Air Pollution: क्यों बडे शहरों की तुलना में छोटे शहरों की वायु गुणवत्ता है ज्यादा खराब?
नई दिल्ली [ िंजीव गुप्ता]। ेंटर फॉर ाइिं एिंड एनवायरनमेंट ( ीए ई) की तरफ े गिंगा के मैिानी इलाके के शहरों में शीतकालीन वायु प्रिूर्ण (11 जनवरी 2021 तक) पर ककया गया र्वचलेर्ण बताता है कक बडे शहरों की तुलना में छोटे शहरों की वायु गुणवत्ता ज्यािा खराब है। भारत में गिंगा के मैिानी इलाकों में राष्ट्िीय राजधानी क्षेत्र के बाहर ननगरानी स्टेशनों े वास्तर्वक मय के आिंकडों का र्वचलेर्ण इ ाल शीतकालीन प्रिूर्ण में नए पैटनष दिखाता है। इ बार दिषयों में अन्य क्षेत्रों की तुलना में एन ीआर में प्रिूर्ण उतना अधधक नहीिं था। ीए ई की कायषकारी ननिेशक अनुसमता रॉय चौधरी के मुताबबक, लाकडाउन के िौरान वायु प्रिूर्ण में नाटकीय कमी के बावजूि, स्थानीय और क्षेत्रीय प्रिूर्ण के चलते लाकडाउन हटते ही प्रिूर्ण बढने लगा है। प्रिूर्ण के स्तर में स्थायी कमी लाने के सलए वाहनों, उद्योग, बबजली िंयिंत्रों े होने वाले प्रिूर्ण पर अिंकुश लगाने के सलए त्वररत क्षेत्रीय ुधारों और ो कारषवाई की जरूरत है। र्वचलेर्ण के मुताबबक पीएम 2.5 का उच्च स्तर एक दिषयों की ामान्य जस्थनत है, क्योंकक दिषयों में वाहन, उद्योग, ननमाषण आदि े होने वाले ननरिंतर उत् जषन और मौ म िंबिंधी पररवतषनों के कारण वातावरण में प्रिूर्क तत्वों का जमाव होने लगता है। वहीिं, ीए ई के प्रोग्राम मैनेजर अर्वकल ोमविंशी कहते हैं, इ ाल गिंगा के उत्तर और िक्षक्षण के मैिानी क्षेत्रों के बीच शीतकालीन प्रिूर्ण पैटनष में स्पष्ट्ट अिंतर है। भले ही 2020 में गसमषयों और मान ून की वजह े पीएम 2.5 का औ त स्तर र्पछले ाल की तुलना में कम रहा है, लेककन पिंजाब और लगभग भी ननगरानी केंद्रों वाले शहरों में पीएम 2.5 का स्तर 2019 के स्तर े ज्यािा रहा है। यह र्वचलेर्ण केंद्रीय प्रिूर्ण ननयिंत्रण बोडष ( ीपी ीबी) के आधधकाररक आनलाइन पोटषल ेंिल किंिोल रूमफोर एयर क्वासलटी मैनेजमेंट पर ावषजननक रूप े उपलब्ध ररयल-टाइम डेटा पर आधाररत है।
