जलवा यु परिवर्तन के कुप्रभावों से बचने के लिये आर्द्रभूमि को बचा ना जरूरी : ना रा यण
सेंटर फॉ र साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की महा नि देशक सुनी ता ना रा यण ने कहा है कि जलवा यु परि वर्तन के कुप्रभा वों से बचने के लि ये आर्द्रभूमि को बचाने की जरूरत है और ता ला बों तथा झी लों को नहीं बचाया गया , तो आने वा ले समय में लो गों को इसके परि णा म भुगतने पड़ेंगे। श्रीमती ना रा यण ने यहां वि श्व आर्द्रभूमि दि वस के मौ के पर वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशि या द्वारा आयो जि त का र्यक्रम में कहा कि स्थि ति भया वह है और इसको लेकर लो गों को जा गरूक हो ने की जरूरत है। उन्हों नेन्हों नेवेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशि या की पहल की प्रशंसा करते हुये कहा कि आर्द्रभूमि के संरक्षण को लेकर इस तरह के का र्यक्रमों का बड़े पैमा ने पर आयो जि त करने की जरूरत है। उन्हों नेन्हों नेबता या कि पि छले दो-ती न सालों में स्थि ति थोड़ी सुधरी है, लेकि न अभी भी चिं ता जनक है। उन्हों नेन्हों नेकहा कि ता ला बों को नहीं बचायेंगे, तो परि णा म बहुत बुरे हों गेहों गे। उन्हों नेन्हों नेकहा कि पहले हम करते थे कि जल संरक्षण के लि ये ता ला ब जरूरी है, लेकि न अब हम करते हैं कि ता ला बों की क्या जरूरत है। उन्हों नेन्हों नेकहा कि ता ला बों तथा झी लों की जरूरत है क्योंकिक्योंकि यदि हम जल संरक्षण नहीं करेंगे, ता ला बों और झी लों को नहीं बचाएंगे, तो एक ओर बा ढ़ आयेगी और दूसरी ओर सूखा पड़ेगा । उन्हों नेन्हों नेबता या कि पि छले दि नों हम सभी ने देखा था कि बा रि श के का रण रा ष्ट्री य रा जधा नी दि ल्ली की क्या स्थि ति हो गयी थी। गौ रतलब है कि वि श्व वेटलैंड्स दि वस 2024 का वि षय ‘वेटलैंड्स और मा नव कल्या ण’ है। इस अवसर पर वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशि या के अध्यक्ष डॉ सि द्धा र्थ कौ ल ने वि श्व वेटलैंड्स दि वस 2024 की थीम पेश की और संगठन की ओर से पि छले 26 वर्षों में आर्द्रभूमि क के संरक्षण नि रंतर प्रया सों पर प्रका श डाला । उन्हों नेन्हों नेबता या कि वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशि या पा रि स्थि ति क संतुलन और मा नव समृद्धि के लि ये आर्द्रभूमि संरक्षण के महत्व पर जो र देने की खा ति र वि शेषज्ञों ,ज्ञों पर्या वरणवि दों और जनता के मा ध्यम से जा गरूकता नि र्मा ण के लि ये कुछ स्वस्थ चर्चाओं के लि ये एक मंच के रूप में का र्य करता है। इस अवसर पर वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशि या के नि देशक डॉ रि तेश कुमा र ने मेहमा नों का स्वा गत कि या । का र्यक्रम में दो ज्ञा न और आउटरी च सामग्री जा री की गयी । श्री कुमा र ने कहा कि ‘ला इफ इंटरलेस्ड, वेटलैंड्स एंड पी पल’ थीम वा ला एक पो स्टर, वेटलैंड्स और मा नव कल्या ण के बी च अंतर्संबंध के महत्व पर प्रका श डालता है और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जो र देता है। वहीं ,हीं दूसरा प्रका शन वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशि या के न्यूज़लेटर 'सरो वर' का नौ वां संस्करण था, जि सका वि षय 'वेटलैंड्स की पा रि स्थि ति क बहा ली ' था। का र्यक्रम में 'वेटलैंड्स: प्रकृति -आधा रि त समा धा न' पर एक पैनल चर्चा भी आयो जि त की गयी , जि समें वि शेषज्ञों ने पर्या वरणी य चुनौ ति यों से नि पटने में वेटलैंड्स की परि वर्तनका री क्षमता का पता लगा या । उल्लेखनी य है कि वेटलैंड्स कन्वेंशन को रा मसर कन्वेंशन कहा जा ता है। रा मसर सम्मेलन 1971 में संयुक्त रा ष्ट्र शैक्षि क, वैज्ञा नि क एवं सांस्कृति क संगठन (यूनेस्को) द्वारा स्थापि त एक अंतररा ष्ट्री य आर्द्रभूमि संधि है। यह सम्मेलन 1975 में का र्रवा ई में आया । रा मसर ईरा न में स्थि त वह स्थान है, जहाँ 1971 में अंतररा ष्ट्री य आर्द्रभूमि संधि पर हस्ताक्षर कि ये गये थे। संतो ष.श्रव
