मानव विकास सूचकांक: 134वें पायदान पर भारत, जीवन प्रत्याशा में गिरावट
संयुक्त रा ष्ट्र द्वा रा जा री नवी नतम मा नव वि का स सूचकां क (ह्यूम ह्यू न डेवलपमेंट इंडेक्स) में भा रत को 193 देशों की सूची में 134वें पा यदा न पर रखा गया है। सूचकां क वर्ष 2022 के आंकड़ों पर आधा रि त है। इस सूचकां क में भा रत को कुल 0.644 अंक दि ए गए हैं। जो भा रत को मध्यम मा नव वि का स वा ले देशों की श्रेणी में रखता है। वहीं दूस दू री तरफ स्वि टजरलैंड को इस इंडेक्स में 0.967 अंकों के सा थ पहले स्था न पर रखा गया है। इससे पहले 2022 में जा री मा नव वि का स सूचकां क में भा रत को 0.633 अंकों के सा थ 132वें पा यदा न पर जगह दी गई थी । मतलब की इस बा र भा रत दो पा यदा न नी चे आ गया है। वहीं यदि अंकों के लि हा ज से देखें तो भा रत के स्को र में 2021 के मुका बले 0.011 अंकों का सुधा र आया है। 2022 में,मेंभा रत का लैंगि क असमा नता सूचकां क (जी आईआई) 0.437 रहा , इस इंडेक्स में भा रत ने प्रगति दर्ज की है। यदि वैश्वि क औसत 0.462 और दक्षि ण एशि या ई औसत 0.478 से तुलना करें तो भा रत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। बता दें कि इस इंडेक्स का कम मा न इस बा त का सूचक है कि महि ला ओं और पुरुषों के बी च असमा नता कम है। वहीं यदि 2019 की तुलना में देखें तो भा रत ने मा नव वि का स में उल्लेखनी य प्रगति दर्ज की है। जहां 1990 के बा द से देश में जन्म के समय जी वन प्रत्या शा में 9.1 वर्षों का इजा फा हुआ है। इसी तरह स्कूली शि क्षा के अपेक्षि त वर्षों में 4.6 वर्ष की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं इस दौ रा न स्कूली शि क्षा के औसत वर्षों में भी 3.8 वर्ष की वृद्धि दर्ज की गई है। गौ रतलब है कि इससे पहले 2019 के लि ए जा री मा नव वि का स सूचकां क (ह्यूम ह्यू न डेवलपमेंट इंडेक्स) में भा रत को 189 देशों की लि स्ट में 131वें स्था न पर रखा गया था । वहीं पि छले वर्ष भा रत इस लि स्ट में 130वें पा यदा न पर था । कहीं न कहीं यह इस बा त को भी दर्शा ता है कि भा रत इस लि स्ट में लगा ता र नी चे आ रहा है। यह मा नव वि का स सूचकां क, मा नव वि का स के ती न प्रमुख आया मों स्वस्थ लंबा जी वन, शि क्षा तक पहुंच और जी वन गुणवत्ता को मा पता है। इनकी गणना चा र प्रमुख संकेतकों जी वन प्रत्या शा , औसत स्कूली शि क्षा ,स्कूली शि क्षा के अपेक्षि त वर्ष और प्रति व्यक्ति सकल रा ष्ट्री य आय पर आधा रि त है। 2019 की तुलना में जी वन प्रत्या शा में आई गि रा वट आंकड़ों के अनुसा र जहां वैश्वि क स्तर पर 2022 में जन्म के समय जी वन प्रत्या शा 67.7 वर्ष दर्ज की गई थी । वहीं 2019 में यह आंकड़ा 70.9 वर्ष जबकि 2021 में 67.2 वर्ष दर्ज की गई थी । ऐसे में यदि 2019 से तुलना करें तो देश में औसत जी वन प्रत्या शा में 3.2 वर्षों की गि रा वट आई है। देखा जा ए तो जी वन प्रत्या शा के मा मले में जो रुझा न वैश्वि क स्तर पर सा मने आए थे उन्हें भा रत से जुड़े आंकड़ों में भी स्पष्ट तौ र पर देखा जा सकता है। इसके लि ए कहीं न कहीं को रो ना जि म्मेवा र था , जि सने देश में जी वन प्रत्या शा पर गहरा आघा त कि या है। आंकड़ों के मुता बि क देश में शि क्षा प्रा प्ति के औसत वर्षों को देखें तो वो 2022 में 6.57 वर्ष दर्ज की गई थी । बता दें कि 2021 में यह आंकड़ा 6.7 वर्ष दर्ज कि या गया था । हा लां कि देश में स्कूली शि क्षा के अपेक्षि त वर्षों में इजा फा दर्ज कि या गया है जो 2021 में 11.9 वर्ष से बढक़र 2022 में 12.6 वर्षों पर पहुंच गया । इसी तरह देश में प्रति व्यक्ति सकल रा ष्ट्री य आय से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वो 6,951 डॉ लर दर्ज की गई है। वहीं 2021 में यह 6,590 डॉ लर दर्ज की गई थी । मतलब की इसमें पि छले वर्ष की तुलना में इजा फा दर्ज कि या गया है। आंकड़ों के मुता बि क यदि 1990 से 2022 के बी च, भा रत के मा नव वि का स सूचकां क के मूल्यों को देखें तो वो 0.434 से बढक़र 0.644 पर पहुंच गया है। मतलब की इन ती न दशकों में इसमें 48.4 फी सदी का बदला व आया है। समृद्ध और वंचि त समुदा यों के बी च बढ़ रही असमा नता की खा ई इस बा रे में संयुक्त रा ष्ट्र वि का स का र्यक्रम (यूनी डी पी ) ने जो नई रि पो र्ट ‘ब्रेकिं ग द ग्रि डलॉ क’ जा री की है, उसके मुता बि क यह सही है कि जहां 2020, 2021 में को रो ना महा मा री के का रण मा नव वि का स की रा ह में बड़ी गि रा वट दर्ज की गई थी , लेकि न अब 2023 में गा ड़ी दो बा रा पटरी पर लौ ट रही है। यही वजह है कि वैश्वि क स्तर पर मा नव वि का स अपने रि कॉ र्ड स्तर पर पहुंच गया है, लेकि न सा थ ही समृद्ध और वंचि त समुदा यों के बी च असमा नता की खा ई और गहरी हुई है। एक तरफ जहां समृद्ध देशों में अभूतपूर्व वि का स हुआ है, वहीं दुनि दु निया के सबसे कमजो र देशों में से करी ब आधे देश, वि का स की रा ह में को वि ड संकट से पहले के स्तर से भी नी चे चले गए हैं। बता दें कि 2020 या 2021 में अपने मा नव वि का स सूचकां क में गि रा वट दर्ज करने वा ले 35 सबसे कमजो र देशों में से 18 अभी 2019 के स्तर पर नहीं लौ ट पा ए हैं। रि पो र्ट के अनुसा र वि का स की रा ह में मौ जूद इस वि षमता के चलते सबसे कमजो र देश पी छे छूट रहे हैं। इससे असमा नता एं बढ़ रही हैं और रा जनैति क ध्रुवी करण को बढ़ा वा मि ल रहा है। रि पो र्ट के मुता बि क एक तरफ जहां स्वि टजरलैंड , नॉ र्वे और आइसलैंड जैसे देश रा ष्ट्री य स्तर पर मा नव वि का स सूचकों में सबसे आगे हैं। वहीं सेंट्रल अफ्री कन रि पब्लि क, दक्षि ण सूडा न, सो मा लि या , ना इजर, चा ड, मा ली , बुरुंडी , यमन, बुर्कि ना फा सो जैसे देश अभी भी बेहद पी छे हैं। कुल मि लकर देखें तो अफ्री की देशों में स्थि ति सबसे ज्या दा खरा ब है। वहीं यदि ओईसी डी के सभी 38 देशों की बा त करें तो इन सभी ने 2023 में 2019 की तुलना में मा नव वि का स सूचकां क में बेहतर प्रदर्शन कि या है। मा नव वि का स को सबसे अधि क हा नि अफगा नि स्तान व यूक्रेन में हुई है। अफगा नि स्ता न में ह्यूम ह्यू न डेवलपमेंट इंडेक्स 10 वर्ष पहले के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि यूक्रेन में यह 2004 के बा द से अपने सबसे नि चले स्तर पर है। वहीं सभी वि का सशी ल क्षेत्र 2019 से पहले के मा नव वि का स सूचकां क के रुझा नों के अनुसा र अपनी सम्भा वना ओं को पूरा नहीं कर पा ए हैं, और भवि ष्य में भी उनकी वि का स प्रक्रि या को झटका लगने का खतरा है। रि पो र्ट की मा नें तो इसके लि ए को वि ड-19, यूक्रेन में जा री युद्ध और जलवा यु परि वर्तन और पर्या वरण से जुड़े का रक जि म्मेवा र हैं। इन सबने मि लकर लो गों के जी वन पर व्या पक असर डा ला है, रा जनैति क, वि त्ती य और जलवा यु से जुड़े संकटों ने को रो ना की मा र झेल रही आबा दी को संभलने का मौ का ही नहीं दि या । (डाऊन टू अर्थ)
