Lockdown: दिल्ली ने वर्षो बाद देखी थी इतनी बेहतर आबोहवा, बेहतरी के लिए भी दिखाई राह
नई दिल्ली, संजीव गुप्ता। लाकडाउन से आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भले जो परिणाम आए हों, लेकिन पर्यावरण के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं था। आलम यह रहा कि दिल्ली-एनसीआर सहित देशभर की जिस हवा को देश और राज्यों की सरकारें तमाम उपाय करके भी साफ नहीं कर सकीं, उसे लाकडाउन ने कर दिखाया। वायु ही नहीं, बल्कि ध्वनि और जल प्रदूषण में भी बड़े पैमाने पर सुधार देखने को मिला। इस सुधार ने भविष्य के लिए भी ऐसी राह दिखाई, जिसे विशेषज्ञों तक ने सराहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) और अन्य तमाम संगठनों की रिपोर्ट बताती है कि लाकडाउन की वजह से दिल्ली- एनसीआर का वायु प्रदूषण 75 फीसद तक कम हो गया। प्रमुख प्रदूषक तत्व पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन डाईआक्साइड, नाइट्रोजन डाईआक्साइड में 70 से 74 फीसद की कमी देखने को मिली। जल और वायु ही नहीं, लाकडाउन के दौरान ध्वनि प्रदूषण में भी कमी देखने को मिली। अस्पताल और रिहायशी कालोनियों जैसे साइलेंट जोन में तो ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण में रहता ही है, इस दौरान इसके सामान्य स्तर में भी 10 फीसद तक की कमी देखी गई। वातावरण एकदम साफ हो जाने से दूर दूर तक की चीजें साफ दिखाई देने लगीं। प्रदूषण के कारण ही दिल्ली में यमुना नदी मृतप्राय हो गई है। इस नदी का पानी खेती के लायक भी नहीं है। लाकडाउन में इस यमुना का प्रदूषण भी 33 फीसद तक कम हो गया। यमुना के प्रदूषण के दो मुख्य तत्व डीडी (डिजाल्व डिमांड) में 51, जबकि बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) में 75 फीसद तक की गिरावट आई। दशकों बाद यमुना का पानी काला नहीं बल्कि नीला नजर आया। दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में कहां कितनी कमी आई -- शहर प्रदूषण में कमी दिल्ली 75 फीसद गाजियाबाद 65 फीसद नोएडा 60 फीसद गुरुग्राम 56 फीसद ग्रेटर नोएडा 68 फीसद फरीदाबाद 58 फीसद इसमें कोई शक नहीं कि लाकडाउन के दौरान हमें प्रकृति का साक्षात्कार करने का अवसर मिला। यह भी साबित हो गया कि प्रदूषण की जड़ में इंसानी लापरवाही ही है। इसलिए अगर अब भी इंसान लाकडाउन से सबक लेते हुए भविष्य के लिए सावधानी बरते और पर्यावरण का भी खयाल रखे तो प्रदूषण को आगे भी नियंत्रण में रखा जा सकता है। (-सुनीता नारायण, महानिदेशक, सीएसई)
