हिमाचल में ग्रीन स्कूल अवॉर्ड 2024-25: सोलन के स्कूलों ने फिर मारी बाजी
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) और हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट) ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया। सोलन जिला इस वर्ष फिर से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला बना। विश्व पर्यावरण दिवस पर हिमाचल प्रदेश में ग्रीन स्कूल अवॉर्ड समारोह का आयोजन शिमला के ऐतिहासिक होटल पीटरहॉफ में हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छह स्कूलों को वर्ष 2024-25 के लिए मुख्यमंत्री ग्रीन स्कूल रोलिंग ट्रॉफी प्रदान की। यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए गए। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) और हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट) ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया। सोलन जिला इस वर्ष फिर से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला बना। सोलन जिले का शानदार प्रदर्शन सोलन जिले ने पर्यावरण शिक्षा और टिकाऊ प्रथाओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इस वर्ष जिले के तीन स्कूलों ने ग्रीन स्कूल अवॉर्ड जीते, जिसके चलते सोलन को राज्य का सबसे बेहतर जिला घोषित किया गया। यह जिला पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी रहा है। हिमकोस्ट के सदस्य सचिव डीएस राणा ने कहा कि सोलन के स्कूलों ने पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिक जानकारी के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की वेबसाइट देखें। विजेता स्कूल और उनके पुरस्कार इस वर्ष ग्रीन स्कूल अवॉर्ड के तहत निम्नलिखित स्कूलों को सम्मानित किया गया: शिमला: सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बलद्यान – चेंजमेकर स्कूल अवॉर्ड हमीरपुर: सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भलेठ – वेस्ट वॉरियर अवॉर्ड सोलन: सरकारी उच्च विद्यालय, कन्ह गांव – लैंड मैनेजर अवॉर्ड सोलन: दून वैली पब्लिक स्कूल – एनर्जी मैनेजर अवॉर्ड शिमला: सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सरोग – न्यूकमर अवॉर्ड सोलन: शिवालिक वैली स्कूल, नालागढ़ – वॉटरवाइज अवॉर्ड ये स्कूल ऊर्जा संरक्षण, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण और जैव विविधता जैसे क्षेत्रों में अपने अनुकरणीय कार्यों के लिए जाने जाते हैं। ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम का महत्व सीएसई का ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम (जीएसपी) वर्ष 2017 में शुरू हुआ था। इसका लक्ष्य स्कूलों को पर्यावरणीय ऑडिट के माध्यम से सतत विकास की दिशा में प्रोत्साहित करना है। इस प्रोग्राम के तहत स्कूल अपनी ऊर्जा खपत, जल उपयोग, कचरा निपटान और अन्य संसाधनों का मूल्यांकन करते हैं। सीएसई के पर्यावरण शिक्षा प्रबंधक नीरज कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश ने 2024-25 में 290 स्कूलों के साथ जीएसपी ऑडिट पूरा किया, जो देश में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य के स्कूल पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। हिमकोस्ट और सीएसई की साझेदारी हिमकोस्ट और सीएसई पिछले एक दशक से हिमाचल में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इस साझेदारी ने स्कूलों में पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ाया है। डीएस राणा ने कहा कि यह प्रोग्राम भावी पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने में मदद कर रहा है। स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों को पर्यावरण प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे अपने परिसरों को हरा-भरा और टिकाऊ बना सकें। अधिक जानकारी के लिए सीएसई की वेबसाइट पर जाएं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम स्कूलों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह प्रोग्राम स्कूलों को गैर-प्रदूषणकारी परिवहन, ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देता है। हिमाचल के स्कूलों ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उदाहरण के लिए, सोलन के स्कूलों ने अपने परिसरों में कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण के लिए नवाचार किए हैं। यह पहल न केवल स्कूलों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाती है, बल्कि छात्रों में पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को भी स्थापित करती है। भविष्य की योजनाएं हिमाचल प्रदेश सरकार पर्यावरण शिक्षा को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समारोह में कहा कि राज्य सरकार स्कूलों में पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों को बढ़ावा देगी। ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम के तहत और अधिक स्कूलों को शामिल करने की योजना है। यह प्रयास हिमाचल को पर्यावरण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
