कचरा का प्रभावी निस्तारण हो, खुले में कचरा जलाने पर लगे जुर्माना
गोरखपुर में तीन दिवसीय कार्यशाला में कचरा जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगाने और कचरा प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने छात्रों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करने... 2027 तक महानगर को कचरा जलाने से मुक्त महानगर बनाना महत्वपूर्ण पर्यावरणीय लक्ष्य है, जिससे प्रदूषण को कम कर स्वच्छता को बढ़ावा दिया जा सकता है। लेकिन लक्ष्य प्राप्ति के लिए जरूरी है कि कचरा प्रबंधन तत्परता से किया जाए। यह विचार राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय,‘ठोस अपशिष्ट को खुले में जलाना: प्रभाव, वैकल्पिक समाधान और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन कार्यशाला के दूसरे दिन स्थानीय पार्षदों, हित धारकों एवं विशेषज्ञों से चर्चा में उभर कर सामने आया। इस बात पर भी जोर दिया गया कि कचरा जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगे। नगर निगम का निगरानी तंत्र नियमित रूप से निरीक्षण और कार्रवाई करे। कार्यशाला में यह भी सुझाव आया कि छात्रों को कचरा प्रबंधन और प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाए। सोशल मीडिया और विज्ञापन के जरिए नागरिकों को सही कचरा प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराया जाए। कार्यशाला में स्थानीय पार्षदों के साथ डब्ल्यूआरआई के निदेशक श्रीकुमार कुमारास्वामी, अतिन विश्वास (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट, सीएसई), डॉ. रविंद्र खैवाल (पीजीआई, चंडीगढ़), अमोघ भोंगले (संस्था स्वच्छ, पुणे), अनिल रामकृष्ण (हसिरु डाला इनोवेशन, बैंगलोर), डॉ. ब्रिजेश दुबे (आईआईटी खड़गपुर), डॉ. राजीव खुराना (लंग केयर फाउंडेशन), डॉ अनिता अग्रवाल (संरक्षिका हेरिटेज फाउंडेशन) उपस्थित रहे। कार्यशाला के दूसरे दिन नगर आयुक्त ने प्रस्तुतिकरण भी दिया। मुख्यमंत्री योगी आज कार्यशाला को संबोधित करेंगे गुरुवार की सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में कार्यशाला का समापन होगा। मुख्यमंत्री कार्यशाला में शामिल विषय विशेषज्ञ के अनुभव सुनेंगे। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम मद में मिली धनराशि से महानगर में संचालित प्रोजेक्ट की बुकलेट का विमोचन करेंगे। उसके बाद कार्यशाला को संबोधित करेंगे।
