भारत ही नहीं, दुनिया के 65 देशों में किसान कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन
किरन पाण्डेय ‘डाउन टू अर्थ’ से साभार किसानों के विरोध के स्वर सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया से उठे हैं। जनवरी 2023 से देखें तो दक्षिण अमेरिका के 67 फीसदी देशों में किसानों ने कई वजहों से विरोध प्रदर्शन किए। इनमें बेहतर निर्यात विनिमय दरों से लेकर करों में कमी करने की मांगें तक शामिल रही। गौरतलब है कि यह मांग उस समय उठी है जब अर्थव्यवस्था जूझ रही थी और अर्जेंटीना में भीषण सूखा पड़ा था। इस सूखे से फसलों को नुकसान पहुंचा और किसानों के लिए हालात बद से बदतर हो गए थे। वहीं ब्राजील में, किसानों ने इसलिए विरोध किया क्योंकि उन्हें लगा कि आनुवंशिक रूप से संशोधित मक्का कृषि बाजारों में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहा है। वेनेजुएला में, किसानों ने सस्ते डीजल को लेकर अपनी मांग सरकार के सामने रखी। कोलम्बिया में, धान किसानों ने अपनी फसल की अच्छी कीमतों को लेकर प्रदर्शन किए थे। इस दौरान यूरोप के करीब 47 फीसदी देशों में किसान प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं। इनके पीछे फसल की उचित कीमतों का न मिलना, बढ़ती लागतें, कम लागत वाले आयात और यूरोपियन यूनियन द्वारा जारी पर्यावरण नियम जैसे कारण जिम्मेवार रहे। उदाहरण के लिए, फ्रांस के किसानों ने सड़कों पर उतरकर कम लागत वाले आयात, सब्सिडी की कमी और उत्पादन की भारी लागत को लेकर विरोध प्रदर्शन किए। ऐसा ही कुछ उत्तर और मध्य अमेरिकी देशों में भी देखने को मिला, जहां 35 फीसदी देशों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। जहां मेक्सिको में, किसान अपने मक्के और गेहूं की कम कीमतों को लेकर नाखुश थे। वहीं कोस्टा रिका में, उन्होंने सरकार से मदद की मांग की है क्योंकि उनका आरोप है कि उद्योग कर्ज से जूझ रहा है।
