प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ डॉक्टरों ने दिल्ली में कोविड के बढ़ने की चेतावनी दी
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को इस साल की सबसे खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रिकॉर्ड की गई. प्रदूषण और तापमान के गिराने के प्रभावों के कारण कोरोनोवायरस महामारी को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. महामारी के दौरान किए गए कई अध्ययनों से पता चलता है कि कोविड-19 से मौत शहरी वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक जोखिम के कारण होती है. दिप्रिंट ने कई डॉक्टरों और विशेषज्ञों से बात की, जिन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण से कोरोनोवायरस के मामलों में वृद्धि होगी, क्योंकि सांस से सम्बंधित संक्रमण कोविड-19 के केंद्र में हैं. डॉक्टरों ने कहा कि वे टेस्ट बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों का जल्दी से कोविड-19 परीक्षण किए जाएं और उनके इलाज पर ध्यान दिया जा सके. बुधवार तक, दिल्ली में 5,854 मौतों और 2,86,880 रिकवरी के साथ कुल 3,14,224 मामले दर्ज किए गए हैं. दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता मंगलवार को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई, जिसमें एक्यूआई 304 है. यह इस सीजन में पहली बार हुआ है. पूर्ववर्ती दिनों में एक्यूआई औसत ‘खराब’ श्रेणी में रही. सोमवार को एक्यूआई 261 पर था, जबकि रविवार को यह 216 और शनिवार को 221 पर था. बुधवार को, एक्यूआई 279 पर ‘ख़राब’ श्रेणी में लौट आया. पर्यावरणविदों ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण से निपटने की योजना लेकर आई है, लेकिन इसके लिए व्यापक खाका तैयार करना आवश्यक है. सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा, ‘साल के इस समय में अस्पताल में श्वसन(सांस से संबंधित) संबंधी बीमारियां बढ़ते प्रदूषण स्तर के कारण बढ़ती हैं.’ इस साल हमारे पास प्रदूषण के साथ कोविड का दोहरा बोझ है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण दिल्ली वासियों के फेफड़े कमजोर हो जाते हैं, जो चिंताजनक है.
