दिल्ली के 3 करोड़ लोगों के लिए बुरी खबर... सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की ये रिपोर्ट जरूर पढ़नी चाहिए
दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए एक बुरी खबर है. सेंटर फॉर साइंस और एनवायर्मेंट (CSE) ने एक स्टडी की है, जिससे यहां रहने वाली करीब तीन करोड़ लोगों की सेहत पर आने वाले दिनों ने खतरा पैदा हो सकता है. CSE के विश्लेषण के अनुसार इस साल गर्मियों के दौरान भारत के 10 मेट्रो शहरों ग्राउंड-लेवल ओजोन (एक तरह की खतरनाक गैस) की मात्रा बढ़ गई, जिसमें दिल्ली सबसे प्रभावित शहर था. इस अध्ययन की अवधि के दौरान, दिल्ली-एनसीआर ने 176 दिन ओजोन मानक को पार करने का रिकॉर्ड बनाया, जबकि मुंबई और पुणे में यह आंकड़ा 138 दिन का रहा. दिल्ली-एनसीआर की समस्या CSE के अनुसार गर्मियों में दिल्ली-एनसीआर में ओजोन मानक अक्सर हर दिन पार हो जाता है. इस साल दिल्ली-एनसीआर के मुख्य क्षेत्रों में 17.6 स्टेशनों पर मानक से अधिक ओजोन पाया गया, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है. पिछले गर्मियों में औसतन 9.4 स्टेशनों पर मानक पार होता था, जबकि 2020 की गर्मियों में यह संख्या 14.6 थी. रात के समय भी बढ़ी ओजोन की मात्रा रात के समय ओजोन की मात्रा सामान्यतः नगण्य होनी चाहिए, लेकिन इस साल 10 मेट्रो में रात के समय भी ओजोन की उच्च मात्रा देखने को मिली. अध्ययन ने रात 10 बजे से 2 बजे तक किसी भी स्टेशन पर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक ओजोन को अधिक माना. मुंबई में सबसे अधिक रात के समय ओजोन की घटनाएं दर्ज की गईं. मुंबई में 171 रातों में, दिल्ली-एनसीआर में 161 रातें और पुणे में 131 रातों में ओजोन बढ़ा मिला. स्वास्थ्य पर प्रभाव ग्राउंड-लेवल ओजोन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील गैस है, जिसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं. इससे सांस की समस्या, अस्थमा और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) हो सकता है. छोटे बच्चे जिनकी फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हैं और बुजुर्गों को गंभीर जोखिम हो सकता है. अस्थमा, एम्फीजीमा और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस को बढ़ा सकती है और अस्थमा के हमले बढ़ा सकती है. इस साल दिल्ली-एनसीआर में ओजोन का विस्तार और अवधि दोनों ही बढ़ गए हैं. गर्मियों में, जिन स्टेशनों पर मानक पार हुआ, वहां ओजोन की उच्च मात्रा औसतन 13.9 घंटे तक रही, जो 2020 की महामारी की गर्मियों के बाद सबसे अधिक है. हरित और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी प्रभाव मेट्रो क्षेत्रों के ऊंचाई वाले और हरित इलाकों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ा. स्टडी में कहा गया है कि यह विज्ञान के साथ संगत है कि ओजोन उन क्षेत्रों में जमा होता है जहां गैसीय प्रदूषकों की मात्रा कम होती है. इसलिए अपेक्षाकृत साफ क्षेत्रों, जिसमें शहरी बाहरी इलाके भी शामिल हैं, में ओजोन की मात्रा अधिक हो सकती है. 2020 की ग्लोबल एयर रिपोर्ट के अनुसार, ग्राउंड-लेवल ओजोन के कारण भारत में सबसे अधिक लोगों की मौत होती. CSE ने सुझाव दिया है कि देश को एक मजबूत सार्वजनिक सूचना और प्रसार प्रणाली विकसित करनी चाहिए ताकि जहां भी ओज़ोन का जमाव हो, वहां जनता को सतर्क किया जा सके.द
