छोटे शहरों की हवा बड़ों से ज्यादा खराब
नई दिल्ली। सिंधु-गंगा दोआब के छोटे शहरों की हवा की गुणवत्ता बड़े शहरों से ज्यादा खराब है। बीते एक वर्ष में दिल्ली और वाराणसी सरीखे बड़े शहरों में पीएम 2.5 की मात्रा में कमी आई है, जबकि फतेहाबाद, मुरादाबाद जैसे शहरों में इसमें तेजी से इजाफा हुआ है। वहीं, बीते नवंबर महीने में हिसार और जींद जैसे शहरों की हवा पराली के धुएं की वजह से खराब दर्ज की गई है। इसका खुलासा सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट (सीएसई) की एक रिपोर्ट में हुआ है। सीएसई ने अपनी रिपोर्ट दोआब के 26 शहरों की वायु गुणवत्ता का अध्ययन करके तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन मेें बेशक दोआब की हवा बेहतर हुई थी, लेकिन धूल के महीन कणों पीएम 2.5 का वार्षिक औसत सामान्य से ज्यादा रहा है। इसमें भी छोटे शहरों में हालात ज्यादा बदतर हुए हैं। उत्तरी हरियाणा के छोटे से शहर फतेहाबाद में 2019 की तुलना में 2020 में पीएम 2.5 का स्तर 35 फीसदी ज्यादा रहा है। दोआब में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद बठिंडा में 14 फीसदी, आगरा में 9 फीसदी व खन्ना में सात फीसदी व मंडी गोविंदगढ़ में छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। <div id="taboola-mid-article-thumbnails-1" class="for_premium_user_remove mt-10"></div> <div class="ad-dt"></div> <br> दूसरी तरफ हरियाणा के सिरसा शहर में 2019 की तुलना में 2020 में पीएम 2.5 में सबसे ज्यादा 44 फीसदी की कमी आई है। इसके बाद वाराणसी में 31 फीसदी, गया में 27 फीसदी, मुजफ्फरपुर में 15 फीसदी, दिल्ली में 13 फीसदी की कमी रिकार्ड की गई। इसके अलावा दूसरे शहरों में 4-12 फीसदी के बीच पीएम 2.5 का स्तर कम हुआ है। <br> दिलचस्प यह है कि रिपोर्ट में सबसे खराब और सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले फतेहाबाद और सिरसा पड़ोसी शहर हैं। इनके बीच महज 40 किमी की दूरी है। इस बारे में सीएसई के अविकल सोमवंशी का कहना है कि इसके लिए सिर्फ मौसमी दशाओं और स्थानीय कारकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। इसके पीछे की बड़ी वजह पराली का धुआं है। हिसार, जींद व दिल्ली जैसे शहरों में भी इसका असर दिखा है। <br> ------ <br> ठंड में पीएम 2.5 का स्तर तेजी से बढ़ा <br> रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी व बारिश में पीएम 2.5 का औसत नीचे था, जबकि ठंड में तेजी से बढ़ा है। अक्तूबर से बढ़ोतरी देखी गई। अध्ययन में शामिल शहरों में साफ सुथरी वाले सप्ताह की संख्या में बड़ा फर्क देखा गया है। दोआब के उत्तरी व पूर्वी हिस्से शहरों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग है। पीएम 2.5 का औसत नवंबर महीने से सबसे ज्यादा रहा। नवंबर 2019 की तुलना में नवंबर 2020 में फतेहाबाद में इसका स्तर 310 फीसदी, आगरा में 104 व कैथल में 57 फीसदी ज्यादा था। सिरसा को छोड़कर पूरे हरियाणा और पंजाब की हवा सबसे खराब रही। इस बीच सिरसा की हवा 16 फीसदी साफ थी। दूसरी तरफ दो सालों के नवंबर में यूपी व बिहार के शहरों की हवा 4-48 फीसदी बीच बेहतर रही। जबकि बठिंडा, मंडी गोविंदगढ़, पटियाला और फतेहाबाद को छोड़कर अगस्त में पूरा दोआब 2019 की तुलना में 2020 में साफ रहा। सीपीसीबी के आंकड़े का सीएसई ने किया इस्तेमाल <br> सीएसई ने सीपीसीबी के मॉनिटरिंग स्टेशन से जारी होने वाले रीयल टाइम आंकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इसमें सिंधु-गंगा मैदान के 26 शहरों को शामिल किया गया था। आगरा, कानपुर, मुरादाबाद, वाराणसी, लखनऊ, पटना, गया, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला जैसे शहर शामिल थे। <br> रिपोर्ट पर सीएसई की अनुमिता राय चौधरी का कहना है कि हवा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए सिंधु- गंगा दोआब के सभी शहरों में तेजी से काम करना होगा। इसके लिए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। वहीं, पावर प्लांट के मानकों को लागू करने के साथ कोयले व डर्टी फ्यूल से चलन वाली फैक्ट्रियों का उत्सर्जन नियंत्रित करने की जरूरी है। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मजूबत करनी होगी। वहीं, जीरो वेस्ट व जीरो लैंडफिल रणनीति पर भी काम करना पड़ेेगा।
