बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बिना अधूरा है समाधानः एक्सपर्ट्स
एक्सपर्ट के अनुसार उम्र पूरी कर चुकी गाड़ियों की जो संख्या बताई जा रही है, उस पर संदेह है। इसलिए इस कदम का प्रदूषण पर कुछ व्यापक असर पड़ेगा, ऐसा नहीं लग रहा है। CSE ( सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ) की डीजी सुनीता नारायण के अनुसार सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि नियमों के बावजूद यह गाड़ियां अभी तक चल कैसे रही हैं? दूसरा पहले दिन कम गाड़ियां पकड़ी गई है। ऐसा लग नहीं रहा है कि इतनी अधिक गाड़ियां अपनी उम्र पूरी करने के बाद सड़कों पर चल रही है। दूसरा यह कि यह गाड़ियां अगर चल भी रही है तो इनका इस्तेमाल कौन कर रहा है? क्या उनके पास यह विकल्प है कि वह नई गाड़ियां खरीद सकें ? क्या राजधानी के पास इन लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट देने का विकल्प है? उम्र पूरी कर चुकी गाड़ियों का प्रयोग कम कर रहे लोग एनवायरोकैटलिस्ट (Envirocatalyst) के फाउंडर और लीड एनालिस्ट सुनील दहिया ने कहा कि सीएनजी के समय भी पुरानी गाड़ियों को किट लगाने की छूट दी गई। लेकिन उसका इतना लाभ नहीं मिला। इस समय भी इस दायरे में आने वाली गाड़ियों की संख्या उतनी नहीं है जितना अनुमान लगाया जा रहा है। इसलिए इससे प्रदूषण पर खास असर नहीं पड़ेगा। इंटरनैशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट ने बताया कि उम्र पूरी कर चुकी गाड़ियों का इस्तेमाल लोग काफी कम कर रहे हैं। ज्यादातर गाड़ियां एक ही जगह पर पार्क है।
