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Ozone pollution spreading across India, Delhi-NCR emerges as prime hotspot: CSE report

Ground-level ozone, an invisible but highly harmful air pollutant, is emerging as a year-round public health and climate challenge across India's cities, a new analysis by the Centre for Science and Environment (CSE) said. Based on six years of data from 25 cities, the analysis said that ozone pollution is no longer confined to isolated summer spikes or a handful of northern urban centres. Rather, it has spread across regions, with prolonged exposure becoming increasingly common in both inland and coastal cities.

Burning Eyes And Constant Cough? Why Spikes In Invisible Ozone Gas In Delhi-NCR Is Affecting Your Lung Health

Burning Eyes And Constant Cough? Why Spikes In Invisible Ozone Gas In Delhi-NCR Is Affecting Your Lung Health The invisible ozone gas in Delhi-NCR is affecting lung health. Here is what a new analysis highlights and why India needs to focus on implementing a multi-pollutant strategy. Written by: Rupashi Chhabra News Jul 01, 2026 12:51 pm IST Published On Jul 01, 2026 12:51 pm IST Last Updated On Jul 01, 2026 12:51 pm IST Read Time: 6 mins Open Google preferences (light) Share TwitterWhatsAppFacebookRedditEmail Ozone pollution is causing short-term and long-term effects Ozone pollution is causing short-term and long-term effects AI generated image Show Quick ReadSummary is AI-generated, newsroom-reviewed What are the most effective ways to purify indoor air from ozone? Burning eyes, throat irritation, dry cough are common complaints that are affecting the people in Delhi-NCR. Most people attribute these health issues to the general rise in air pollutants and their respective impact on their health. But a new analysis performed by the Centre for Science and Environment(CSE) from 2021 to 2026 flags Delhi-NCR as the largest regional hotspot for a rise in ozone pollution. While the effect is present in other Indian cities such as Chandigarh, Jaipur, Ahmedabad, Mumbai, Chennai, Bengaluru, Patna, the % of the impact varies. The latest CSE analysis suggests that growing heat along with rising in gaseous emissions is worsening the ozone problem. It is invisible, summer-driven and poses a grave threat to your health if it remains ignored. The presence of ground-level ozone is a year-around issue as it can impact your eyes, throat, lung health as well.

Indian Cities, New Study Warns

Ozone used to disappear when winter ended. Not anymore. A six-year study finds toxic ozone now blankets Indian cities through most of the year — and Delhi-NCR has it worst. The Centre for Science and Environment (CSE) tracked ozone levels from 2021 to 2026. Heat, strong sunlight and rising emissions are pushing readings far above safe limits, even in cities once seen as only mildly polluted. Ozone forms when nitrogen oxides (NOx) and volatile organic compounds (VOCs) react in sunlight and heat. Unlike smoke or dust, it cannot be seen. It damages lungs, crops and the climate. “Rising ground-level ozone and prolonged exposure windows are transforming India’s localised, winter-time particulate problem into a year-round, transboundary crisis that peaks during the summer,” said Anumita Roychowdhury, executive director of CSE and the study’s lead author.

दिल्ली-NCR बना ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण का हॉटस्पॉट, बढ़ती गर्मी से बढ़ा खतरा; कई शहरों को चेतावनी

देश के कई बड़े शहरों में ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण (Ground-level ozone pollution) तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 6 साल के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में दिल्ली-NCR शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता तापमान और वाहनों व उद्योगों से निकलने वाली प्रदूषण फैलाने वाली गैसें ओजोन बनने की प्रक्रिया को तेज कर रही हैं। इसके कारण हवा में जमीन के पास मौजूद ओजोन का स्तर बढ़ रहा है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है। दिल्ली-NCR के अलावा चंडीगढ़, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी ग्राउंड-लेवल ओजोन का प्रभाव बढ़ता देखा गया है।

6 साल के आंकड़ों की जांच में सामने आया कि ओजोन प्रदूषण सिर्फ कुछ शहरों तक सीमित नहीं है

देश के कई बड़े शहरों में ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली-NCR सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है। गर्मी और प्रदूषण फैलाने वाली गैसों के कारण ओजोन का स्तर बढ़ा, जिससे स्वास्थ्य पर खतरा। 6 साल के आंकड़ों की जांच में सामने आया कि ओजोन प्रदूषण सिर्फ कुछ शहरों तक सीमित नहीं है. बढ़ती गर्मी के साथ इसका असर देश के कई हिस्सों में बढ़ रहा है. दिल्ली-NCR तो हॉटस्पॉट है. कैंसिल देश के कई बड़े शहरों में ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है. छह साल के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि दिल्ली-NCR इस समस्या का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है. वहीं चंडीगढ़, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु समेत कई शहर भी इसकी चपेट में हैं. बढ़ती गर्मी और प्रदूषण फैलाने वाली गैसों की वजह से ओजोन का स्तर बढ़ रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने 2021 से 2026 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च से 10 मई 2026 के बीच देश के 25 बड़े शहरों का अध्ययन किया गया. इसमें 15 शहर ऐसे मिले, जहां गर्मियों के दौरान ग्राउंड-लेवल ओजोन का स्तर सरकार की तय सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा. टू-फ्रंट जाल में PAK? सिंधु पर भारत से तनाव, पीट रहा अफगानिस्तान'कृत्रिम सूरज' के लिए चीन ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा मैग्नेट600 भूकंप के झटके, 1700 से ज्यादा मौतें, 58 हजार इमारतें ध्वस्त, वेनेजुएला की तबाही ने झकझोर दिया चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा औसत ओजोन स्तर दर्ज किया गया. इसके बाद जयपुर, अहमदाबाद और भोपाल का स्थान रहा. वहीं मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी ओजोनतेजी से बढ़ता मिला. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब यह समस्या सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल रही है. ग्राउंड-लेवल ओजोन जमीन के पास बनने वाली एक हानिकारक गैस है. यह सीधे हवा में नहीं निकलती. जब वाहनों, फैक्ट्रियों, बिजलीघरों और ईंधन जलाने से निकलने वाली गैसें तेज धूप और गर्मी के संपर्क में आती हैं, तब आपस में मिलकर ओजोन बनाती हैं. ज्यादा मात्रा में यह गैस इंसानों, फसलों और पर्यावरण तीनों के लिए नुकसानदायक मानी जाती है. दिल्ली-NCR इस समय ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण का सबसे बड़ा क्षेत्रीय हॉटस्पॉट बन गया है. स्टडी के दौरान पूरे 71 दिनों तक यहां ओजोन का स्तर सरकार की तय सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा. दिल्ली के अलावा ग्रेटर, नोएडा और गाजियाबाद के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर भी लगातार ज्यादा ओजोन दर्ज किया गया. अब यह प्रदूषण सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे NCR में फैल चुका है. स्टडी में सामने आया कि सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि ओजोन कितने दिनों तक बढ़ा. यह भी जरूरी है कि एक दिन में वह कितनी देर तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है. जितनी देर ओजोन हवा में रहता है, उतनी देर लोग भी उसके संपर्क में रहते हैं. भोपाल में औसतन 17 घंटे तक ओजोन का स्तर तय सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा. लखनऊ में यह समय 16.3 घंटे दर्ज किया गया. वहींपहले माना जाता था कि ओजोन प्रदूषण सिर्फ दिन में ज्यादा होता है, लेकिन अब कई शहरों में इसका असर रात में भी बना रहता है. दिल्ली-NCR में सबसे ज्यादा 46 रातों तक ओजोन का स्तर तय सीमा से ऊपर दर्ज किया गया. इसके बाद बेंगलुरु में 14,में 13 और पटना व मुजफ्फरपुर में 8-8 रातों तक ज्यादा ओजोन रिकॉर्ड किया गया. इसका मतलब है कि लोगों का प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने का समय लगातार बढ़ रहा है. वाहनों, फैक्ट्रियों, बिजलीघरों, घरों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और कचरा या फसल के अवशेष जलाने से कई तरह की गैसें निकलती हैं. इनमें नाइट्रोजन ऑक्साइड , VOC और कार्बन मोनोऑक्साइड शामिल हैं. जब ये गैसें तेज धूप और ज्यादा गर्मी के संपर्क में आती हैं, तो आपस में मिलकर ग्राउंड-लेवल ओजोन बनाती हैं. इसलिए गर्मियों में इसका स्तर तेजी से बढ़ जाता है. ज्यादा ओजोन फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे सांस लेने में दिक्कत, अस्थमा की परेशानी बढ़ना, गले और सांस की नली में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से दिल और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. इसका असर खेती पर भी पड़ता है. ओजोन की वजह से पौधों की बढ़त प्रभावित होती है और गेहूं जैसी फसलों की पैदावार हर साल 14% से 15% तक कम हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ धूल और PM2.5 को कम करना काफी नहीं होगा. ओजोन बनाने वाली गैसों के इमिशन को भी घटाना होगा. इसके लिए वाहनों, फैक्ट्रियों, घरों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन, कचरा और फसल के अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है. वायु प्रदूषण से निपटने की मौजूदा प्लानिंग में ओजोन को भी शामिल करने की जरूरत बताई गई है. बढ़ती गर्मी के साथ ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण अब देश के कई शहरों में तेजी से फैल रहा है. अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में इसका असर लोगों की सेहत, खेती और पर्यावरण पर और ज्यादा पड़ सकता है. Bathroom Tiles Cleaning: Bathroom Tiles Cleaning: बाथरूम के टाइल्स पर दिख रहे हैं जिद्दी पीले दाग, इस चीज से करें सफाई, चमकेंगी नई जैसीबाथरूम में छिपाते थे पैसे, निकालने की ये थी ट्रिक... चढ़ावा चोरों ने पूछताछ में सब कबूलामकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉजिट से नहीं काट पाएंगे मनमाना पैसा, HC का फैसलादिल्ली में अगले 48 घंटे में आंधी तूफान और जोरदार बारिश की चेतावनी

Hope In Green: Inside Odisha's Growing Environmental Movement and the NGOs Quietly Rewriting the Future

Similarly, the Centre for Environmental Studies (CES), operating under Odisha's Department of Forest, Environment and Climate Change, has helped establish one of the state's most influential environmental education networks. Through Eco-Clubs operating in schools and colleges, thousands of students participate annually in biodiversity documentation, plantation activities, waste management initiatives, climate awareness programmes, and nature education projects. The significance of environmental education has long been emphasised by Dr Ashutosh Debata, one of Odisha's most respected environmentalists and educators. Through decades of work in environmental awareness and public engagement, he has consistently advocated that conservation cannot succeed through legislation alone. According to his publicly expressed views and environmental initiatives, communities must become active participants in protecting natural resources if sustainability is to be achieved. His efforts have helped shape a generation of environmentally conscious citizens across Odisha.

Why Heatwaves Hit Women Harder Than Men: The Science Explained

As water sources dry up, women are forced to walk long distances to fetch water. Renowned environmentalist Sunita Narain has repeatedly pointed out that water scarcity and environmental degradation have the most immediate and devastating impact on women’s lives. The consequences of extreme heat extend far beyond physical health. Several mental health studies have found that rising temperatures significantly increase irritability, stress, and aggression. Unfortunately, women often become the silent victims of this growing frustration. After enduring exhausting heat and humidity throughout the day, some men return home carrying accumulated stress that may manifest as verbal abuse or domestic violence against women.

Experts welcome Delhi’s new EV policy, seek better charging network

Experts have welcomed the Delhi government’s EV Policy, saying its proposed phase-out of petrol and CNG-powered two- and three-wheelers and incentives for zero-emission vehicles could significantly reduce vehicular pollution in the national capital. Sharif Qamar, Fellow and Associate Director at The Energy and Resources Institute (TERI), described it as a forward-looking policy that could serve as a model for other states. “The policy gives a good framework which can result in a reduction in vehicular emissions in Delhi in the next few years,” he said, adding that states in the Indo-Gangetic plains, which witness a sharp rise in pollution during winter, could benefit from a similar approach. Qamar said the policy was also likely to attract private investment and strengthen the city’s EV ecosystem. However, he stressed a significant expansion in charging infrastructure for the policy to become a success. “The target to install over 30,000 EV charging stations is good, but to cater to the upcoming demand, more charging stations will be required in the national capital,” he said. Qamar said commercial and fleet vehicles often occupy charging stations, necessitating additional capacity for private users. He also called for greater participation by housing societies, resident welfare associations, and apartment complexes in setting up charging facilities. Anumita Roychowdhury, Executive Director at the Centre for Science and Environment, said the decision to allow only electric three-wheelers and N1 trucks to be registered from next year was a welcome move. “Along with subsidies on new purchases, there was an urgent need for a legal mandate to properly implement the new EV policy so that the desired results to reduce vehicular emissions can be achieved,” she said. According to Roychowdhury, two-wheelers are a major contributor to vehicular emissions in Delhi.

Health or hunger in the killer heat

On the hottest days, the surface tem­perature of the ground can reach 60°C, according to the Centre for Science and Environment, a New Delhi-based think tank. That is when tarmac starts to soften and barefoot workers risk blistering their feet.

Delhi EV Policy 2026 दिल्ली में नई ईवी नीति के क्या होंगे नफा-नुकसान; ऐसे समझें पूरा गणित

Delhi EV Policy 2026 : राजधानी दिल्ली में 1 जुलाई से नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2.0 लागू होने जा रही है। सरकार ने नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने पर बंपर छूट के साथ सब्सिडी देने का भी ऐलान किया है। आइए जानते हैं इस नई नीति क्या कुछ नफा-नुकसान हो सकते हैं। दिल्ली सरकार ने सोमवार को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2.0 को मंजूरी दे दी। नए ईवी वाहन की खरीद पर बंपर छूट दी गई है। इसके तहत 30 लाख तक की कीमत वाले ई-वाहन पर न तो रोड टैक्स देना होगा और न ही रजिस्ट्रेशन फीस लगेगी। नई नीति के तहत जनवरी, 2027 से सिर्फ ई-ऑटो का ही रजिस्ट्रेशन होगा। इसके अलावा अप्रैल, 2028 से सिर्फ ई-दोपहिया वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नीति, उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद एक जुलाई से लागू होगी। इस नीति का मकसद वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम करना एवं स्वच्छ परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि बीएस-4 या इससे कम श्रेणी के व्यावसायिक वाहन स्क्रैप कराकर नया ई-वाहन खरीदने पर छूट के साथ एक लाख रुपये तक का इंसेंटिव भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदूषण का बड़ा कारण व्यावसायिक मालवाहक और दोपहिया-तिपहिया वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है। इसी कारण नई नीति में इन श्रेणियों को प्राथमिकता दी गई है ताकि प्रदूषण में प्रभावी कमी लाई जा सके। बता दें कि दिसंबर 2025 में जारी सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, गत वर्ष सर्दियों में पीएम 2.5 स्तरों में वाहनों के उत्सर्जन की हिस्सेदारी 46 से 53 फीसदी थी।

दिल्ली में अब ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ, कैबिनेट की मंजूरी

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने सोमवार को अपनी महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2.0 को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि दिल्ली कैबिनेट द्वारा यह नई नीति उपराज्यपाल की अंतिम स्वीकृति के बाद 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगी. इस नीति के तहत सरकार नए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर भारी वित्तीय छूट और रियायतें दे रही है. जिससे राजधानी में निजी और वाणिज्यिक परिवहन का ढांचा पूरी तरह बदलने की उम्मीद है. 30 लाख तक के वाहनों पर टैक्स और फीस माफ नई ईवी नीति का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि 30 लाख रुपये तक की कीमत वाले किसी भी नए ई-वाहन की खरीद पर ग्राहकों को न तो रोड टैक्स देना होगा और न ही रजिस्ट्रेशन फीस लगेगी. वर्तमान में दिल्ली में गाड़ियों की एक्स-शोरूम कीमत के आधार पर 4% से लेकर 10% तक रोड टैक्स वसूला जाता है. इस नीति के लागू होने से 30 लाख रुपये की इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले ग्राहकों को सीधे तौर पर करीब 3 लाख रुपये की बचत होगी. यदि कोई ग्राहक अपने पुराने बीएस-4 (BS-IV) या उससे कम श्रेणी के कमर्शियल वाहन को स्क्रैप कराकर नया ई-वाहन खरीदता है, तो उसे 1 लाख रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव और 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी. यानी कुल मिलाकर एक खरीदार को 5 लाख रुपये तक का सीधा फायदा मिल सकता है. 2027 से सिर्फ ई-ऑटो का पंजीकरण शहर के कुल वाहन प्रदूषण में वाणिज्यिक वाहनों की हिस्सेदारी 33% है. जिसमें 3.5 टन तक की क्षमता वाले छोटे मालवाहक (N-1 श्रेणी) सबसे आगे हैं. इसके अलावा 46% प्रदूषण दोपहिया और तिपहिया वाहनों के कारण होता है. 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो (ई-ऑटो) और एन-1 श्रेणी के मालवाहक वाहनों का ही नया पंजीकरण किया जाएगा. 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली के भीतर पेट्रोल से चलने वाले नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण पूरी तरह बंद हो जाएगा और सिर्फ ई-दोपहिया (इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर) वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों के दौरान दिल्ली के हवा में मौजूद पीएम 2.5 (PM 2.5) स्तर में वाहनों के धुएं की हिस्सेदारी 46% से 53% तक पहुंच जाती है. सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रायचौधरी के मुताबिक, यदि दिल्ली के परिवहन को 100% इलेक्ट्रिक में बदल दिया जाए, तो शहर का वायु प्रदूषण घटकर आधा हो सकता है क्योंकि ई-वाहन पूरी तरह धुआं-मुक्त होते हैं. बुनियादी ढांचे का विकास और रोजगार नई नीति केवल रियायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए एक नया बाजार भी तैयार कर रही है. ई-वाहनों की बढ़ती संख्या को सुचारू रूप से चार्जिंग की सुविधा देने के लिए दिल्ली में 32 हजार नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. इससे निजी कंपनियों के व्यापार में वृद्धि होगी और साथ ही बड़े पैमाने पर तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. हालांकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से ईवी नीतियां लागू हैं. लेकिन दिल्ली की यह नई नीति देश में सबसे अधिक प्रोत्साहन देने वाली योजना बन गई है.

₹3000000 तक के इलेक्ट्रिक वाहनों को रजिस्ट्रेशन में छूट, पुरानी गाड़ियों की स्क्रैपिंग पर ₹1 लाख तक का प्रोत्साहन: जानिए नई EV पॉलिसी से रेखा सरकार कैसे लगाएगी वायु प्रदूषण पर लगाम

दिल्ली सरकार ने नई EV पॉलिसी 2026–2030 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में बंपर छूट के साथ सब्सिडी दी जाएगी। 30 लाख तक की इलेक्ट्रिक वाहनों पर कोई रोड टैक्स नहीं लगेगा। यहाँ तक कि रजिस्ट्रेशन फीस भी नहीं देना होगा। 1 जुलाई 2026 से ये पॉलिसी लागू हो जाएगी और 31 मार्च 2030 तक रहेगी। इसका मकसद राजधानी में वायु प्रदूषण कम करना, पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता घटाना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। रेखा गुप्ता सरकार का कहना है कि अगले चार वर्षों में इस पर लगभग ₹15,000 करोड़ खर्च किए जाएँगे। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स में बड़ी राहत ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100% छूट दी गई है। इससे EV खरीदने की शुरुआती लागत कम हो जाएगी। नई नीति के तहत जनवरी 2027 में सिर्फ ई-ऑटो का रजिस्ट्रेशन होगी जबकि अप्रैल 2028 से दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इलेक्ट्रिक टू व्हीलर के खरीदारों को पहले साल ₹30,000, दूसरे साल ₹20,000 और तीसरे साल ₹10,000 की सब्सिडी मिलेगी। स्क्रैपेज (पुरानी गाड़ी हटाने) पर प्रोत्साहन पुरानी BS-IV या उससे पुराने वाहन को स्क्रैप कर नया EV खरीदने को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने वाहनों की खरीद में छूट दी है। कार के लिए अधिकतम ₹100000 तक का स्क्रैपेज इंसेंटिव दिया जा रहा है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए भी अलग-अलग प्रोत्साहन राशि का ऐलान किया गया है। इसमें दो पहिया वाहनों के लिए ₹10000, तिपहिया वाहनों के लिए ₹25000, चार पहिया वाहनों के लिए ₹100000, N1 ट्रक के लिए ₹50000 और ग्रामीण सेवा वाहन के लिए ₹15000 इंसेंटिव की घोषणा की गई है। इलेक्ट्रिक ऑटो और थ्री व्हीलर को लेकर बदलाव 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक ऑटो के होंगे। CNG और पेट्रोल ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए जाएँगे। नई EV पॉलिसी के मुताबिक, खरीदारों को पहले साल ₹50,000, दूसरे साल ₹40,000 और तीसरे साल ₹30,000 की सब्सिडी दी जाएगी। अधिकारियों ने साफ कहा है कि हाइब्रिड वाहनों के लिए कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। यह पॉलिसी पूरी तरह से जीरो इमिशन वाहनों के लिए है। दिल्ली की नई नीति के तहत चरणबद्ध तरीके से प्लान लागू होंगे। इसमें 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन होगा। जबकि 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल या CNG दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद होगा। इसके बाद केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का नया रजिस्ट्रेशन होगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन बढ़ाए जाएँगे। बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। स्कूलों और कई व्यावसायिक वाहनों के लिए चरणबद्ध तरीके से EV अपनाने के लक्ष्य तय किए गए हैं। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है और राज्य को पॉलिसी से ₹15,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद है। लोगों को कैसे फायदा होगा? EV खरीदने पर लागत कम हो जाएगी। लोगों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में बचत होगी। पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर अतिरिक्त रकम मिलेगा। वैसे भी इलेक्ट्रिक वाहन को चलाने की लागत पेट्रोल-डीजल की तुलना में काफी कम होती है। इससे शहर को वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति मिलने की उम्मीद है। चार्जिंग स्टेशन बढ़ने से EV इस्तेमाल करना आसान होगा। 30 लाख की कार पर 5 लाग की बचत दिल्ली में फिलहाल रोड टैक्स की बात करें तो ₹6 लाख तक की पेट्रोल कार पर 4 फीसदी, ₹10 लाख तक की कार पर 7 फीसदी और ₹10 लाख से ऊपर की कार पर 10 फीसदी रोड टैक्स लिया जाता है। ऐसे में अब दिल्ली के लोगों को ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर ₹3 लाख रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस, ₹1लाख पुरानी कार की स्क्रैप और ₹1लाख की सब्सिडी यानी कुल मिलाकर ₹5 लाख तक की बचत हो जाएगी। नई EV पॉलिसी क्यों लाई गई? दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में एक मानी जाती है। खासकर सर्दियों में तो शहर के दमघोंटू हवा में दिल्ली वासियों का जीना मुहाल हो जाता है। सरकार का कहना है कि वाहनों से निकलने वाला धुआँ प्रदूषण का बड़ा कारण है। गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्दियों में पीएम 2.5 स्तर पर था। इसमें वाहनों के इमिशन की हिस्सेदारी करीब 46-53 फीसदी थी।

Ozone pollution spreading across Indian cities, Delhi-NCR worst hit

Ground-level ozone, an invisible but highly harmful air pollutant, is rapidly emerging as a year-round public health and climate challenge across India's cities, according to a new analysis by the Centre for Science and Environment (CSE). Based on six years of data from 25 cities, the study shows that ozone pollution is no longer confined to isolated summer spikes or a handful of northern urban centres. Instead, it has spread across regions, with prolonged exposure becoming increasingly common in both inland and coastal cities.