ब्लॉग: शर्मनाक है दिल्ली का जानलेवा प्रदूषण
दि ल्ली और एनसी आर को पर्या वरणी य चुनौ ति यों का लगा ता र सा मना करना पड़ रहा है जो खरा ब शा सन से उत्पन्न हुई हैं: यमुना प्रदूषि त ही है; कूड़े की सफा ई एक समस्या बनी हुई है;है वा हनों का धुआं बढ़ रहा है, दो षपूर्ण शहरी नि यो जन के परि णा मस्वरूप शहरी बा ढ़ आती है और अरा वली पर्वत श्रृंखला सुरक्षि त नहीं है। अगर दि न में दो बार सफा ई न की जा ए, तो मेरेस्टडी टेबल और रसोई के सामा न पर धूल की एक मो टी परत जम जा ती थी , जो न केवल आंखों से दि खाई देती थी , बल्कि राष्ट्री य राजधा नी के एक प्रमुख क्षेत्र में ती सरी मंजि ल के फ्लैट में हा थ सेभी आसा नी से महसूस हो ती थी । यह 2014 की बा त है और, मैं कि सी भी मुख्य सड़क के कि ना रेकी इमा रत में नहीं रह रहा था। आज वह स्थि ति बहुत बदतर और राष्ट्री य शर्म की बा त हो गई है। लो ग अंतही न पी ड़ा झेल रहे हैं लेकि न सरका रेंइस राष्ट्री य स्वा स्थ्य आपा तका ल के सा मने पूरी तरह असहाय नजर आ रही हैं। भा रत सरका र, जो एक छो टे राज्य की सरका र के साथ मि लकर दि ल्ली पर शा सन करती है, इस तथ्य को स्वी का र करने से इनका र कर रही है कि यह एक लो कतां त्रि क त्रा सदी है। दि ल्ली में भा जपा (सभी सात सांसद उसके हैं) और आम आदमी पा र्टी (जि सके मुख्यमंत्री हमेशा खांसते रहते थे) की सरका रों के पा स एक-दूसरेसे लड़ने के लि ए समय है, लेकि न जनता के ज्वलंत मुद्दे को हल करने के लि ए एक साथ बैठने का समय नहीं है, यह जले पर नमक छि ड़कने जैसा है। दो नों पक्षों को कड़े शब्दों में धि क्का रने सेकुछ खास हा सि ल हो ने वा ला नहीं है, जो दुः खद है। सबसे अपमा नजनक बा त यह है कि एक अंतरराष्ट्री य क्रि केट आयो जन, जि समें वि देशी टी में शा मि ल थीं, का मैच भा री धुंध के बी च नई दि ल्ली में आयो जि त करना पड़ा , जि सकी बहुत आलो चना हुई। एशि या ई पड़ो सी-श्री लंका और बांग्ला देश-वि का सशी ल देश हैं,हैंलेकि न वहां हवा की गुणवत्ता दि ल्ली जैसी नहीं है. सा ल दर सा ल हर सर्दी में ऐसी वा यु गुणवत्ता के सा थ नई दि ल्ली दुनि या का सबसेखराब शहर रहा है। पि छले रवि वा र को एक्यूआई शनि वा र के 415 से बढ़कर 454 हो गया । जैसे-जैसेसर्दि यां आती हैं, घा तक वा यु प्रदूषण के का रण दि ल्ली वा सि यों की सांसेंसचमुच रुक-सी जा ती हैं। अब एक बच्चा भी जा नता है कि धूल के कण (पी एम 2.5) फेफड़ों में भा री संक्रमण का का रण बनते हैं और यह सब ला खों वा हनों के प्रदूषण, पटा खे, नि र्मा ण गति वि धि यों , तेजी से घटते वन क्षेत्र, लुप्त हो ते जल नि का य (का र्बन सिं क) और पराली जला ए जा ने जैसेका रकों के चलते हो ता है। अंतरराष्ट्री य क्रि केट मैच के अला वा , जो बात इंडि या , या भा रत के लि ए और अधि क अपमा नजनक है, वह यह तथ्य है कि राष्ट्री य राजधा नी में कई राजनयि क रहते हैं, जो आश्चर्य जता ते हैं कि भा रत इस समस्या का समा धा न क्यों नहीं कर सकता ? हम चंद्रमा पर उतरने या वंदे भा रत ट्रेन शुरू करने का ढिं ढो रा तो पी टते हैं,हैंलेकि न भूल जा ते हैं कि एक शक्ति शा ली सरका र की ना क के नी चे ला खों लो ग जहरीली हवा में सां स लेने को मजबूर हैं। कुछ साल पहले,ले जब दि ल्ली में ऐसा संकट आया था तो नी ति आयो ग, प्रधा नमंत्री का र्या लय और दि ल्ली मुख्यमंत्री का र्या लय आदि प्रदूषण-रोधी उपकरण स्था पि त करने वा लों में सबसेआगे थेलेकि न उन ला खों गरीब और मध्यम वर्ग के लो गों का क्या जो ऐसे जी वन रक्षक उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं हैं? गो ल्फ लिं क, मो ती बा ग, न्यू फ्रेंड्स कॉ लो नी या जो र बाग में रहने वा ले रईस खर्च उठा सकते हैं लेकि न यह को ई समा धा न नहीं है। वा यु प्रदूषण की समस्या 1980 के दशक के अंत में शुरू हुई जब दि ल्ली की सड़कों पर डी जल वा हनों , मुख्य रूप से टैक्सि यों और ऑटो का बो लबा ला था । दि ल्ली और एनसीआर में ट्रैफि क का फी कम था लेकि न हवा प्रदूषि त थी. एक्यूआई जैसा शब्द या प्रदूषण को मा पने की मशी नें भी लगभग अनुपस्थि त थीं फि र 1998 में सुप्री म को र्ट द्वा रा नि युक्त भूरेला ल समि ति आई। यह बि गड़ती वा यु गुणवत्ता सेनि पटने के उपा य सुझा ती रही । लगभग 20 साल बा द, समि ति की सदस्य पर्या वरणवि द् सुनी ता ना रायण को सुनवा ई के दौ रान न्या या धी शों को दि खाने के लि ए वा यु गुणवत्ता मा पने का एक उपकरण सुप्रीम को र्ट में ले जा ना पड़ा कि शी र्ष अदा लत के संरक्षि त, वा ता नुकूलि त कमरों के भी तर हवा बेहद प्रदूषि त थी। दि ल्ली सरका र ने सम-वि षम नंबर प्लेट वा ली का रों को वैकल्पि क दि नों में सड़कों पर चलने की अनुमति देने का फॉ र्मूला आजमा या था कुछ वर्ष पूर्व इसने कुछ समा धा न प्रदा न कि या लेकि न चतुर भा रती यों और अमी र दि ल्ली वा सि यों ने सड़कों पर चलने के लि ए दो अलग-अलग का रों (दो स्तों और रि श्तेदा रों से बदली हुई) का उपयो ग करके इसेलगभग हरा दि या । डॉ क्टरों, स्कूली बच्चों , एकल महि ला और सरका री अधि का रि यों आदि को दी छूट ने एक प्रशंसि त यो जना की प्रभा वशी लता को कमजो र कि या ।अगर सुप्रीम को र्ट अनुमति देता है तो इसेइसी मही ने फि र सेला गू कर दि या जा एगा लेकि न क्या इससे राष्ट्री य राजधा नी के खांसते बूढ़ों और बच्चों को आराम मि लेगा ? शा यद नहीं ! दि ल्ली और एनसीआर को पर्या वरणी य चुनौ ति यों का लगा ता र सामना करना पड़ रहा है जो खराब शा सन से उत्पन्न हुई हैं:हैंयमुना प्रदूषि त ही है; कूड़े की सफा ई एक समस्या बनी हुई है; वा हनों का धुआं बढ़ रहा है, दो षपूर्ण शहरी नि यो जन के परि णा मस्वरूप शहरी बा ढ़ आती है और अरावली पर्वत श्रृंखला सुरक्षि त नहीं है। जब तक आम आदमी पा र्टी और भा जपा द्वा रा बहुत सख्त उपा य ला गू नहीं कि ए जा ते, दि ल्ली में नि र्दो ष भा रती यों की धी रे-धी रेमौ तें और भा रत की वि श्व भर में बदना मी जा री रहेगी । अकेले 2020 में, कथि त तौ र पर वा यु प्रदूषण से54,000 लो गों की मौ त हुई। क्या यह राजनेता ओं को चौं का ने वा ला आंकड़ा नहीं है?
