Nightlife in Delhi: दिल्ली में नाइट लाइफ की राह आसान नहीं, क्या होंगे नाइट कल्चर के फायदे और नुकसान देखिए...
एलजी वी.के. सक्सेना ने दिल्ली की नाइटलाइफ को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए आवेदन करने वाले 300 से अधिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे अपना व्यवसाय चलाने की मंजूरी दी है। इनमें कुछ रेस्तरां, दवा की दुकानें और लॉजिस्टिक और ट्रांपोर्टेशन से जुड़े व्यवसाय शामिल हैं। पिछले साल जारी हुए राजधानी के ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2041 में भी नाइटलाइफ का यह कॉन्सेप्ट पहली बार लाया गया था। माना जा रहा है कि उसी को लागू करवाने की दिशा में एलजी ने यह पहला कदम बढ़ाया है। हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि दिल्ली में रात की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए केवल इतने भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि कुछ और मोर्चों पर भी काम करने की जरूरत पड़ेगी। खासकर रात में आने वाले कस्टमर्स और काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, उनके लिए परिवहन के साधनों का इंतजाम और सड़कों पर पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था भी करनी होगी। ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2041 को लेकर डीडीए ने कहा है कि अगले साल अप्रैल तक यह फाइनल हो जाएगा। इसमें भी राजधानी में नाइट कल्चर को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2041 में सांस्कृतिक परिसर, हैरिटेज एरिया, सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में नाइटलाइफ सर्किट बनाने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि रेस्तरां व अन्य कमर्शल गतिविधियां राजधानी में 24 घंटे जारी रह सकेंगी और दिल्ली में भी लंदन, पैरिस, न्यूयॉर्क की तरफ सड़कों पर लोग नाइट लाइफ का लुत्फ उठा सकेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेंडिंग प्रस्तावों को एलजी के द्वारा मंजूरी देना और ड्राफ्ट मास्टर प्लान में नाइट लाइफ को शामिल करना अच्छा कदम है, लेकिन इसे लागू करने की एक खास प्लानिंग करनी होगी। मसलन, नाइटलाइफ को सफल बनाने के लिए अच्छा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सबसे अधिक जरूरी है। लंदन, न्यूयॉर्क जैसे शहरों में नाइटलाइफ इसी वजह से सफल है। यहां 24 घंटे पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध रहता है। वहीं दिल्ली की बात करें, तो यहां ज्यादातर कॉरिडोर पर रात को 11 या 11.30 बजे के बाद मेट्रो सर्विस उपलब्ध नहीं हैं। बसें भी रात को आठ-नौ बजे के बाद काफी कम हो जाती हैं। ऑटो भी सीमित संख्या में चलते हैं। सीएसई (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट) की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता राय चौधरी का कहना है कि दिल्ली में नाइट लाइफ को बढ़ावा देने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर सबसे अधिक काम करने की जरूरत है। नाइटलाइफ के लिए अच्छा और भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट सबसे अहम है। जब तक पब्लिक रात में खुद को सेफ महसूस नहीं करेगी, तब तक लोग बाहर नहीं निकलेंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो नाइट लाइफ का हिस्सा सिर्फ वही लोग बन पाएंगे, जिनके पास निजी गाड़ियां होंगी। इससे नाइट इकॉनमी बढ़ाने के सपने को साकार करने में भी रुकावट पैदा होगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार, नाइटलाइफ में महिलाओं की भूमिका भी बेहद अहम है और महिलाएं तभी बाहर निकलेंगी, जब वे खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी। इसके लिए सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करने होंगे। साथ ही सड़कों पर पर्याप्त रोशनी और परिवहन के पर्याप्त और सुरक्षित साधनों की व्यवस्था भी करनी होगी। लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर भी काफी काम करना पड़ेगा। इसके अलावा नाइट लाइफ में स्ट्रीट वेंडरों को भी शामिल किया जाना बेहद जरूरी है। दिल्ली की नाइट इकॉनमी में केवल महंगी गतिविधियां ही शामिल ना हों, बल्कि समाज का हर वर्ग उसका हिस्सा बन सके, इसको ध्यान में रखकर प्लानिंग करनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि छोटे बड़े सभी तरह का व्यवसाय चलाने वालों को इसका लाभ मिल सके।
