुरल तरीके ज्यादा फायदेमंद हैं। लेकिन कुछ रिसर्च के बाद डॉक्टर्स का कहना है कि नॉन ट्रेडिशनल डिलीवरी खतरनाक हो सकती है। इसमें इन्फेक्शन का खतरा काफी ज्यादा होता है। 10. भारत में 71% लोगों को नहीं मिलता ठीक से खाना, हर साल 17 लाख मरते हैं सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की ‘स्टेट ऑफ द इंडियाज एनवायरनमेंट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 71 फीसदी लोगों को संतुलित आहार नहीं मिल पाता है। यानी देश के हर चार में से तीन लोग सही खाना नहीं खा पाते। जिसके चलते उन्हें कई तरह की बीमारियों होती हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सही आहार न ले पाने के कारण देश में हर साल 17 लाख लोगों की असमय मृत्यु होती है।
