दिवाली पर प्रदूषण से निपटने के लिए बनाया नया प्लान, कैसे कम होगा प्रदूषण, जानिए
इस साल देश में 12 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी। दीवाली के दिन पटाखे न फोड़ने को लेकर पहले ही दिल्ली में आदेश जारी हो चुका है। पटाखों पर बैन के पीछे उसके बाद होने वाला भयंकर प्रदूषण है, जो उसी समय पराली से निकलने वाले धुंए के साथ मिलकर राजधानी की हवा को जहारीला बना देता है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रदूषण पर कंट्रो ल के लिए पटाखों पर बैन लगाना ही एक मात्र विकल्प नहीं है। उसके लिए और भी कड़े कदम उठाने होंगेहों गे। इसके बाद दिवाली और ठंड के समय पलूशन को हावी होने से रोकने के लिए दिल्ली सरकार की लिस्ट में एक और तरकीब शामिल है। सबकुछ सही रहा तो दिल्लीवालों को पहली बार कृत्रिम बारिश देखने को मिलेगी। इसके लिए आईआईटी कानपुर की मदद ली जा रही है। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने पर्यावरण मीट के तहत एक्सपर्ट से मिले इस सुझाव के बाद पत्रकारों को यह जानकारी दी। हालांकि इसकी मांग कोई पहली बार नहीं उठी है। हर साल कृत्रिम बारिश को लेकर मांग उठती रही है। अगर इसपर आम सहमति बनती है तो दिल्ली में विमान या गुब्बारों से कृत्रिम बारिश कराई जाएगी। कृत्रिम बारिश या क्लाउड सीडिंग उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें आर्टिफिशयल तरीके से बादलों को बारिश के अनुकूल बनाया जाता है। इसके लिए कई तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। आमतौर पर इसके तीन चरण होते हैं। पहले चरण में जिस इलाके में बारिश करवानी है वहां चल रही हवाओं को ऊपर की तरफ भेजा जाता है। इस हवा से बादल बारिश करने के काबिल होते हैं। क्लाउड सीडिंग के लिए कैल्शियम क्लोराइड, कैल्शियम कार्बाइड, यूरिया आदि की मदद ली जाती है। इन केमिकल की वजह से बादल बारिश करवाने के करीब पहुंचते हैं। इसके बाद दूसरे चरण में बादलों की डेंसिटी को बढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया में भी केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। इसके बाद सुपर कूल वाले केमिकल्स जैसे सिल्वर आयोडाइड और ड्रा ई आइस का छिड़काव विमान, गुब्बारों की मदद से बादलों पर किया जाता है। इससे बादल में मौजूद पानी के कण इससे बिखरने लगते हैं और धरती पर गिरते हैं। मंत्री गोपाल राय ने बताया कि आईआईटी कानपुर को कहा गया है कि दिल्ली में इसके असर और इस पर आने वाले खर्च को लेकर भी एक डिटेल प्लान दें। इस प्रेजेंटेजेंटेशन के साथ ही पूरी जानकारी के बाद इस पर विचार किया जा सकता है। एक्सपर्ट मीट में आए 24 एक्सपर्ट ने अपने सुझाव दिए। इनमें काउंसिल फॉर एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई), एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड आदि के एक्सपर्ट शामिल हुए। उन्होंनेन्हों नेबताया कि विभिन्न एक्सपर्ट ने गाड़ियों के प्रदूषण को कम करने, डस्ट पल्युशन, बायोमास बर्निंग और अन्य तरह के प्रदूषण को कम करने के लिए सुझाव दिए। एक्सपर्ट ने 13 हॉट स्पॉट के लिए अलग-अलग विंटर एक्शन प्लान तैयार करने को कहा। इनमें आनंद विहार, वजीराबाद, विवेक विहार, वजीरपुर, अशोक विहार, द्वारका, जहांगीरपुरी, रोहिणी, बवाना, नरेला, मुंडका, पंजाबी बाग, आरके पुरम और ओखला फेस टू शामिल ह भारत में कहां-कहां हुई कृत्रिम बारिश ? टाटा फर्म ने साल 1951 में भारत में कृत्रिम बारिश कराई थी। साल 1993-94 में तमिलनाड में सूखे से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश कराई थी। 2003- 04 में कृत्रिम बारिश कराई गई थी। साल 2008 में आंध्र प्रेदश के 12 जिलों में भी यह तरीका अपनाया गया था। आईआईटी के प्रोफेसरों ने बताया था कि मॉनसून से पहले और इसके दौरान कृत्रिम बारिश कराना आसान होता है। लेकिन सर्दियों के मौसम में ये आसान नहीं होती। क्योंकिक्यों इस दौरान बादलों में नमी की मात्रा ज्यादा नहीं होती।
