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Center for Science and Environment

The average intensity of the smog in Delhi so far is 329 micrograms per cubic meter per day. New Delhi: The first severe smog episode has hit Delhi and the National Capital Region (NCR) and is expected to last for two more days, the green think tank Center for Science and Environment (CSE) said today. Though seasonal smog in Delhi is intense, the average daily contribution of smoke from farm fires from mid-October to November 8 was the lowest in the past four years, it said. “Predictably, the first episode of the season was caused by the combined effect of adverse weather conditions (cool and calm winds and inversion), stubble burning and fireworks,” said Anumita Roychowdhury, executive director, research and advocacy, CSE. Compared to the first smog episode of the past four years, the current smog has the same duration as the first smog of the 2018 and 2020 season – both lasted for six days. If conditions don’t improve, it could catch up with the smog of 2019, which lasted eight days, the CSE said. The average intensity of the smog this year so far is 329 micrograms per cubic meter per day, which is lower than that of the 2020 smog (by 7 percent) and 2019 smog (by 3 percent). It is more intense than the smog of 2018 (about 9 percent). The persistence of this year’s smog despite relatively windy local conditions may be due to the city’s lack of pollution abatement measures, the green think tank said. “While very high concentrations of PM2.5 have attracted attention, levels of gases – ozone, CO or NO2 – have remained high during this smog episode. Also, the ratio of SO2 to NO2 increased on Diwali night, indicating an increased pollution load from fireworks. The PM2.5 concentration on Diwali night (8pm to 8am) is the most intense since 2017,” said Avikal Somvanshi, program manager, Urban Lab, CSE. This analysis is based on the real-time data available from the current air quality monitoring stations in Delhi-NCR and the greater Indo-Gangetic Plain. On average, the contribution of smoke to Delhi’s daily PM2.5 was the lowest in the past four years between mid-October and November 8. So far, it has recorded an average of 12 percent per day as opposed to 17 per cent per day in 2020, 14 percent per day in 2019 and 16 percent per day in 2018 (as reported by SAFAR), the CSE said. Converting it to absolute concentrations, the contribution of smoke per day this year was 26 micrograms per cubic meter, compared to 35 micrograms per cubic meter in 2020, 40 micrograms per cubic meter in 2019 and 31 micrograms per cubic meter in 2018 , it said. However, the peak contribution of smoke to Delhi’s PM level was recorded on Nov. 7 when it reached 48 percent. This is the second highest percentage of daily contributions since such an estimate was initiated by SAFAR in 2018. The highest one-day contribution rate was 58 percent on November 5, 2018.

दिल्ली में मौसम की पहली घनी घुंध, सीएसई ने दी ये चेतावनी

सीएसई में अनुसंधान की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा, ‘‘मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के संयुक्त असर, पराली और पटाखे जलाने से मौसम की धुंध छा गयी है.’’ नई दिल्ली: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम की पहली घनी धुंध छा गयी है और इसके दो और दिनों तक रहने की आशंका है. विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने बुधवार को यह जानकारी दी. सीएसई में अनुसंधान की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा, ‘‘जाहिर तौर पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों (ठंडी और शांत हवाओं) के संयुक्त असर, पराली और पटाखे जलाने से मौसम की धुंध छा गयी है.’’ पिछले चार वर्षों की सबसे लंबी धुंध की आशंका है सीएसई ने बताया कि पिछले चार वर्षों की धुंध की पहली घटना की तुलना करने पर मौजूदा धुंध 2018 और 2020 की पहली धुंध की अवधि से मिलती है जो छह दिनों तक रही थी. अगर परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है तो यह 2019 की धुंध से भी अधिक समय तक रह सकती है जो आठ दिनों तक रही थी. पराली के धुएं का हिस्सा कम हुआ हालांकि, दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. ये भी पढ़ें- Winter in Delhi: कब पड़ेगी दिल्ली-यूपी में कड़ाके की ठंड, जानिए तापमान और प्रदूषण का हाल सीएसई ने कहा, ‘‘दिल्ली के औसतन दैनिक पीएम2.5 में अक्टूबर से आठ नवंबर के दौरान धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. अभी तक यह प्रतिदिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि पिछले साल 17 फीसदी, 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 प्रतिशत था.’’ दिल्ली में ठंड और बढ़ेगी दिल्ली में बुधवार को इस सर्दी के सीजन का न्यूनतम तापमान सबसे कम रहा. मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री सेल्सियस था. गुरुवार की बात करें तो अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. यानी गुरुवार को ठंड बढ़ेगी. वहीं मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिल्ली में नवंबर के अंत में शीतलहर के शुरू हो सकती है. फिलहाल प्रदूषण से राहत नहीं बुधवार को तेज हवाएं चलने से प्रदूषण के स्तर में थोड़ी कमी आई थी लेकिन गुरुवार को एक बार फिर से वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी हो गई है और एक्यूआई 402 पर पहुंच गया है जो गंभीर माना जाता है. अगले दो दिनों में वायु गुणवत्ता और बिगड़ेगी और 13 नवंबर को इसमें सुधार आएगा.

Delhi Smog News: जानिये- क्यों इस बार दिल्ली-एनसीआर के लोगों को ज्यादा परेशान करेगा स्माग

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली में वायु प्रदूषण के बहुत खराब और गंभ्रीर स्तर के बीच स्माग एपिसोड भी लंबा खिंचने के आसार बन रहे हैं। सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार सुधार के अभी कोई आसार नहीं लग रहे। रिपोर्ट में मौजूदा हालातों के मददेनजर आपातकालीन उपाय अपनाने पर भी बल दिया गया है। बुधवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी दिल्ली में मंगलवार को छाया स्माग दिल्ली में लगातार उच्च वायु प्रदूषण स्तर को दर्शाता है। सर्दियां शुरू होते ही राजधानी दिल्ली में स्माग छा गया, जो दर्शाता है कि इस वर्ष ज्यादा परेशान करने वाले स्माग का सामना करना पड़ सकता है। Ads by Jagran.TV Kisan Andolan: राकेश टिकैत केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को खत्म किए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। Kisan Andolan: जानिए किसान नेता राकेश टिकैत ने अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से क्या पूछा? यह भी पढ़ें दिल्ली में नहीं उठाए गए उचित कदम रिपोर्ट में कहा गया है कि चार नवंबर को दीवाली के दिन प्रदूषण उच्च स्तर तक पहुंचा। तब से ही यानी एक सप्ताह से स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। प्रदूषण का उच्च स्तर खतरनाक स्माग छाने की संभावना की ओर इंगित कर रहा है।सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मंगलवार के स्माग की तुलना वर्ष 2018 व 2020 के पहले स्माग से की जा सकती है। वर्ष 2018 व 2020 में स्माग छह दिनों तक छाया रहा। लेकिन वर्ष 2019 में स्माग की स्थिति ज्यादा खतरनाक रही जब आठ दिनों तक स्माग छाया था। मंगलवार को राजधानी में छाया स्माग वर्ष 2019 के स्माग से ज्यादा खतरनाक स्तर पर पाया गया है। हालांकि राजधानी दिल्ली में हवा चल रही है, फिर भी स्माग गहराया हुआ है। यह दर्शाता है कि राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण करने के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। यह आभासी दुनिया जैसा एक वातावरण है, जिसे इंटरनेट द्वारा एक्सेस किया जा सकता है। यूजर मेटावर्स की आभासी दुनिया में वास्तविक दुनिया को एहसास कर पाएंगे... यह भी पढ़ें सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार 2018 से 2021 तक हर वर्ष दीवाली में पीएम 2.5 का स्तर बढ जाता है। दीवाली के बाद भी वायु प्रदूषण स्तर लगातार खराब बने रहने से स्माग की स्थिति पैदा होती है। राजधानी में अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो लोगों को परेशान करने वाले स्माग का सामना अधिक दिनों तक करना पड़ सकता है। हालांकि पराली के धुएं का असर इस वर्ष अक्टूबर से आठ नवंबर तक पिछले चार सालों में सबसे कम है। लेकिन राजधानी में ओजोन खतरनाक स्तर तक पहुंचा हुआ है। सीएसई ने अपने रिपोर्ट में कहा कि दीवाली के दिन प्रदूषण पिछले पांच वर्ष की तुलना में सर्वाधिक था। दीवाली के दिन ओखला में वायु प्रदूषण स्तर 1984 जबकि अशोक विहार में 1957 तक पहुंच गया था। यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है। Video Player is loading. VDO.AI बदमाशों ने दो लोगों के साथ झपटमारी की वारदात। दिल्ली में पैदल चलने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत, पढ़िए पूरी खबर यह भी पढ़ें रिपोर्ट की कुछ अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्ष स्माग ने पूरे भारत-गंगा के मैदानी क्षेत्रों को अपनी चपेट लिया है, चल रहे स्माग की अवधि सात दिनों से अधिक होने की उम्मीद है। सर्द मौसम, पराली के धुएं और दीवाली के पटाखों ने पहले स्माग के पहले एपिसोड को ट्रिगर किया है, हालांकि पराली के धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। यह विश्लेषण इस मिथक को दूर करता है कि सर्दी का प्रदूषण केवल पार्टिकुलेट मैटर बढ़ने की समस्या है। यह ओजोन, कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन डाइआक्साइड और सल्फर डाइआक्साइड सहित जहरीली गैसों का एक हानिकारक कॉकटेल भी है। 2017 के बाद से दिवाली की रात (रात आठ से सुबह आठ बजे) पर पीएम 2.5 की सघनता सबसे अधिक रही है, जबकि सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड का अनुपात अधिक रहा है, जो पटाखों के प्रभाव को दर्शाता है। मौजूदा गंभीर स्माग प्रकरण के लिए सभी क्षेत्रों में तत्काल आपातकालीन उपायों की आवश्यकता है ताकि प्रदूषण को और अधिक बढ़ने और स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके। एक लंबी अवधि की रणनीति को भी तुरंत लागू करने की आवश्यकता है।

दिल्ली में मौसम की पहली घनी धुंध, 4 वर्षों में सबसे लंबे समय तक बने रहने का अनुमान : रिपोर्ट

दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. नई दिल्ली: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम की पहली घनी धुंध छा गयी है और इसके दो और दिनों तक रहने की आशंका है. विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने बुधवार को यह जानकारी दी. हालांकि, दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. Ads by यह भी पढ़ें #DelhiPollution: दिल्ली में सांस लेने में हो रही है दिक्कत, सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहा है#DelhiPollution: दिल्ली में सांस लेने में हो रही है दिक्कत, सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहा है यमुना नदी में तैरते जहरीले झाग से बचाने के लिए लगाए गए बैरिकेड्स, देखें VIDEOयमुना नदी में तैरते जहरीले झाग से बचाने के लिए लगाए गए बैरिकेड्स, देखें VIDEO यमुना में 'जहरीले झाग' पर सियासत, केजरीवाल सरकार ने अब सफाई के लिए तैनात की 15 बोट्सयमुना में 'जहरीले झाग' पर सियासत, केजरीवाल सरकार ने अब सफाई के लिए तैनात की 15 बोट्स सीएसई में अनुसंधान की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा, ‘जाहिर तौर पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों (ठंडी और शांत हवाओं) के संयुक्त असर, पराली और पटाखे जलाने से मौसम की धुंध छा गयी है.' दिल्ली में मौसम का सबसे कम तापमान, वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब' सीएसई ने बताया कि पिछले चार वर्षों की धुंध की पहली घटना की तुलना करने पर मौजूदा धुंध 2018 और 2020 की पहली धुंध की अवधि से मिलती है जो छह दिनों तक रही थी. अगर परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है तो यह 2019 की धुंध से भी अधिक समय तक रह सकती है जो आठ दिनों तक रही थी. दिल्ली-एनसीआर में 'खतरनाक' स्तर पर पहुंची हवा, एक्यूआई 382 पर सीएसई ने कहा, ‘दिल्ली के औसतन दैनिक पीएम2.5 में अक्टूबर से आठ नवंबर के दौरान धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. अभी तक यह प्रतिदिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि पिछले साल 17 फीसदी, 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 प्रतिशत था.'

दिल्ली ने ओढ़ी मौसम की पहली घनी धुंध की चादर, इस बार टूटेगा 4 साल का रिकॉर्ड!

नई दिल्ली। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम की पहली घनी धुंध छा गई है और इसके दो और दिनों तक रहने की आशंका है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने यह जानकारी दी। recommended by Mgid Mgid eMoney Program New Delhi Woman Makes ₹17.42 Lakhs Per Month Using This Trick Learn more हालांकि दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है लेकिन अक्टूबर के मध्य से 8 नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले 4 वर्षों में सबसे कम रहा है। सीएसई में अनुसंधान की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा कि जाहिर तौर पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों (ठंडी और शांत हवाओं) के संयुक्त असर, पराली और पटाखे जलाने से मौसम की धुंध छा गई है। सीएसई के मुताबिक पिछले चार वर्षों की धुंध की पहली घटना की तुलना करने पर मौजूदा धुंध 2018 और 2020 की पहली धुंध की अवधि से मिलती है जो 6 दिनों तक रही थी। अगर परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है तो यह 2019 की धुंध से भी अधिक समय तक रह सकती है जो आठ दिनों तक रही थी। सीएसई ने कहा कि दिल्ली के औसतन दैनिक पीएम 2.5 में अक्टूबर से 8 नवंबर के दौरान धुएं का योगदान पिछले 4 वर्षों में सबसे कम रहा है। अभी तक यह प्रतिदिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि पिछले साल 17 प्रतिशत, 2019 में 14 प्रतिशत और 2018 में 16 प्रतिशत था।

पहला गंभीर स्मॉग एपिसोड दिल्ली में हिट, 4 साल में सबसे लंबा हो सकता है: रिपोर्ट

ग्रीन थिंक-टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने बुधवार को कहा कि पहले भीषण स्मॉग एपिसोड ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को प्रभावित किया है और अगले दो दिनों तक चलने की उम्मीद है। दिल्ली में मौसमी धुंध भले ही तीव्र हो, लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक खेत की आग से निकलने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। सीएसई के कार्यकारी निदेशक (अनुसंधान और वकालत) अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, “अनुमानतः, मौसम की पहली कड़ी प्रतिकूल मौसम की स्थिति (ठंडी और शांत हवाओं और उलटा), पराली जलाने और पटाखों के संयुक्त प्रभाव से शुरू हुई है।” पिछले चार वर्षों के पहले स्मॉग एपिसोड की तुलना में, वर्तमान स्मॉग 2018 और 2020 सीज़न के पहले स्मॉग की अवधि से मेल खाता है – दोनों छह दिनों तक चले। सीएसई ने कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह 2019 के आठ दिनों तक चले धुंध से आगे निकल सकता है। इस साल अब तक स्मॉग की औसत तीव्रता 329 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर प्रति दिन है, जो कि 2020 स्मॉग (7 फीसदी) और 2019 स्मॉग (3 फीसदी) की तुलना में कम है। यह 2018 के स्मॉग (करीब 9 फीसदी) की तुलना में अधिक तीव्र है। ग्रीन थिंक टैंक ने कहा कि अपेक्षाकृत हवा वाली स्थानीय परिस्थितियों के बावजूद इस साल के धुंध के लंबे समय तक रहने का कारण शहर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कमी हो सकती है। “जबकि PM2.5 की बहुत अधिक सांद्रता ने ध्यान आकर्षित किया है, इस स्मॉग एपिसोड के दौरान गैसों – ओजोन, CO या NO2 – का स्तर ऊंचा बना हुआ है। साथ ही, दिवाली की रात को SO2 से NO2 के अनुपात में वृद्धि हुई है, जो प्रदूषण भार में वृद्धि का संकेत देता है। पटाखों। दिवाली की रात (रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक) पीएम2.5 की सघनता 2017 के बाद से सबसे तीव्र रही है, “अर्बन लैब, सीएसई के प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी ने कहा। यह विश्लेषण दिल्ली-एनसीआर में वर्तमान कार्यरत वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों और बड़े भारत-गंगा के मैदान से उपलब्ध वास्तविक समय के आंकड़ों पर आधारित है। “औसतन, अक्टूबर से 8 नवंबर के मध्य के दौरान दिल्ली के दैनिक PM2.5 में धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। अब तक, यह प्रति दिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि 17 प्रतिशत प्रति दिन औसत है। 2020 में प्रति दिन, 2019 में प्रति दिन 14 प्रतिशत, और 2018 में प्रति दिन 16 प्रतिशत (जैसा कि SAFAR द्वारा रिपोर्ट किया गया है), “सीएसई ने कहा। “यदि पूर्ण सांद्रता में परिवर्तित किया जाता है, तो इस वर्ष अब तक धुएं का प्रति दिन योगदान 26 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जबकि 2020 में 35 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, 2019 में 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और 2018 में 31 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। ,” यह कहा। हालांकि, दिल्ली के पीएम स्तर पर धुएं का चरम योगदान 7 नवंबर को दर्ज किया गया था, जब यह 48 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस तरह के अनुमान के बाद से यह दूसरा सबसे बड़ा दैनिक योगदान प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसे SAFAR द्वारा 2018 में शुरू किया गया था। 5 नवंबर, 2018 को उच्चतम एकल दिवस योगदान प्रतिशत 58 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

दिल्ली ने ओढ़ी मौसम की पहली घनी धुंध की चादर, इस बार टूटेगा चार साल का रिकॉर्ड!

नई दिल्ली : दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी (Delhi-NCR) क्षेत्र में मौसम की पहली घनी धुंध (Smog) छा गई है और इसके दो और दिनों तक रहने की आशंका है. विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने बुधवार को यह जानकारी दी. हालांकि, दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है, लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा हैसीएसई में अनुसंधान की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा, ‘‘जाहिर तौर पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों (ठंडी और शांत हवाओं) के संयुक्त असर, पराली और पटाखे जलाने से मौसम की धुंध छा गई है.’’ प्रमोटेड कंटेंट Mgid Mgid A 26-Year-Old Girl From New Delhi Became A Millionaire Overnight Olymp Trade A Shocking Rags-To-Riches Story! Know How He Became A Millionaire Olymp Trade इंस्टा पर 10 सबसे सेक्सी बॉलीवुड एक्ट्रेस ने बिखेरे हुस्न के जलवे Limelight Media हॉलीवुड सितारे जिन्होंने बॉलीवुड में भी छोड़ी अपनी बेहतरीन छाप। Limelight Media ₹20,000 Special Bonus For Cricket Fans! Join Now! Odds96 बिना थके 2 घंटे तक अपनी पत्नी को संतुष्ट करें Vigorman सीएसई ने बताया कि पिछले चार वर्षों की धुंध की पहली घटना की तुलना करने पर मौजूदा धुंध 2018 और 2020 की पहली धुंध की अवधि से मिलती है, जो छह दिनों तक रही थी. अगर परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है तो यह 2019 की धुंध से भी अधिक समय तक रह सकती है जो आठ दिनों तक रही थी. सीएसई ने कहा, ‘‘दिल्ली के औसतन दैनिक पीएम2.5 में अक्टूबर से आठ नवंबर के दौरान धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. अभी तक यह प्रतिदिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल 17 फीसदी, 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 प्रतिशत था.

Delhi Weather and Pollution Today: दिल्ली में गिरा पारा, प्रदूषण बढ़ा, इस हफ्ते बढ़ जाएगी ठंड, बुधवार को दर्ज हुआ सबसे कम तापमान

दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. Delhi Weather and Pollution Today: दिल्ली में बुधवार को इस सर्दी के सीजन का न्यूनतम तापमान सबसे कम रहा. मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री सेल्सियस था. वहीं आगर गुरुवार की बात करें तो अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि बुधवार की तुलना में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में और गिरावट होगी. दिल्ली में नवंबर के अंत में शीतलहर के शुरू होने का अनुमान है. वहीं तापमान के गिरने से दिल्ली में ठंड बढ़ जाएगी. मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में कोहरा छाया रहेगा. हवा में नमी का स्तर अधिक होने की वजह से सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहेगा. जिसकी वजह से दृश्यता कम रहेगी. मौसम विभाग के अनुसार इस हफ्ते ज्यादातर मौसम साफ रहेगा और धूप खिली रहेगी. हालांकि, उत्तरी क्षेत्र से आने वाली हल्की ठंडी हवाओं की वजह से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कमी आएगी. दिल्ली में सूर्योदय 06:40 पर हुआ जबकि सूर्यास्त 17:29 पर होगा. VDO.AI बुधवार को तेज हवाएं चलने से प्रदूषण के स्तर में थोड़ी कमी आई थी लेकिन गुरुवार को एक बार फिर से वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी हो गई है और एक्यूआई 402 पर पहुंच गया है जो गंभीर माना जाता है. वहीं पीएम2.5 अपने मानक से ऊपर 298.8 घन मीटर पर है. अगले दो दिनों में वायु गुणवत्ता और बिगड़ेगी और 13 नवंबर को इसमें सुधार आएगा. यहां पर आपको बता दें कि एक्यूआई को 0 और 50 के बीच 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 और 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में माना जाता है. दूसरी तरफ विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र के अमुसार दिल्ली-एनसीआर में मौसम की पहली घनी धुंध छा गयी है और इसके दो और दिनों तक रहने की आशंका है. हालांकि, दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. सीएसई ने बताया कि पिछले चार वर्षों की धुंध की पहली घटना की तुलना करने पर मौजूदा धुंध 2018 और 2020 की पहली धुंध की अवधि से मिलती है जो छह दिनों तक रही थी. अगर परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है तो यह 2019 की धुंध से भी अधिक समय तक रह सकती है जो आठ दिनों तक रही थी. सीएसई ने कहा, ‘‘दिल्ली के औसतन दैनिक पीएम2.5 में अक्टूबर से आठ नवंबर के दौरान धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है. अभी तक यह प्रतिदिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि पिछले साल 17 फीसदी, 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 प्रतिशत था.’’

पहला गंभीर स्मॉग एपिसोड दिल्ली में हिट, 4 साल में सबसे लंबा हो सकता है: रिपोर्ट

ग्रीन थिंक-टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने आज कहा कि पहले भीषण स्मॉग प्रकरण ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को प्रभावित किया है और अगले दो दिनों तक चलने की उम्मीद है। दिल्ली में मौसमी धुंध भले ही तीव्र हो, लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक खेत की आग से निकलने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। सीएसई के कार्यकारी निदेशक (अनुसंधान और वकालत) अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, “अनुमानतः, मौसम की पहली कड़ी प्रतिकूल मौसम की स्थिति (ठंडी और शांत हवाओं और उलटा), पराली जलाने और पटाखों के संयुक्त प्रभाव से शुरू हुई है।” पिछले चार वर्षों के पहले स्मॉग एपिसोड की तुलना में, वर्तमान स्मॉग 2018 और 2020 सीज़न के पहले स्मॉग की अवधि से मेल खाता है – दोनों छह दिनों तक चले। सीएसई ने कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह 2019 के आठ दिनों तक चले धुंध से आगे निकल सकता है। इस साल अब तक स्मॉग की औसत तीव्रता 329 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर प्रति दिन है, जो कि 2020 स्मॉग (7 फीसदी) और 2019 स्मॉग (3 फीसदी) की तुलना में कम है। यह 2018 के स्मॉग (करीब 9 फीसदी) की तुलना में अधिक तीव्र है। ग्रीन थिंक टैंक ने कहा कि अपेक्षाकृत हवा वाली स्थानीय परिस्थितियों के बावजूद इस साल के धुंध के लंबे समय तक रहने का कारण शहर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कमी हो सकती है। “जबकि PM2.5 की बहुत अधिक सांद्रता ने ध्यान आकर्षित किया है, इस स्मॉग एपिसोड के दौरान गैसों – ओजोन, CO या NO2 – का स्तर ऊंचा बना हुआ है। साथ ही, दिवाली की रात को SO2 से NO2 के अनुपात में वृद्धि हुई है, जो प्रदूषण भार में वृद्धि का संकेत देता है। पटाखों। दिवाली की रात (रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक) पीएम2.5 की सघनता 2017 के बाद से सबसे तीव्र रही है, “अर्बन लैब, सीएसई के प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी ने कहा। यह विश्लेषण दिल्ली-एनसीआर में वर्तमान कार्यरत वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों और बड़े भारत-गंगा के मैदान से उपलब्ध वास्तविक समय के आंकड़ों पर आधारित है। “औसतन, अक्टूबर से 8 नवंबर के मध्य के दौरान दिल्ली के दैनिक PM2.5 में धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। अब तक, यह प्रति दिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि 17 प्रतिशत प्रति दिन औसत है। 2020 में प्रति दिन, 2019 में प्रति दिन 14 प्रतिशत, और 2018 में प्रति दिन 16 प्रतिशत (जैसा कि SAFAR द्वारा रिपोर्ट किया गया है), “सीएसई ने कहा। “यदि पूर्ण सांद्रता में परिवर्तित किया जाता है, तो इस वर्ष अब तक धुएं का प्रति दिन योगदान 26 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जबकि 2020 में 35 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, 2019 में 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और 2018 में 31 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। ,” यह कहा। हालांकि, दिल्ली के पीएम स्तर पर धुएं का चरम योगदान 7 नवंबर को दर्ज किया गया था, जब यह 48 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस तरह के अनुमान के बाद से यह दूसरा सबसे बड़ा दैनिक योगदान प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसे SAFAR द्वारा 2018 में शुरू किया गया था। 5 नवंबर, 2018 को उच्चतम एकल दिवस योगदान प्रतिशत 58 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

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ग्रीन थिंक-टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने आज कहा कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पहला भीषण कोहरा छाया हुआ है और यह अगले दो दिनों तक चलेगा। हालांकि दिल्ली में मॉनसून कोहरा भीषण है, लेकिन अक्टूबर के मध्य से 8 नवंबर तक खेतों में लगी आग से निकलने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम है। सीएसई की कार्यकारी निदेशक, अनुसंधान और वकालत अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, “अनुमानित रूप से, मौसम का पहला भाग प्रतिकूल मौसम की स्थिति (ठंडी और शांत हवाओं और उलट), जलने और पटाखों के संयुक्त प्रभाव से शुरू हुआ है।” पिछले चार वर्षों के पहले स्मॉग एपिसोड की तुलना में, वर्तमान स्मॉग 2018 और 2020 सीज़न की पहली स्मॉग अवधि से मेल खाता है – दोनों छह दिनों तक चले। सीएसई ने कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह आठ दिन 2019 के कोहरे को उलट सकता है। इस साल अब तक औसत कोहरे की तीव्रता 329 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर प्रति दिन है, जो 2020 के कोहरे (7%) और 2019 के कोहरे (3%) से कम है। यह 2018 कोहरे (लगभग 9 प्रतिशत) की तुलना में अधिक तीव्र है। ग्रीन थिंक टैंक ने कहा कि अपेक्षाकृत हवा वाली स्थानीय परिस्थितियों के बावजूद, इस साल के कोहरे की दीर्घकालिक दृढ़ता, शहर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कमी के कारण हो सकती है। “जबकि PM2.5 की उच्च सांद्रता देखी गई है, इस कोहरे की अवधि के दौरान गैस का स्तर – ओजोन, CO या NO2 – ऊंचा बना हुआ है। सुबह 8 से 8 बजे 8) PM2.5 एकाग्रता 2017 के बाद से सबसे तीव्र है, “कहा अविकल सोमवंशी, प्रोग्राम मैनेजर, सीएसई की अर्बन लैब। यह विश्लेषण दिल्ली-एनसीआर और बड़े भारत-गंगा के मैदानों पर मौजूदा वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से उपलब्ध वास्तविक समय के आंकड़ों पर आधारित है। “औसतन, मध्य अक्टूबर से 8 नवंबर तक दिल्ली के दैनिक PM2.5 में धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम है। अब तक, यह प्रति दिन 17 प्रतिशत की तुलना में औसतन 12 प्रतिशत प्रति दिन रहा है। 16 प्रतिशत (जैसा कि SAFAR द्वारा रिपोर्ट किया गया है), “सीएसई ने कहा। “यदि पूर्ण एकाग्रता में परिवर्तित किया जाता है, तो इस वर्ष प्रति दिन धुएं का योगदान 26 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है, जबकि 2020 में 35 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, 2019 में 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और 2018 में 31 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है।” कहा। हालांकि 7 नवंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री के स्तर पर धुरा का सबसे ज्यादा योगदान 48 फीसदी दर्ज किया गया. SAFAR द्वारा 2018 में इस तरह का पूर्वानुमान शुरू करने के बाद से यह रिपोर्ट किया गया दूसरा सबसे बड़ा दैनिक योगदान प्रतिशत है। 5 नवंबर, 2018 को, उच्चतम एक दिवसीय योगदान प्रतिशत 58 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

दिल्ली में पहला भीषण स्मॉग, राष्ट्रीय राजधानी में 2017 के बाद से सीजन का सबसे लंबा स्मॉग देखा जा सकता है: रिपोर्ट

रीन थिंक-टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने चेतावनी दी है कि यह साल दिल्ली और उसके पड़ोसी इलाकों के लिए सबसे खराब स्मॉग एपिसोड हो सकता है। ग्रीन थिंक-टैंक के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक स्मॉग बने रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि दिल्ली में पहला गंभीर स्मॉग एपिसोड चार साल में सबसे लंबा हो सकता है। सीएसई रिसर्च एंड एडवोकेसी की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी के अनुसार, मौसम का पहला स्मॉग एपिसोड प्रतिकूल मौसम की स्थिति, पराली जलाने और पटाखों के संयुक्त प्रभाव से शुरू हुआ है। दूसरी ओर, सीएसई के आंकड़े कहते हैं कि खेत की आग से निकलने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान अक्टूबर के मध्य से eight नवंबर की समयावधि के दौरान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। दिल्ली के पीएम स्तर पर धुएं का चरम योगदान दर्ज किया गया था। 7 नवंबर को जब यह 48% पर पहुंच गया। ग्रीन थिंक-टैंक का कहना है कि इस साल का पहला स्मॉग एपिसोड पहले ही छह दिनों तक चल चुका है जो 2018 और 2020 से मेल खाता है। हालांकि, अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह और बढ़ सकता है और 2019 के आठ दिनों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है। इस साल अब तक स्मॉग की औसत तीव्रता 329 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है। यह 2020 स्मॉग की तुलना में 7% और 2019 स्मॉग की तुलना में 3% कम है। हालांकि, यह 2018 के स्मॉग की तुलना में लगभग 9% अधिक तीव्र है। ग्रीन थिंक टैंक ने अपेक्षाकृत तेज़ स्थानीय परिस्थितियों के बावजूद दिल्ली में धुंध की लंबी अवधि के लिए शहर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। विश्लेषण दिल्ली-एनसीआर में वर्तमान में काम कर रहे वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों और बड़े भारत-गंगा के मैदान से उपलब्ध वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर किया गया है।

अगले कुछ दिन आपको घने स्मॉग का सामना करना पड़ सकता

नई दिल्ली। इस सीजन में पहली बार धुंध की एक मोटी चादर अगले सात दिनों तक पूरे इंडो गैंजेटिक प्लेन में देखी जाएगी। इस धुंध का प्रमुख कारण दिवाली पर जलाए गए पटाखे और पराली जलाने से निकला धुआं और बदलता मौसम है। इस साल पिछले चार सालों में पराली का धुंआ सबसे कम दर्ज किया जा रहा है। दिल्ली और एनसीआर में दर्ज किए जाने वाली धुंध में PM 2.5 के अलावा बड़े पैमाने पर ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड सहित जहरीली गैसों का घातक मिश्रण दर्ज किया जा रहा है। 2017 के बाद से दिवाली की रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक हवा में पीएम 2.5 का स्तर सबसे अधिक रहा। वहीं हवा में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का अनुपात भी काफी अधिक रहा है, जो पटाखों के प्रभाव को दर्शाता है। सीएसएई के मुताबिक हवा में घने स्मॉग को देखते हुए तुरंत आपातकालीन कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि प्रदूषण को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। वहीं सरकारों को एक दीर्धकालिक पॉलिसी अपनाने की भी जरूरत है। दिल्ली की हवा में PM 2.5 का औसत स्तर 250 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक बना हुआ है। 05 नवम्बर को हवा में PM 2.5 का स्तर 501 माइम्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था। मानकों के तहत हवा में PM 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। 8 नवम्बर तक हवा में PM 2.5 का स्तर घट कर 256 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक आ गया। लेकिन अब भी ये खतरनाक स्तरों के ऊपर बना हुआ है। इस साल आठ नवम्बर को हवा में पराली के धुएं का स्तर पिछले चार सालों में सबसे कम दर्ज किया गया। इस साल आठ नवम्बर को हवा में इसका स्तर 12 फीसदी रहा। 2020 में हवा में इसका स्तर 17 फीसदी था। वहीं 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 फीसदी था। दिल्ली की हवा में स्मॉग का स्तर सबसे अधिक 7 नवम्बर को रहा। ये 48 फीसदी तक पहुंच गया था। ये दिल्ली की हवा में प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने वाली संस्था SAFAR के बनने के बाद 2018 में सबसे अधिक था। सीएसई की रिपोर्ट के मुतबाकि प्रदूषण के चलते दिल्ली की हवा में खतरनाक गैसों का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। हवा में ओजोन गैस का स्तर मानकों से अधिक दर्ज किया जा रहा हे। वहीं स्मॉग के चलते हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर भी मानकों से अधिक बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में इस साल दिवाली की रात 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक हवा में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहा। पिछले पांच सालों में इस दौरान हवा में PM 2.5 का औसत स्तर 747 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा जो 2020 की तुलना में 22 फीसदी तक अधिक है। वहीं दिवाली की रात हवा में PM 2.5 का ये स्तर सामान्य स्तर से 4.5 गुना ज्यादा है।

Delhi Pollution: दिल्ली में दमघोंटू हुई हवा, एक्सपर्ट बोले- ये हेल्थ इमरजेंसी, गंभीर नहीं हुए तो बड़ा खतरा

Delhi Smog, Pollution: दिल्ली-NCR में पॉल्यूशन में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन हालात अब भी 'बहुत खराब' बने हुए हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीए... https://www.aajtak.in/india/delhi/story/delhi-pollution-update-aqi-smog-today-safar-expert-says-public-emergency-action-needed-lbs-1355289-2021-11-11

अगले कुछ दिन सांस लेना भी होगा मुश्किल, CSE की इस रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी

CSE की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सीजन में पहली बार धुंध की एक मोटी चादर अगले सात दिनों तक पूरे इंडो गैंजेटिक प्लेन में देखी जाएगी। इस धुंध का प्रमुख कारण दिवाली पर जलाए गए पटाखे और पराली जलाने से निकला धुआं और बदलता मौसम है। नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं तो अगले कुछ दिन आपको घने स्मॉग का सामना करना पड़ सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट CSE की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सीजन में पहली बार धुंध की एक मोटी चादर अगले सात दिनों तक पूरे इंडो गैंजेटिक प्लेन में देखी जाएगी। इस धुंध का प्रमुख कारण दिवाली पर जलाए गए पटाखे और पराली जलाने से निकला धुआं और बदलता मौसम है। इस साल पिछले चार सालों में पराली का धुंआ सबसे कम दर्ज किया जा रहा है। दिल्ली और एनसीआर में दर्ज किए जाने वाली धुंध में PM 2.5 के अलावा बड़े पैमाने पर ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड सहित जहरीली गैसों का घातक मिश्रण दर्ज किया जा रहा है। 2017 के बाद से दिवाली की रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक हवा में पीएम 2.5 का स्तर सबसे अधिक रहा। वहीं हवा में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का अनुपात भी काफी अधिक रहा है, जो पटाखों के प्रभाव को दर्शाता है। सीएसएई के मुताबिक हवा में घने स्मॉग को देखते हुए तुरंत आपातकालीन कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि प्रदूषण को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। वहीं सरकारों को एक दीर्धकालिक पॉलिसी अपनाने की भी जरूरत है। दिल्ली की हवा में PM 2.5 का औसत स्तर 250 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक बना हुआ है। 05 नवम्बर को हवा में PM 2.5 का स्तर 501 माइम्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था। मानकों के तहत हवा में PM 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। 8 नवम्बर तक हवा में PM 2.5 का स्तर घट कर 256 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक आ गया। लेकिन अब भी ये खतरनाक स्तरों के ऊपर बना हुआ है।

दिल्ली में मौसम की पहली घनी धुंध, 4 वर्षों में सबसे लंबे समय तक बने रहने का अनुमान

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम की पहली घनी धुंध छा गयी है और इसके दो और दिनों तक रहने की आशंका है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम की पहली घनी धुंध छा गयी है और इसके दो और दिनों तक रहने की आशंका है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने बुधवार को यह जानकारी दी। हालांकि, दिल्ली में मौसमी धुंध घनी है लेकिन अक्टूबर के मध्य से आठ नवंबर तक पराली जलाने से होने वाले धुएं का औसत दैनिक योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। यह भी पढ़ें: उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हुआ लोक आस्था का महापर्व छठ; देश-दुनिया में दिखी इसकी छटा सीएसई में अनुसंधान की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा, ‘‘जाहिर तौर पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों (ठंडी और शांत हवाओं) के संयुक्त असर, पराली और पटाखे जलाने से मौसम की धुंध छा गयी है।’’ सीएसई ने बताया कि पिछले चार वर्षों की धुंध की पहली घटना की तुलना करने पर मौजूदा धुंध 2018 और 2020 की पहली धुंध की अवधि से मिलती है जो छह दिनों तक रही थी। अगर परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है तो यह 2019 की धुंध से भी अधिक समय तक रह सकती है जो आठ दिनों तक रही थी। यह भी पढ़ें: दिल्ली में जहरीली हवा: बच्चों के लिए कितना खतरनाक है वायु प्रदूषण, विशेषज्ञों ने बताया सीएसई ने कहा, ‘‘दिल्ली के औसतन दैनिक पीएम2.5 में अक्टूबर से आठ नवंबर के दौरान धुएं का योगदान पिछले चार वर्षों में सबसे कम रहा है। अभी तक यह प्रतिदिन औसतन 12 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि पिछले साल 17 फीसदी, 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 प्रतिशत था।’’

अगले कुछ दिन सांस लेना भी होगा मुश्किल, CSE की इस रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं तो अगले कुछ दिन आपको घने स्मॉग का सामना करना पड़ सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट CSE की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सीजन में पहली बार धुंध की एक मोटी चादर अगले सात दिनों तक पूरे इंडो गैंजेटिक प्लेन में देखी जाएगी। इस धुंध का प्रमुख कारण दिवाली पर जलाए गए पटाखे और पराली जलाने से निकला धुआं और बदलता मौसम है। इस साल पिछले चार सालों में पराली का धुंआ सबसे कम दर्ज किया जा रहा है। दिल्ली और एनसीआर में दर्ज किए जाने वाली धुंध में PM 2.5 के अलावा बड़े पैमाने पर ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड सहित जहरीली गैसों का घातक मिश्रण दर्ज किया जा रहा है। 2017 के बाद से दिवाली की रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक हवा में पीएम 2.5 का स्तर सबसे अधिक रहा। वहीं हवा में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का अनुपात भी काफी अधिक रहा है, जो पटाखों के प्रभाव को दर्शाता है। सीएसएई के मुताबिक हवा में घने स्मॉग को देखते हुए तुरंत आपातकालीन कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि प्रदूषण को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। वहीं सरकारों को एक दीर्धकालिक पॉलिसी अपनाने की भी जरूरत है। दिल्ली की हवा में PM 2.5 का औसत स्तर 250 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक बना हुआ है। 05 नवम्बर को हवा में PM 2.5 का स्तर 501 माइम्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था। मानकों के तहत हवा में PM 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। 8 नवम्बर तक हवा में PM 2.5 का स्तर घट कर 256 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक आ गया। लेकिन अब भी ये खतरनाक स्तरों के ऊपर बना हुआ है। इस साल आठ नवम्बर को हवा में पराली के धुएं का स्तर पिछले चार सालों में सबसे कम दर्ज किया गया। इस साल आठ नवम्बर को हवा में इसका स्तर 12 फीसदी रहा। 2020 में हवा में इसका स्तर 17 फीसदी था। वहीं 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 फीसदी था। दिल्ली की हवा में स्मॉग का स्तर सबसे अधिक 7 नवम्बर को रहा। ये 48 फीसदी तक पहुंच गया था। ये दिल्ली की हवा में प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने वाली संस्था SAFAR के बनने के बाद 2018 में सबसे अधिक था। 5 नवम्बर को दिल्ली की हवा में स्मॉग का स्तर 58 फीसदी पर पहुंच गया था। हवा में बढ़ीं खतरनाक गैसें सीएसई की रिपोर्ट के मुतबाकि प्रदूषण के चलते दिल्ली की हवा में खतरनाक गैसों का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। हवा में ओजोन गैस का स्तर मानकों से अधिक दर्ज किया जा रहा हे। वहीं स्मॉग के चलते हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर भी मानकों से अधिक बना हुआ है। पिछले पांच सालों में सबसे प्रदूषित रही दिवाली की रात सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में इस साल दिवाली की रात 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक हवा में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहा। पिछले पांच सालों में इस दौरान हवा में PM 2.5 का औसत स्तर 747 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा जो 2020 की तुलना में 22 फीसदी तक अधिक है। वहीं दिवाली की रात हवा में PM 2.5 का ये स्तर सामान्य स्तर से 4.5 गुना ज्यादा है।