नागपुर में जल संरक्षण और पर्यावरणीय सरोकारों पर राष्ट्रीय सम्मान समारोह, पर्यावरण पत्रकार विवेक मिश्रा सम्मानित
महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित दो दिवसीय चिंतन और सम्मान कार्यक्रम में पर्यावरण पत्रकार विवेक मिश्रा को पानी संरक्षण, नदियों और पर्यावरणीय संकटों पर उनकी गंभीर और जागरूक लेखनी के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर तथा देशभर से पहुंचे जल, पर्यावरण और समाज के क्षेत्र में कार्य कर रहे अनेक विशेषज्ञ और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान आयोजित “जलसंवाद” सत्र में जलपर्व पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक देश के जाने-माने पर्यावरणविदों, शोधकर्ताओं और जल क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के लेखों एवं विचारों का महत्वपूर्ण संकलन है, जिसमें विवेक मिश्रा का लेख भी प्रकाशित किया गया है। अपने लेख के संदर्भ को दोहराते हुए मिश्रा ने कहा कि दुनिया तेजी से “वाटर बैंकरप्सी” की स्थिति की ओर बढ़ रही है और भारत में जल विपन्नता का संकट लगातार गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत की करोड़ों लोगों को जीवन देने वाली गंगा नदी आज खुद सूखे और प्रदूषण की मार से जूझ रही है। यह संकट और भी भयावह तब हो जाता है जब गंगा की सहायक नदियां लगातार नालों में बदलती जा रही हैं। तराई क्षेत्र में इसका असर अब साफ दिखाई देने लगा है और यदि समय रहते गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति गहरे जल संकट का रूप ले सकती है। करीब दो दशकों से पर्यावरणीय मुद्दों पर सक्रिय विवेक मिश्रा जल, नदियों, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक संकटों पर लगातार लेखन और शोध करते रहे हैं। उन्हें वर्ष 2013 में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की ओर से अक्षय ऊर्जा विषय पर फेलोशिप भी प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा देश के प्रसिद्ध गांधीवादी पर्यावरणविद अनुपम मिश्रा के मार्गदर्शन में उन्होंने घाघरा नदी की बाढ़ और उससे जुड़ी सामाजिक त्रासदी पर विस्तृत शोध कार्य किया था। इस शोध को वर्ष 2015 में अमर उजाला ने प्रकाशित किया। बाद में नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली की उपस्थिति में इस शोध कार्य को सम्मानित किया गया था। नागपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में मिश्रा के साथ जल और पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कई प्रमुख लोगों को भी सम्मानित किया गया। इनमें चित्रकूट के पद्मश्री सम्मानित उमाशंकर पांडेय, उत्तराखंड के पर्यावरणविद अनिल जोशी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पद्मश्री किसान सेठपाल सिंह, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से जुड़े विशेषज्ञों सहित जल क्षेत्र के करीब 40 प्रख्यात गणमान्य लोग शामिल रहे। मूल रूप से बहराइच के रहने वाले विवेक मिश्रा लंबे समय से देश के गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर सक्रिय पत्रकारिता और शोध कार्य कर रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने पहली लहर में सामाजिक और पर्यावरणीय संकट के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए दिल्ली से उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती तक प्रवासी श्रमिकों के साथ करीब 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने लगातार वीडियो और जमीनी दस्तावेजीकरण किया तथा मशहूर पर्यावरणविद सुनीता नारायण के साथ विकास के दुष्परिणामों और प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा को देशभर तक पहुंचाया। बाद में इस अनुभव और अध्ययन को अफ्रीका की एक प्रमुख विज्ञान सम्मेलन में भी सुना और सराहा गया। विवेक मिश्रा पिछले करीब आठ वर्षों से सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट से जुड़े हुए हैं। उनकी लेखनी लगातार डाउन टू अर्थ में प्रकाशित होती रहती है, जहां वे जल संकट, नदियों, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय न्याय और विकास के दुष्प्रभावों जैसे मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण करते हैं।
