चिंताजनक : महामारी से 37.5 करोड़ बच्चों की सेहत प्रभावित, 50 करोड़ बच्चों का स्कूल छूटा
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वॉयरनमेंट (सीएसई) की स्टेट ऑफ इंडडया इन्वॉयरमेंट ररपोटा के 2021 अनुसार, कोरोना महामारी के कारण देश भर में 37.5 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य और आधर्ाक हािात पर स्र्ायी असर पड़ा है। सीएसई की महाननदेशक डॉ. सुनीता नारायण ने ररपोटा जारी करते हुए बताया, नवजात से िेकर 14 वषा तक के बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी तकिीफें ज्यादा होंगी। इसमें बच्चों का कम वजन, उम्र के अनुसार, शारीररक ववकास न होना और मृत्यु दर में बढ़ोतरी की आशंका है। बच्चों की खराब सेहत के कारण मशक्षा और काया क्षेत्र में भी दुष्प्रभाव देखने को ममि सकता है। ऑनिाइन जारी की गई इस ररपोटा को दुननयाभर के सार् पयाावरण और अन्य ववशेषज्ञों ने ममिकर तैयार ककया है। बढ़ता प्रदूषण सेहत के मिए और घातक ररपोटा के अनुसार, बीमारी, कुपोषण, अत्यंत गरीबी जैसी समस्याओं से मुजचकि होगी। हवा और पानी में प्रदूषण स्तर बढ़ने का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। िॉकडाउन में भी नददयों के प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई है। सांस िेने के मिए हवा और पीने के मिए साफ पानी के मिए बहुत बड़े स्तर पर काम करना होगा। महाराष्ट् का तारापुर प्रदूवषत क्िस्टर कें द्रीय प्रदूषण ननयंत्रण बोडा के अनुसार, देश के 88 प्रमुख औद्योधगक किस्टर में से 35 में समग्र रूप से पयाावरण में धगरावट आई है। 33 स्र्ानों पर हवा की गुणवत्ता खराब, 45 स्र्ानों पर साि भर दूवषत पानी जबकक 17 स्र्ानों पर भूमम प्रदूषण अधधक र्ा। महाराष्ट् का तारापुर सबसे प्रदूवषत क्िस्टर र्ा। महामारी से 50 करोड़ बच्चों का स्कूि छूटा महामारी के कारण दुननया भर में 50 करोड़ बच्चों का स्कूि छूट गया। इसमें से 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे भारत में है। सुनीता नारायण ने कहा, महामारी के कारण अनतररक्त 115 करोड़ िोग अत्यंत गरीबी के दायरे में आ चुके हैं। इसमें से अधधकतर दक्षक्षण एमशया में रहते हैं। 192 देशों में भारत 117वें स्र्ान पर सतत ववकास िक्ष्य हामसि करने में भारत दुननया भर के 192 देशों की सूची में 117वें स्र्ान पर है। पाककस्तान को छोड़कर सभी दक्षक्षण एमशयाई देशों से पीछे हैं। सतत ववकास िक्ष्यों को पाने में 5 राज्य केरि, दहमाचि प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तममिनाडु और तेिंगाना बेहतर है। बबहार, अरुणाचि प्रदेश, मेघािय और यूपी सबसे पीछे हैं। 2025 तक स्रैपेज नीनत की जरूरत ररपोटा के अनुसार, भारत को वषा 2025 तक वाहनों के स्रैपेज के मिए नीनत की जरूरत होगी। देश में दो करोड़ वाहन ऐसे हैं जजनका जीवन अंत की ओर है। अगर सही समय पर इनका ननस्तारण नहीं ककया गया तो आने वािे समय में यह पयाावरण के मिए सबसे बड़ी चुनौती बनेंगे। भारत में वषा 2019 में 16.70 िाख िोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हुई हैं। 889 जीवों पर मंडरा रहा खतरा भारत में 430 पौधे जजसमें 95 फीसदी फूि और खाद्य पदार्ा वािे हैं। वे खात्मे की कगार पर हैं। रीढ़ और रीढ़ ववहीन 889 जीवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। पयाावरण से जुड़े आपराधधक मामिे बढ़े हैं। 2019 में 24,671 केस दजा हुए र्े जबकक 49,877 मामिे िंबबत हैं।
