देश पर भारी पड़ रहा प्लास्टिक कचरा: रोजाना निकलता है 19 हजार टन प्लास्टिक, नगर निगमों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
दूध का पैकेट, चिप्स का रैपर या ऑनलाइन डिलीवरी का बॉक्स- इस्तेमाल के तुरंत बाद कचरे में बदल जाने वाली इस प्लास्टिक पैकेजिंग का असल आर्थिक बोझ देश की नगरपालिकाएं, करदाता और अनौपचारिक क्षेत्र के सफाई कर्मचारी उठा रहे हैं। पर्यावरण शोध संस्था ''सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट'' (सीएसई) की नई रिपोर्ट 'पॉलिसी, प्रैक्टिस, एंड प्लास्टिक : कॉस्ट ऑफ मैनेजिंग प्लास्टिक वेस्ट इन इंडियन सिटीज' में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके मुताबिक भारतीय शहरों को प्लास्टिक कचरा साफ करने में बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है, जबकि प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियां इसका बहुत छोटा सा हिस्सा ही चुकाती हैं।
