DG sets are banned under the Graded Response Action Plan (Grap) implemented from October 15 to tackle air pollution from slipping to ‘very poor’ and ‘severe’ category during winter months Earlier this week, Epca chairman Bhure Lal directed the Haryana pow
दिल्ली में साल 2019 में PM10 के स्तर में 2016 की तुलना में 25% और PM2.5 में 19% की कमी दर्ज की गई थी. मगर न तो इन दो प्रमुख वायु प्रदूषकों की गिरावट की गति और न ही राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme) के तहत मौजूदा लक्ष्य 2024 तक शहर की हवा को सांस लेने योग्य बनाने के लिए पर्याप्त है. NCAP ने पार्टिकुलेट मैटर के स्तर को कम करने का लक्ष्य रखा है. एनसीएपी (NSAP) ने साल 2017 के वायू प्रदूषण (Air Pollution) के स्तर से लेकर 2024 तक – पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को 20-30% तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन अगर दिल्ली (Delhi) अपने इस लक्ष्य को पूरा कर भी लेती है, तो भी इन खतरनाक प्रदूषकों का स्तर राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों की तुलना में काफी अधिक ही होगा. सभी प्रदूषकों जैसे पीएम, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड में PM2.5 तक होता है, जो सबसे खतरनाक माना जाता है. ये सभी प्रदूषक फेफड़ों में गहराई से प्रवेश कर सांस संबंधी परेशानियों को विकसित करते हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में वार्षिक औसत PM 2.5,.. 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (/g / m3) के राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक के दोगुने से अधिक था, जबकि पीएम 10 का स्तर तीन गुने से अधिक था. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (Centre for Science and Environment) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा, ‘राष्ट्रव्यापी वायु गुणवत्ता मानक (national ambient air quality standards nationwide) को पूरा करने में सक्षम होने के लिए, हमें NCAP और शहरों में स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत अनुपालन और निवारक ढांचे की आवश्यकता है’.उसने कहा, “अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बिजली और इंडस्ट्री सेक्टर, ट्रांसपोर्ट सेक्टर, क्लीन फ्यूल मूल्य निर्धारण और नगरपालिका रिफॉर्म में समयबद्ध सुधारों पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है’. दिल्ली में प्रमुख प्रदूषकों के स्तर में लॉकडाउन के दौरान काफी कमी आई है, मगर अनलॉक के कारण आर्थिक गतिविधियों के शुरु होने के चलते ये स्थिति ज्यादा दिन तक सामान्य नहीं रहेगी. प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों जैसे निर्माण कार्य और इमारत ढहाए जाने के बाद धूल का उड़ना, बायोमास जलना, इंडस्ट्रियल और वाहन से बड़ी मात्रा में प्रदूषक पदार्थों का निकलना, ये सारी गतिविधियां मुश्किलें खड़ी कर सकती है.
