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Delhi Heat Wave: नजफगढ़, मुंगेशपुर और नरेला... दिल्ली के ये तीन इलाके क्यों तप रहे? जानिए यहां

नई दिल्ली: मई के दौरान लू का सबसे अधिक अटैक नजफगढ़, मंगेशपुर और नरेला में देखने को मिल रहा है। यहां का तापमान 48 से 49 डिग्री के आसपास बना हुआ है। एक्सपर्ट के अनुसार इन जगहों के गर्म होने की कई वजह हैं। पहला तो यह आउटर क्षेत्र में है। यहां पर खुली जगह, घनी आबादी और इंडस्ट्रियल कलस्टर अधिक हैं। इन वजहों से यहां गर्मी ट्रैप हो रही है। वहीं दूसरी तरह पाकिस्तान और राजस्थान से आने वाली गर्म हवाएं सबसे पहले यहीं पहुंचती हैं। इसलिए इन इलाकों का तापमान काफी अधिक रहता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का कोर एरिया पेरी अर्बन और ग्रामीण एरिया से अधिक गर्म है। इसकी वजह यह है कि दिल्ली के कोर एरिया में बिल्टअप एरिया गर्मी को लंबे समय तक ट्रैप करके रख रहा है। इसी पर बीते कुछ सालों के दौरान एक्सपर्ट चिंता जता रहे हैं। इसी को अर्बन आइलैंड भी कहा जा रहा है। वहीं नासा सैटेलाइट इमेज बता रही हैं कि दिन के समय दिल्ली का कोर एरिया पेरी अर्बन एरिया से ठंडा रहता है। सीएसई के अनुसार दिल्ली का कोर एरिया पेरिफेरी और पेरी अर्बन एरिया की तुलना में दिन के समय 0.8 डिग्री ठंडा रहता है। लेकिन रात में यह स्थिति इसके विपरीत हो जाती है। रात के समय दिल्ली का कोर एरिया पेरिफेरी और पेरी अर्बन एरिया के मुकाबले 2.9 डिग्री अधिक गर्म रहता है।

Bengaluru Weather Update: बेंगलुरु में आखिर क्यों रात में भी रिकॉर्ड हो रहा है अधिक तापमान? जानिए क्या है कारण Read more at: https://hindi.goodreturns.in/news/bengaluru-weather-update-why-bengaluru-sees-rise-in-temp-know-reason-check-bangalore-mausam-ka-

भीषण गर्मी ने लोगों का हाल बुरा कर दिया है। सूरज ढलने के बाद भी कई शहरों का तापमान कम नहीं हो रहा है। बात करें अगर बेंगलुरु की तो इस शहर ने पहले बाढ़ झेली, फिर पानी की किल्लत और अब तापमान का कहर भी झेल रहा है। हांलाकि, बेंगलुरु में यूं तो अक्सर ही छिटपुट बारिश होती रहती है, जो शहर के वातावरण को ठंडा रखती है लेकिन इस साल गर्मी की मार बेंगलुरु भी हद से ज्यादा झेल रहा है। देश का इतना बड़ा आईटी हब इस सवाल का हल ढूंढ रहा है कि आखिर बेंगलुरु में रात में भी अधिक तापमान क्यों रिकॉर्ड हो रहा है। चलिए इस सवाल का जवाब आपको बताते हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में बंगलुरु सहित प्रमुख भारतीय शहरों में रात के समय बढ़ते तापमान की चिंताजनक स्थिति पर प्रकाश डाला है। अध्ययन से पता चलता है कि शहरी विस्तार और बदलते जलवायु पैटर्न सहित कई कारण इस चिंताजनक प्रवृत्ति में योगदान दे रहे हैं।

Heatwave Alert : आसमान से बरस रही आग, प्रचंड गर्मी में पारा 50 डिग्री के पास, राजस्थान सहित 12 राज्य नहीं दे रहे सही रिपोर्ट

Heatwave Alert : देश में चल रहा महागर्मी का दौर नगरों और महानगरों पर कहर बनकर टूट रहा है। खासकर उत्तर-पश्चिमी राज्यों में विकट हालात हैं, जहां कई स्थानों पर तापमान 50 डिग्री के आसपास चला गया है। आईआइटी-भुवनेश्वर के एक नए शोध में पाया गया कि शहरीकरण के कारण भारत के 140 से अधिक प्रमुख शहरों की रात उनके आसपास के गैर-शहरी क्षेत्रों की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक गर्म है। अहमदाबाद, जयपुर, राजकोट में शहरीकरण का सबसे ज्यादा असर देखा गया जबकि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र चौथे व पुणे पांचवें स्थान पर रहे। इन छह शहरों में लू का कहर इसबीच, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने भी भारत के छह प्रमुख शहरों में लू के थपेड़ों और ऊंचे तापमान को खतरनाक बनाने वाले कारणों का विश्लेषण कर बताया कि इस बार पारा के साथ हवा में बढ़ती नमी (ह्यूमिडिटी) का खतरनाक संयोजन परेशान करने वाला है। यह अध्ययन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता के आंकड़ों का आकलन किया। सीएसई के अनुसार, बेंगलूरु को छोड़कर बाकी महानगरों में औसत सापेक्ष नमी (रिलेविट ह्यूमेडिटी) में पांच से 10% की वृद्धि हुई है। हैदराबाद जैसे शुष्क क्षेत्रों में रिलेविट ह्यूमेडिटी 2001-2010 की तुलना में 10% बढ़ी है। वहीं, दिल्ली में यह 8% बढ़ी है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में अभी भी दिल्ली और हैदराबाद की तुलना में 25% से ज़्यादा ह्यूमेडिटी है। दिल्ली में रात के समय तापमान औसत 12.2 डिग्री तक की बजाय औसतन केवल 8.5 डिग्री तक ठंडा हो पा रहा है। रिकॉर्डतोड़ गर्मी, रात को नहीं मिल रही राहत विशेषज्ञों का कहना है कि दिन के समय रिकॉर्डतोड़ गर्मी के बाद रात को भी राहत नहीं मिलने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यह स्थिति बच्चों के दिमाग के विकास पर असर डालने से लेकर गर्भवती महिलाओं तक को प्रभावित कर सकती हैं। बुजुर्ग तो इसके आसान शिकार हो ही रहे हैं। शहरीकरण को ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (यूएचआई) प्रभाव के लिए जिम्मेदार माना जाता है। ‘अर्बन हीट आइलैंड’ में कंक्रीट और डामर (सड़कों और फुटपाथों के निर्माण में प्रयुक्त) की सतहें दिन के दौरान गर्मी को सोखती हैं और शाम को इसे छोड़ती हैं, जिससे रात के समय का तापमान बढ़ जाता है।

दिल्ली में पारा पहुंचा 50 के करीब, गर्मी का नया रिकॉर्ड

मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को उत्तरी दिल्ली के इलाकों नरेला और मुंगेशपुर में तापमान 49.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इतना अधिक तापमान इससे पहले दिल्ली में कभी दर्ज नहीं किया गया. इससे पहले 2022 में मुंगेशपुर में ही 49.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था. इस समय उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और मध्य भारत के कई इलाके गर्मी की एक भीषण लहर की चपेट में हैं. मंगलवार को देश में सबसे ज्यादा गर्मी राजस्थान और हरियाणा में दर्ज की गई. राजस्थान के चूरू में पारा 50.5 तक और हरियाणा के सिरसा में 50.3 तक पहुंच गया. मौसम विभाग का कहना है कि तापमान अपेक्षित स्तर से नौ डिग्री ज्यादा है. विभाग ने बुधवार को भी गर्मी की लहर के बरकरार रहने का पूर्वानुमान दिया है. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि राजस्थान में गर्मी की वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है. रात का तापमान भी बढ़ा इस बीच निजी संस्थान सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने गर्मी पर एक नया अध्ययन किया है. अध्ययन में कहा गया है कि किसी भी शहर में गर्मी की लहर का कारण सिर्फ बढ़ता तापमान नहीं है, बल्कि हवा के तापमान, जमीन की सतह का तापमान और तुलनात्मक ह्यूमिडिटी का मिश्रण है. अगर कहीं पर हवा का तापमान गिर भी जाए तो बाकी दोनों कारण मिल कर ऐसे हालात नहीं बनने देते जिनमें थोड़ी राहत महसूस हो. अध्ययन के मुताबिक देश के लगभग सभी बड़े शहरों में बीते 10 सालों में तुलनात्मक ह्यूमिडिटी बढ़ी है. इसके अलावा एक और चिंताजनक बात यह है कि रात का तापमान भी लगातार बढ़ा हुआ रह रहा है. अध्ययन के मुताबिक 2001 से 2010 तक गर्मियों में जमीन का तापमान रात को 6.2 से 13.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता था, लेकिन 2014 से 23 के बीच रात के समय तापमान 6.2 से लेकर सिर्फ 11.5 डिग्री तक ही गिरा. दिल्ली में अब रातें नौ प्रतिशत, हैदराबाद में 13 प्रतिशत, बेंगलुरु में 15, चेन्नई में पांच और मुंबई में 24 प्रतिशत कम ठंडी रहने लगी हैं. भट्टी बनते शहर साथ ही अध्ययन में बढ़ते शहरीकरण के दुष्प्रभावों के बारे में भी बताया गया है. अध्ययन के मुताबिक निर्माण में बढ़ोतरी और शहरी हीट स्ट्रेस के बीच सीधा संबंध है. बीते दो दशकों में सभी बड़े शहरों में कंक्रीट का इस्तेमाल बढ़ा है और पेड़ कटे हैं. 2023 में कोलकाता में ऐसी जमीन का प्रतिशत सबसे ज्यादा था, जिसमें कंक्रीट के ढांचे हों. ग्रीन कवर सभी शहरों के मुकाबले सबसे ज्यादा कोलकाता में कम हुआ है. दिल्ली में तुलनात्मक रूप से कंक्रीट कवर सबसे कम और ग्रीन कवर सबसे ज्यादा है. मुंबई और चेन्नई में भी ग्रीन कवर गिरा है. सीएसई का यह भी कहना है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रुक भी गई तो भी चरम गर्मी की तीव्रता और बारंबारता और बढ़ेगी. साथ ही गर्मी की लहर वाले दिनों की संख्या भी बढ़ेगी. इस स्थिति से निपटने के लिए अलग अलग शहरों के हिसाब से गर्मी प्रबंधन योजनाओं की जरूरत है.

भारत के महानगरों में गर्मी से बढ़ता तनाव

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, कंक्रीटीकरण और आर्द्रता के बढ़ते स्तर से भारत के महानगरों में गर्मी का तनाव बढ़ रहा है, जो एक दशक पहले की दर से रात में ठंडे नहीं हो रहे हैं। सीएसई ने जनवरी 2001 से अप्रैल 2024 तक छह महानगरों - दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई - के लिए गर्मियों के वायु तापमान, भूमि की सतह के तापमान और सापेक्ष आर्द्रता के आंकड़ों का विश्लेषण किया। थिंक टैंक ने पाया कि बढ़ी हुई आर्द्रता सभी जलवायु क्षेत्रों में गर्मी के तनाव को बढ़ा रही है, यहाँ तक कि दिल्ली और हैदराबाद में हवा के तापमान में मामूली गिरावट को भी नकार दिया है। बेंगलुरु को छोड़कर, 2001-2010 के औसत की तुलना में 2014-2023 तक अन्य पाँच महानगरों में गर्मियों की औसत सापेक्ष आर्द्रता में 5-10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

Explainer: 'भट्टी' क्यों बन रहे दिल्ली समेत ये 6 बड़े शहर? 10 साल के आंकड़ों से समझिए गर्मी का कैसे बदला मिजाज

हीटवेव में भी साल दर साल आया फर्क भारत में हीटवेव ने शहर का ताप प्रभाव खराब कर दिया है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के प्रोग्राम एग्जिक्यूटिव शरणजीत कौर ने बताया कि शहरों में भीषण गर्मी की वजह उच्च तापमान और आर्द्रता है. उन्होंने कहा, “आमतौर पर हीटवेव मार्च और जुलाई के बीच होती हैं, लेकिन आजकल हम गर्मी की तुलना में अधिक आर्द्रता देख रहे हैं. इसके परिणामस्वरूप गर्मी बढ़ रही है. रात का तापमान भी ठंडा नहीं हो रहा. क्योंकि कंक्रीट के स्ट्रक्चर दिन के दौरान गर्मी को अब्सॉर्ब (अवशोषित) कर लेती हैं और फंसकर रह जाती है. लिहाजा रात में भी गर्म हवाओं का एहसास होता है. प्री-मॉनसून और मॉनसून के बीच भी बदला ट्रेंड CSE की स्टडी के मुताबिक, 2001-10 के दौरान दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में प्री-मॉनसून और मॉनसून के बीच तापमान बढ़ता था. लेकिन हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में प्री-मॉनसून और मॉनसून के बीच तापमान में गिरावट आती थी. अब ये ट्रेंड बदल गया है. पिछले 10 साल में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में मॉनसून पहले की तुलना में ज्यादा गर्म हो गया है. चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में ऐसा नहीं है. कुल मिलाकर 2001-10 की तुलना में मॉनसून औसतन 1 डिग्री सेल्सियस गर्म हो गया है.

शहरों में क्यों पड़ती है इतनी ज्यादा गर्मी? रात में भी नहीं मिलती राहत, CSE की रिपोर्ट में सामने आई ये बात

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में खूब गर्मी पड़ रही है। इसका नतीजा ये हुआ है कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। अगर किसी को कुछ देर के लिए भी धूप में निकलना पड़े तो उसकी हालत खराब हो जाती है। तमाम जगहों पर पारा 45 डिग्री के पार हो चुका है और कई जगहों पर तो 50 डिग्री के करीब है। इस बीच सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि आखिर शहरों में इतनी ज्यादा गर्मी क्यों पड़ रही है।

खुल गया राज! रात को भी क्यों कम नहीं हो रही गर्मी

अगर आप उत्तर भारत में कहीं भी रहते हैं तो आप जानते होंगे कि गर्मी से हाल बेहाल है। ऐसी गर्मी सालों से नहीं पड़ी। क्या आपने ये सोचा है कि दिन ब दिन पारा क्यों बढ़ता जा रहा है। एक हैरान करने वाला फैक्ट ये है कि अब रात में शहरों में उतनी तेजी से पारा नहीं गिर रहा जिस तरह 2001 से लेकर 2010 के बीच होता था। और ये बात सिर्फ सुनी सुनाई नहीं बल्कि दिल्ली के थिंकटैंक सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट यानि CSE की स्टडी से पता चला है।

Heatwave Alert : आसमान से बरस रही आग, प्रचंड गर्मी में पारा 50 डिग्री के पास, राजस्थान सहित 12 राज्य नहीं दे रहे सही रिपोर्ट

इन छह शहरों में लू का कहर इसबीच, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने भी भारत के छह प्रमुख शहरों में लू के थपेड़ों और ऊंचे तापमान को खतरनाक बनाने वाले कारणों का विश्लेषण कर बताया कि इस बार पारा के साथ हवा में बढ़ती नमी (ह्यूमिडिटी) का खतरनाक संयोजन परेशान करने वाला है। यह अध्ययन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता के आंकड़ों का आकलन किया। सीएसई के अनुसार, बेंगलूरु को छोड़कर बाकी महानगरों में औसत सापेक्ष नमी (रिलेविट ह्यूमेडिटी) में पांच से 10% की वृद्धि हुई है। हैदराबाद जैसे शुष्क क्षेत्रों में रिलेविट ह्यूमेडिटी 2001-2010 की तुलना में 10% बढ़ी है। वहीं, दिल्ली में यह 8% बढ़ी है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में अभी भी दिल्ली और हैदराबाद की तुलना में 25% से ज़्यादा ह्यूमेडिटी है। दिल्ली में रात के समय तापमान औसत 12.2 डिग्री तक की बजाय औसतन केवल 8.5 डिग्री तक ठंडा हो पा रहा है।

50 डिग्री के करीब पारा... दिन में बरस रही आग! दिल्ली में गर्मी ने तोड़े सभी रेकॉर्ड, जानिए बारिश को लेकर क्या है अपडेट

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का कोर एरिया पेरी अर्बन और ग्रामीण एरिया से अधिक गर्म है। इसकी वजह यह है कि दिल्ली के कोर एरिया में बिल्टअप एरिया गर्मी को लंबे समय तक ट्रैप करके रख रहा है। इसी पर बीते कुछ सालों के दौरान एक्सपर्ट चिंता जता रहे हैं। इसी को अर्बन आइलैंड भी कहा जा रहा है। वहीं नासा सैटेलाइट इमेज बता रही हैं कि दिन के समय दिल्ली का कोर एरिया पेरी अर्बन एरिया से ठंडा रहता है। सीएसई के अनुसार दिल्ली का कोर एरिया पेरिफेरी और पेरी अर्बन एरिया की तुलना में दिन के समय 0.8 डिग्री ठंडा रहता है। लेकिन रात में यह स्थिति इसके विपरीत हो जाती है। रात के समय दिल्ली का कोर एरिया पेरिफेरी और पेरी अर्बन एरिया के मुकाबले 2.9 डिग्री अधिक गर्म रहता है। 2003 में सेंट्रल दिल्ली में तापमान 30.1 से 36 डिग्री तक रहता था। वहीं नॉदर्न और साउथवेस्ट सेमीअर्बन एरिया में घनी आबादी और पथरीले एरिया की वजह से तापमान 36 डिग्री से अधिक रहता था। इसके बाद दिल्ली के साउथवेस्ट, नॉर्थवेस्ट, नॉर्थ, नई दिल्ली और साउथ दिल्ली में तेजी से बिल्ट अप एरिया बढ़ा। इसकी वजह से 2022 में दिल्ली के हर हिस्से का तापमान लगभग 40 डिग्री से उपर रहा। सिर्फ हरे-भरे इलाकों में ही यह 38 से 40 डिग्री रहा।

दिल्ली में पारा पहुंचा 52 के पार, गर्मी का नया रिकॉर्ड

सीएसई का यह भी कहना है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रुक भी गई तो भी चरम गर्मी की तीव्रता और बारंबारता और बढ़ेगी. साथ ही गर्मी की लहर वाले दिनों की संख्या भी बढ़ेगी. इस स्थिति से निपटने के लिए अलग अलग शहरों के हिसाब से गर्मी प्रबंधन योजनाओं की जरूरत है.

Heat wave: शहरीकरण का गर्मी कनेक्शन क्या है... ये खुद पर्यावरण विशेषज्ञ सुगीत ग्रोवर से सुनिए

CSE की रिपोर्ट में क्या कुछ खुलासे हुए हैं.. आपको बताते हैं..पिछले दो दशक बेहद गर्म रहे हैं और तापमान लगातार बढ़ रहा है... महानगरों जैसे दिल्ली मुंबई, चेन्नई में उमस बीते दशक में 5 से 10 फीसदी बढ़ी है.. हैदराबाद में 10 फीसदी...मुंबई में 8 फीसदी... कोलकाता में 7 फीसदी तो वहीं चेन्नई में 5 फीसदी तक उमस बढ़ गई है.. इसकी वजह है बढ़ता शहरीकरण क्योंकि बिल्टअप एरिया लगातार बढ़ा है.. 2003 में 31 दशमलव 3 फीसदी बिल्टअप एरिया बढ़कर 2022 में 38 दशमलव 2 फीसदी पहुंच गया है...

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इन छह शहरों में लू का कहर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने भी भारत के छह प्रमुख शहरों में लू के थपेड़ों और ऊंचे तापमान को खतरनाक बनाने वाले कारणों का विश्लेषण कर बताया कि इस बार पारा के साथ हवा में बढ़ती नमी (ह्यूमिडिटी) का खतरनाक संयोजन परेशान करने वाला है। यह अध्ययन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता के आंकड़ों का आकलन किया।

खुल गया राज! रात को भी क्यों कम नहीं हो रही गर्मी

अगर आप उत्तर भारत में कहीं भी रहते हैं तो आप जानते होंगे कि गर्मी से हाल बेहाल है। ऐसी गर्मी सालों से नहीं पड़ी। क्या आपने ये सोचा है कि दिन ब दिन पारा क्यों बढ़ता जा रहा है। एक हैरान करने वाला फैक्ट ये है कि अब रात में शहरों में उतनी तेजी से पारा नहीं गिर रहा जिस तरह 2001 से लेकर 2010 के बीच होता था। और ये बात सिर्फ सुनी सुनाई नहीं बल्कि दिल्ली के थिंकटैंक सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट यानि CSE की स्टडी से पता चला है।

दिल्ली में पारा पहुंचा 50 के करीब, गर्मी का नया रिकॉर्ड

रात का तापमान भी बढ़ा इस बीच निजी संस्थान सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने गर्मी पर एक नया अध्ययन किया है. अध्ययन में कहा गया है कि किसी भी शहर में गर्मी की लहर का कारण सिर्फ बढ़ता तापमान नहीं है, बल्कि हवा के तापमान, जमीन की सतह का तापमान और तुलनात्मक ह्यूमिडिटी का मिश्रण है. अगर कहीं पर हवा का तापमान गिर भी जाए तो बाकी दोनों कारण मिल कर ऐसे हालात नहीं बनने देते जिनमें थोड़ी राहत महसूस हो. अध्ययन के मुताबिक देश के लगभग सभी बड़े शहरों में बीते 10 सालों में तुलनात्मक ह्यूमिडिटी बढ़ी है. इसके अलावा एक और चिंताजनक बात यह है कि रात का तापमान भी लगातार बढ़ा हुआ रह रहा है. अध्ययन के मुताबिक 2001 से 2010 तक गर्मियों में जमीन का तापमान रात को 6.2 से 13.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता था, लेकिन 2014 से 23 के बीच रात के समय तापमान 6.2 से लेकर सिर्फ 11.5 डिग्री तक ही गिरा. दिल्ली में अब रातें नौ प्रतिशत, हैदराबाद में 13 प्रतिशत, बेंगलुरु में 15, चेन्नई में पांच और मुंबई में 24 प्रतिशत कम ठंडी रहने लगी हैं.

Urban Heat Island Effect: दिन में बहुत गर्मी है लेकिन रात के किसी पहर भी सुकून क्‍यों नहीं मिल रहा?

10 दिन से अधिक दिनों की हीटवेव बढ़ते तापमान और गर्मी के लिहाज से देखें तो ये लगातार तीसरा ऐसा साल है जब हीटवेव (Heatwave) यानी तपिश लगातार 10 दिन से अधिक रही है. जबकि आमतौर पर ये अवधि 4-10 दिन की होती है. तापमान की अवधि के बढ़ने का कारण क्‍लाइमेंट चेंज है और इसी वजह से ह्यूमिडिटी भी बढ़ी है. इस संदर्भ में सेंटर फॉर साइंस एंड एन्‍वायरमेंट (CSE) की एक रिपोर्ट कहती है कि हवा में नमी के कारण पसीना बेहद तेजी से सूख रहा है लिहाजा वास्‍तविकता की तुलना में गर्मी ज्‍यादा महसूस हो रही है. इसके लिए सिर्फ यही कारण जिम्‍मेदार नहीं हैं बल्कि जमीन के इस्‍तेमाल और शहरी बुनावट में बदलाव भी इसके प्रमुख कारणों में शुमार है.