भयानक गर्मी और कंपकंपाने वाली ठंड, पर्यावरण में बदलाव कैसे बन रहा है जिंदगी के लिए मुसीबत
डीएनए हिंदी: COP28 Summit Dubai Updates- पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचाते हुए, औद्योगिक विकास की राह पर आगे बढ़ना ही, पूरे विश्व की समस्या है. औद्योगिक विकास की कीमत, पृथ्वी के जलवायु को चुकानी पड़ रही है, जिसका बुरा असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे महसूस होती है, लेकिन घातक असर दिखा रही है. आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 2022 में हमारी पृथ्वी के औसत तापमान में 1.4 डिग्री सेल्सियम की बढ़ोतरी हुई है यानी ये ज्यादा गर्म हुई है. तापमान में बढ़ोतरी की ये संख्या छोटी है, लेकिन इसका भयानक असर, लगभग हर देश पर पड़ा है. हालात ये है बहुत से देश मौसम का चरम रूप देख रहे हैं. गर्मियों के मौसम में भयानक गर्मी और सर्दियों में भयानक ठंड का सामना करना पड़ रहा है. बारिश भी, कई देशों में समस्या पैदा कर रही है. इस तरह के हालात पर चर्चा करना जरूरी है. इसीलिए हर साल संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में COP या Conference Of Parties की बैठक होती है. United Nation में शामिल लगभग सभी देश इसका हिस्सा हैं. जलवायु परिवर्तन पर चर्चा के लिए होने वाली COP की 28वीं बैठक यानी COP 28 इस वर्ष UAE में चल रही हैं, जिसमें इस बार 160 देश शामिल हुए हैं. Center for Science and Environment यानि CSE ने एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट का नाम है India 2023 An Assessment of Extreme Weather Events'. CSE की इस रिपोर्ट में जनवरी से लेकर सितंबर तक के मौसम में आए बदलावों और आपदाओं की डिटेल्स हैं. इस तरह की घटनाओं को Extreme Weather Events भी कहा जाता है. रिपोर्ट में इस वर्ष यानि 2023 के शुरूआती 9 महीनों में आई प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र है. रिपोर्ट कहती है कि भारत में पिछले 9 महीने में लगभग हर दिन प्राकृतिक आपदाएं आई हैं या खराब मौसम देखा गया. 9 महीने में मौसम में आए बदलावों और आपदाओं की वजह से 2,923 लोगों की जान गई. 1.84 लाख हेक्टेयर की फसल खराब हो गई. 80 हजार से ज्यादा घर गिर गए. 92 हजार से ज्यादा मवेशियों और जानवरों की मौत हो गई. सोचिए, सिर्फ 9 महीने में हमारे देश में आई प्राकृतिक आपदाओं में करीब 2 हजार 923 लोगों की मौत हुई है. ये कोई छोटा आंकड़ा नहीं है. इंसान ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है अब प्रकृति उसी का बदला ले रही है. CSE की ये रिपोर्ट हम सबके लिए एक खतरे के अलार्म की तरह है. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है जलवायु परिवर्तन.
