सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट में कोरोना पर चौंकाने वाला खुलासा, अपार्टमेंट में रहने वालों को चेताया
सीएसई की रिपोर्ट आने के बाद अपार्टमेंट के फ्लैट में रहने वालों को सावधान हो जाना चाहिये कहीं फ्लैट के दमघोंटू कमरे तो कोरोना संक्रमण प्रसार की वजह तो नहीं बन रहे हैं। ऐसे कमरे में कई दिन तक वायरस ठहर सकता है। कानपुर, जेएनएन। स्टेटस सिंबल और सुरक्षा को लेकर तेजी से बढ़ रही फ्लैट संस्कृति संक्रमण का बड़ा कारण बन रही है। क्रॉस वेंटिलेशन न होने की वजह से दम घोंटू फ्लैट के कमरों में वायरस कई-कई दिन तक ठहरा रह सकता है जो अन्य लोगों को अपना शिकार बना सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने पिछले दिनों ही दम घोंटू फ्लैटों से बढ़ रहे संक्रमण के खतरे के प्रति आगाह किया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि किन्हीं दो फ्लैटों के रोशनदान, खिड़की और बालकनी में दो गज की दूरी न होना घातक हो सकता है। यह भी कहा गया था कि इस मामले में तीन दशक पुरानी कॉलोनियों के हवादार घरों को आदर्श माना जा सकता है। जहां दो घरों की खिड़कियों, दरवाजों, रोशनदान और बालकनी में कम से कम दो से पांच मीटर तक की दूरी होती थी। ये होता है खतरा विशेषज्ञों के मुताबिक फ्लैटों में जगह कम होती है। ऐसे में यदि बीमार व्यक्ति अपने फ्लैट में छींकता या खांसता है तो संक्रमित एरोसोल (सूक्ष्म ठोस कण या तरल बूंदें ) आंतरिक वातावरण में ही घूमते रहते हैं। क्रॉस वेंटिलेशन (हवा आर-पार होने के लिए खिड़कियां दरवाजे) न होने की वजह से ये बाहर नहीं निकल पाते और अन्य लोगों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। यह भी पढ़ें उन्नाव में सब्जी विक्रेता फैसल की मौत पर गरमाई सियासत, UP सरकार के लिए ओवैसी ने कही यह बात उन्नाव में सब्जी विक्रेता फैसल की मौत पर गरमाई सियासत, UP सरकार के लिए ओवैसी ने कही यह बात फ्लैटों को हवादार बनाएं केडीए के नगर नियोजक एके सिंह कहते हैं कि फ्लैटों को हवादार बनाया जाना चाहिए। क्रॉस वेंटिलेशन रहेगा तो वायरस और फंगल इन्फेक्शन का खतरा खुद ब खुद कम हो जाएगा। खिड़कियों को बड़ा रखना भी विकल्प हो सकता है। फ्लैट में शेड बैक और अन्य जगह छोडऩे की व्यवस्था का भी पालन किया जाना चाहिए। फ्लैट की छत की ऊंचाई 2.75 मीटर होनी चाहिए यह भी पढ़ें लाख जतन के बाद भी युवाओं को पछाड़ नहीं पा रहे 45 पार लाख जतन के बाद भी युवाओं को पछाड़ नहीं पा रहे 45 पार उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण डिप्लोमा इंजीनियर संघ के अध्यक्ष और भवन विभाग के अभियंता अजय ङ्क्षसह के मुताबिक भवन उपविधि के नियमों का पालन करते हुए फ्लैट का निर्माण हो तो वेंटिलेशन बना रहेगा। हर फ्लैट की छत कम से कम 2.75 मीटर ऊंची होनी चाहिए। फ्लैट डक्ट से जुड़ा होना चाहिए ताकि हवा आती-जाती रहे। घर के वातावरण से बनती है इम्यूनिटी घर के वातावरण से काफी हद तक व्यक्ति की इम्यूनिटी बनती है। वर्तमान में लोगों को बरामदा, लॉन, आंगन और अहाते के लिए जगह छोडऩा जमीन की बर्बादी लगती है, लेकिन एक खुशनुमा घर के लिए ये बेहद जरूरी हैं। भारतीय वास्तुशास्त्र में क्रॉस वेेंटिलेशन के बिना घर की परिकल्पना ही नहीं की गई है, किसी भी संक्रामक बीमारी से बचने के लिए भी यह बड़ा हथियार है।
