कड़ी मेहनत से काम पर लगी है MCD, लेकिन G20 समिट से पहले कूड़े के पहाड़ों का साफ होना संभव नहीं दिखता
एमसीडी का लक्ष्य ओखला और भलस्वा स्थित लैंडफिल साइट्स को दिसंबर 2023 तक और गाजीपुर वाले लैंडफिल साइट को मार्च 2024 तक समतल कर देने का है. जी-20 सम्मलेन के चलते ओखला वाले काम को सितंबर 2032 तक खत्म करने की मांग की का रही है, मगर विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए तो 5 साल भी पर्याप्त नहीं हैं. नई दिल्ली: अगर आप अपनी नाक बंद कर लें, तो दिल्ली के तीन लैंडफिल साइट (कूड़ा जमा करने वाले स्थान) – गाजीपुर, ओखला और भलस्वा – कुछ-कुछ लहरदार पहाड़ियों की तरह ही दिखते हैं. पर अब इस बात की उम्मीदें काफी हद तक बढ़ गईं हैं कि इन आंखों में चुभने वाले कूड़े के पहाड़ों का जल्द ही अंत हो जायेगा. दिल्ली नगर निगम (म्युनिसिपल कोर्पोरशन ऑफ़ दिल्ली-एमसीडी) ने इन लैंडफिल साइट्स को समतल करने के लिए पिछले साल ही काम शुरू कर दिया था, और जी- 20 शिखर सम्मेलन के चलते ओखला वाले काम को सितंबर 2023 तक पूरा किये जाने की मांग की जा रही है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित समय सीमा में से कोई भी वास्तविक नहीं है. इन तीनों लैंडफिल साइटों को समतल करने के लिए एमसीडी द्वारा निर्धारित अंतिम समय सीमा ओखला (46 एकड़) और भलस्वा (36 एकड़) के मामले में दिसंबर 2023, और गाजीपुर (70 एकड़) के लिए मार्च 2024 है. ये लैंडफिल क्रमशः 2010, 2003 और 2002 में अपनी क्षमता से परे चले गए थे. इन तीनों में लाखों टन का ‘लीगेसी वेस्ट या पुराना कचरा’ जमा है, लेकिन फिर भी वे नया कचरा इकठ्ठा करने की जगह भी बने हुए हैं. जी- 20 शिखर सम्मलेन के नजदीक आने के साथ ही दिल्ली के उप-राज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) के सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि सम्बंधित प्राधिकरणों को इस समारोह के शुरू होने से पहले ही ओखला लैंडफिल साईट वाले काम को पूरा करने के लिए कहा गया है. दिल्ली भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने तो पिछले साल दिसंबर में यहां तक दावा किया था कि नगर निगम ने घोषणा कर रखी है कि जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले ओखला लैंडफिल साइट को साफ कर दिया जाएगा. उधर, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 ने साल 2026 तक सभी लेगेसी डंपसाइटों (पहले से भारी मात्रा में कूड़ा जमा किये गए स्थानों) को दुरुस्त करने के लिए एक अलग समय सीमा भी जारी की हुई है. हालांकि, गैर-लाभकारी शोध संगठन ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)’ के विशेषज्ञों ने दिप्रिंट को बताया कि इनमें से किसी भी समय सीमा को तब तक पूरा नहीं किया जा सकता, जब तक कि नए सिरे से कचरे को वहां जमा (डंप) किये जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं किया जाता है और साथ ही कचरे को संसाधित करने की वर्तमान क्षमता में वृद्धि नहीं की जाती है. उन्होंने कहा कि एमसीडी को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में पांच साल लगेंगे. कूड़े के पहाड़ जो बस बढ़ते ही रहते हैं एमसीडी के पर्यावरण प्रबंधन सेवा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ एनवायरनमेंट मैनेजमेंट सर्विस- डीईएमएस) के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि नगर निकाय ने 3 नवंबर 2022 को, इन तीनों लैंडफिल साइट्स में से प्रत्येक से 30 लाख मीट्रिक टन (1 मीट्रिक टन = 1000 किलोग्राम) पुराने कचरे को संसाधित करने के लिए तीन कंपनियों को उनकी निविदा के आधार पर अनुबंध प्रदान किये थे. जब यह लक्ष्य पूरा हो जाएगा तो अतिरिक्त 15 लाख मीट्रिक टन के लिए भी यही अनुबंध फिर से नए तरह से लागू कर दिया जाएगा.
