Delhi Pollution: रावण जलने के बाद धुआं-धुआं हुई दिल्ली, दशहरे पर बढ़ा इतना प्रदूषण तो दिवाली पर क्या होगा?
नई दिल्ली बैन के बावजूद इस बार दशहरे पर इतनी आतिशबाजी हुई कि प्रदूषण स्तर जो अब तक सामान्य चल रहा था खराब स्तर पर पहुंच गया। सवाल यह है कि आखिर दशहरे पर ही यह हाल है, तो दिवाली पर क्या होगा? साथ ही यह भी कि बैन के बावजूद इतने सारे पटाखे लोगों तक कैसे पहुंच रहे हैं और इसके लिए प्रशासनिक तौर पर क्या कार्रवाई हो रही हैं? आसान नहीं पटाखों पर बैन जानकारों के अनुसार पटाखों पर बैन के बेअसर होने की बात कुछ हद तक सही है। लेकिन इसकी कई वजहें है। दरअसल, हमेशा से दिवाली और आतिशबाजी को एक दूसरे से जोड़कर देखा गया है। ऐसे में, इस बदलाव को अपनाने में लोगों को समय लगेगा। दूसरा अभी जो कोशिशें हो रही हैं, वे बहुत ही कम है। दिवाली पर पटाखों पर बैन एक से दो महीने पहले लगाया जाता है, लेकिन फैक्ट्रियों में पटाखे बनने का काम करीब सात-आठ महीने पहले शुरू हो जाता है और पांच-छह महीने पहले तो थोक पटाखा विक्रेता आर्डर दे देते हैं। फिर एक बार पटाखे दुकानों तक पहुंच गए, तो उन्हें बिकने और जलाने से रोकना मुश्किल हो जाता है। दिल्ली में रविवार को बारिश के आसार, आसमान में छाए रहेंगे बादल 'लोगों को भी शामिल करें' इस बारे में बात करने पर ग्रीन पीस के वरिष्ठ कैंपेनर अविनाश चंचल कहते हैं, 'दशहरा दिवाली पर पटाखे जलाना लोगों की मानसिकता में है। इसे बदलने में समय लगेगा। लेकिन इसके लिए सरकारों व डिपार्टमेंट को लोगों के साथ मिलकर काम करना होगा। बैन लगाते समय वे जब एजेंडा सेट करें, तो आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों के साथ भी मीटिंग लें। बड़े स्तर पर लोगों को बताया जाना चाहिए कि आखिर पटाखों पर बैन क्यों लग रहा है? कई लोग इसकी वजह धर्म से जोड़ लेते हैं। दूसरा पटाखों पर बैन लगाने के लिए उन पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है, जो नहीं दिख रही है। हालत यह है कि आपको अपने पड़ोस की दुकानों पर बेहद आसानी से पटाखे मिल जाते हैं। अगर दशहरे पर यह हाल है, तो दिवाली पर क्या होगा।' Delhi Pollution News: डस्ट पल्यूशन के लिए 72 लोगों पर लगाया गया जुर्माना 'कड़ी कार्रवाई की जरूरत' आईपीयू की यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ एनवायरमेंट मैनेजमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुमित डूकिया मानते हैं कि पटाखों पर बैन लगाने के लिए काफी सख्ती करने की जरूरत है। बकौल डूकिया, 'बैन लगाने के तुरंत बाद कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। बैन लगाने के बाद स्ट्रेटेजी बनाने का मतलब नहीं है। अब एक हफ्ते तक कोई एक्शन नहीं हुआ और विक्रेताओं व खरीददारों को काफी समय मिल गया कि वे अपने स्टॉक अपने पास रख लें। जिन्हें बेचने थे उन्होंने बेच दिए जिन्हें खरीदने थे उन्होंने खरीद लिए। वहीं लोगों का सहयोग इसके लिए जरूरी है। इसलिए जब तक लोगों से बात नहीं की जाएगी, अपने फैसलों में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक परिणाम उतने नहीं मिलेंगे जितने मिलने चाहिए।' Delhi Pollution Report: अक्टूबर के शुरुआती 12 दिनों में प्रदूषण से मिली दिल्ली को राहत, 6 साल में पहली बार अक्टूबर में प्रदूषण सबसे कम 'पहले से लगना चाहिए बैन' वहीं सीएसई की अनुमिता रॉयचौधरी के अनुसार पटाखों पर बैन सरकार और आम लोगों दोनों के सहयोग से ही कारगर हो सकता है। बकौल चौधरी, 'अभी बैन लगाने से पहले ही उसकी बातें शुरू हो जाती हैं। इस दौरान विक्रेता अधिक मुनाफे पर अपना स्टॉक निकाल देते हैं और खरीददार खरीद लेते हैं। लेकिन लोगों को यह बताने की जरूरत है कि आतिशबाजी उनके साथ उनके बच्चों की आने वाली पीढ़ी की सेहत पर असर डाल रही है। यह बात लोगों को धीरे धीरे समझ आएगी। फिर पटाखों के लाइसेंस सख्त किए जाने चाहिए। अवैध पटाखा फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्ती होनी चाहिए। यह काम पूरे साल किया जाना चाहिए। लेकिन अभी हम दिवाली से कुछ हफ्ते या महीने पहले ही जागते हैं।' दशहरे पर प्रदूषण में हुआ कितना इजाफा साल दशहरे पर दशहरे के अगले दिन 2021 198 253 2020 349 353 2019 112 173 2018 276 326 2017 198 196
