मुंबई का बर्बाद पानी भोपाल+इंदौर की जरूरत से ज्यादा, जयपुर में 40% लीकेज
देश के लगभग सभी बड़े शहरों में 25-60% तक पानी बर्बाद हो रहा है। या तो पेयजल लाइनों में बड़े लीकेज हैं या फिर पाइपलाइन में अवैध कनेक्शन जोड़ लिए गए हैं। हालात ये हैं कि मुंबई को रोज लगभग 3,850 एमएलडी (मिलियन लीटर रोज) पानी सप्लाई होता है। इसमें से करीब 30% लीकेज माना जाता है। रोज लगभग 1000 एमलडी पानी पाइपलाइन लीकेज व अन्य तरह से बेकार जा रहा है। ये बर्बाद पानी इंदौर-भोपाल की कुल रोजाना जरूरत से भी ज्यादा है। इन दोनों शहरों को रोज 900 एमएलडी ही पानी चाहिए। वहीं, जयपुर में 40% पानी का लीकेज हो रहा है। स्मार्ट सिटी व अमृत 2.0 जैसी परियोजनाओं के तहत 2016 में शहरी निकायों ने सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (एससीएडीए) प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके तहत लीकेज और चोरी वाले नॉन रिवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) को घटाकर 20% पर लाने का लक्ष्य था। इस प्रोजेक्ट के तहत पिछले 10 साल में करीब 1.5 लाख करोड़ रु. खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी हालात जस के तस बने हुए हैं। भोपाल-इंदौर जैसे अधिकांश शहरों में पानी का लीकेज 35%-65% तक है। भोपाल ने तो 2021 तक ही पेयजल लीकेज 16% करने का दावा किया था। लेकिन कैग रिपोर्ट 2019 ने इसकी कलई खोलते हुए कहा कि भोपाल में वाटर लीकेज 48% है। इंदौर में 65% तक है। पानी पर कहां-कितना खर्च? इंदौर में जलूद से नर्मदा जल 70 किमी दूर शहर तक लाने और इसे 600 मी. की ऊंचाई तक पंप करने पर प्रति हजार ली. 29 रु. खर्च आता है। इसमें हर माह बिजली बिल ही 25 करोड़ का है। 65% पानी की बर्बादी के हिसाब से 15 करोड़ का नुकसान हो रहा है। मुंबई में 16,092 करोड़ खर्च करके जो पानी पहुंचाया जा रहा है, उसमें से करीब 4,500 करोड़ लीकेज और चोरी के कारण बर्बाद हो रहा है। बेंगलुरु में पानी सप्लाई का सालाना खर्च 10 हजार करोड़ रु. है। लीकेज 35% है। मतलब 3,500 करोड़ की बर्बादी। कहां-कितना लीकेज 12 राज्य ¿ 61 संस्करण समाधान? वाटर पाइपलाइन सीवरेज की लाइन से अलग रंग में रखी जाएं स्रोत : अमृत 2.0 सिटी वॉटर प्लान, कैग, यूएन हेबिटेट अर्बन वाटर रिपोर्ट, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट रिपोर्ट ऑन वॉटर। ये हैं 5 बड़े कारण प्रथम ज्येष्ठ (अधिक), शुक्ल पक्ष-9, 2083 60 करोड़ शहरी लोग पानी का संकट झेल रहे, देश के 166 बड़े जलाशयों में 33% पानी बचा जयपुर, राजस्थान, रविवार, 24 मई , 2026 शहर लीकेज इंदौर 65% नासिक 60% बेंगलुरु 55% पटना 50% भोपाल 48% जयपुर 40% लखनऊ 40% रांची 40% चंडीगढ़ 30% अहमदाबाद 28% {देश के प्रमुख 166 जलाशयों में 33% ही पानी है। पर शहर में रोजाना पेयजल की जरूरत 48% बढ़ चुकी है। {सामान्य दिनों में शहरों में हर व्यक्ति को 135 ली. पानी की जरूरत होती है। भीषण गर्मी में यह 200 ली. तक जा रही है। 60 करोड़ शहरी पानी की कमी से जूझ रहे हैं। सुब्रता चक्रवर्ती, डॉयरेक्टर, वाटर प्रोग्राम, सीएसई शहरों में पानी की इस भारी बर्बादी के पीछे कई कारण हैं- पाइपलाइनों में टूट-फूट : शहरों में बिछी पाइपलाइनें पुरानी हो चुकी हैं। उनमें हजारों लीकेज हैं। उदाहरण के लिए, भोपाल नगर निगम पर आई सुरक्षा ऑडिट में जल आपूर्ति नेटवर्क में 15,000 से ज्यादा लीकेज पॉइंट पाए गए। अवैध कनेक्शन : निकायों की बिना अनुमति के अवैध कनेक्शन जोड़े गए, जिससे पानी की भारी चोरी होती है। जानकारी न होना: निकायों के पास अपने जल वितरण नेटवर्क का कोई सटीक डेटा या मैप नहीं है, जिससे उन्हें पता ही नहीं चलता है कि पानी कहां गायब हो रहा है। अंडरग्राउंड निगरानी नहीं: पानी और सीवरेज दोनों की पाइपलाइनें जमीन के नीचे समानांतर बिछी हैं। इंजीनियर्स के लिए पहचानना बेहद मुश्किल होता है कि कौन सी पाइपलाइन किस चीज की है और लीकेज कहां पर है। मीटरिंग की कमी : कई शहरों में आज भी फ्लैट-रेट (बिना मीटर) पर पानी की सप्लाई होती है। स्मार्ट वाटर मीटर न होने से लोगों के घरों में ओवरफ्लो या लीकेज से होने वाली पानी की बर्बादी का न तो पता चलता है और न ही उन पर किसी तरह का वित्तीय जुर्माना लग पाता है।
