Delhi: यमुना सफाई योजना को फिर से शुरू करने की जरूरत, सिर्फ धन से नहीं होगा काम
: पांच वर्षों में 6,800 करोड़ पये से अधिक खर्च करने और अपने सीवेज इंफ्रास्ट्रर का विस्तार करने के बावजूद, दिल्ली यमुना के उस हिस्से को पुनर्जीवित करने में विफल रही है, जो जैविक प से मृत है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की नई रिपोर्ट, यमुना: द एजेंडा फॉर क्लीनिंग द रिवर, शहर की नदी-सफाई रणनीति में बुनियादी बदलाव की मांग करती है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विस्तार से लेकर बेहतर शासन और योजना बनाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में निवेश और भाव के बीच एक परेशान करने वाले अंतर को उजागर किया गया है। दिल्ली में 37 सीवेज ट्री टमेंट प्लांट (एसटीपी) हैं, जो कथित तौर पर इसके 84% अपशि जल को कवर करते हैं, और लगभग 80% घर सीवर सिम से जुड़े हैं। फिर भी, दिल्ली में नदी का 22 किलोमीटर लंबा हिस्सा पुनर्जीवित होने का कोई संकेत नहीं देता है। सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि यास भले ही अच्छे इरादे से किए गए हों, हों लेकिन वे परिणाम नहीं दे पाए हैं। उन्होंनेन्हों नेकहा, "मृत यमुना न केवल नागरिक विफलता है, बल्कि दिल्ली और उसके आस-पास के शहरों के लिए जल सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।" उन्होंनेन्हों नेएक नए ष्टिकोण की मांग की, जो पैसे से परे हो और अधिक भावी नियोजन को अपनाए। रिपोर्ट में तीन महपूर्ण कमियों की पहचान की गई है। सबसे पहले, पुरानी जनसंख्या के आंकड़ों और अनौपचारिक जल उपयोग के कारण दिल्ली में अपशि जल उत्पादन पर विसनीय डेटा का अभाव है।
