दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता में सुधार, मगर चुनौतियां बरकरार
बडलानी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के PM 2.5 संबंधी वार्षिक दिशानिर्देश (5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) और भारत के वार्षिक राष्ट्रीय मानक (40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) के बीच के अंतर को रेखांकित किया है. PM2.5 उन सूक्ष्म कणों को कहते हैं जो फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं. स्रोत सामग्री में उल्लिखित 'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' के विश्लेषण के अनुसार, 2024 में दिल्ली में PM2.5 का वार्षिक औसत स्तर लगभग 105 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो भारत के राष्ट्रीय मानक से लगभग 2.6 गुना अधिक है. ये आंकड़े बताते हैं कि केवल दैनिक AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) में सुधार पर निर्भर रहने के बजाय, सूक्ष्म कणों से होने वाले प्रदूषण को दीर्घकालिक रूप से कम करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है.
