बगैर जांच बिगड़ रहा खेती का 'खेल'; पोषक तत्वों की कमी बढ़ा रही लागत, पैदावार में भी गिरावट, पढ़िए कैसे करें मिट्टी का मैनेजमेंट
मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस की कमी हो गई है. जबकि PH वैल्यू अधिक हो गई है. इससे फसलों की पैदावार गिरने के साथ खेती की लागत भी बढ़ रही है. बेतहाशा रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की सेहत खराब होती जा रही है. सन 1967 में आई फिल्म 'उपकार' का गाना...' मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती...' आज भी लोगों की जुबान है. मगर, इन 58 वर्षों में मिट्टी की सेहत साल दर साल खराब होती गई. क्या है इसके पीछे का कारण?, किस तरह के उपाय करने होंगे?. पढ़िए ईटीवी भारत की रिपोर्ट... साल 2015 में शुरू हुई थी सॉइल हेल्थ कार्ड योजना :केंद्र सरकार ने साल 2015 में देश में सॉइल हेल्थ कार्ड योजना शुरू की थी. इसका मकसद देशभर के किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच करना और मिट्टी में कौन से पोषक तत्व कितनी मात्रा में हैं, ये बताना था. इस योजना के तहत किसान जिला स्तर और मंडल स्तर पर भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के विशेषज्ञों से मिट्टी की जांच करा सकते हैं. मिट्टी के प्रमुख तत्वों की जांच के लिए एक किसान को महज 33 रुपये देने होते हैं. जबकि, मिट्टी में मौजूद 12 पोषक तत्वों की जांच के लिए 102 रुपये देने होते हैं. जांच में मिट्टी की सेहत खराब निकलने पर इसके लिए उपाय भी सुझाए जाते हैं. 48.5 प्रतिशत मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी :नवंबर में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने देशभर में लिए गए मिट्टी जांच के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इसकी रिपोर्ट भी जारी की. खुलासा हुआ कि देश की लगभग 64 प्रतिशत मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी है. जबकि 48.5 प्रतिशत मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बेहद कम है. मतलब मिट्टी में पहले जैसी ताकत नहीं रही है. इससे खेती की लागत बढ़ रही है. मगर, उसके मुकाबले पैदावार घट रही है. ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि अगर मिट्टी की बीमारी का सही इलाज नहीं हुआ तो हमारी थाली तक अनाज कैसे पहुंचेगा? डीएपी-यूरिया पर जोर, मिट्टी की जांच पर ध्यान कम :आगरा कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह बताते हैं कि केवीके पर किसान पौधों के पीलेपन, कम वृद्धि समेत अन्य शिकायत लेकर आते हैं. किसानों से जब पूछा जाता है कि मिट्टी की जांच कराई? तो उनका जवाब न में होता है. वह बस इतना बताते हैं कि बुवाई के समय खूब डीएपी और यूरिया का इस्तेमाल किया गया था. वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक के अनुसार किसान यह भी बताते हैं कि पानी के साथ भी यूरिया छिड़का गया है. इसके बावजूद पौधे सही से वृद्धि नहीं कर रहे हैं. ऐसे में किसानों को सलाह देते हैं कि फसल की बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं. मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से पौधा कमजोर रहता है. वृद्धि भी ठीक से नहीं होती है. इससे पैदावार प्रभावित होती है. पहले मिट्टी में जिंक, सल्फर, मैंगनीज, आयरन और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नहीं थी. अब मिट्टी में ऐसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी अधिक देखने को मिल रही है.
