2024 तक पूरा होगा रिसाइकिल का लक्ष्य? रोजाना नालों मेंगिरता है 242 टन प्लास्टिक
देश की राजधानी दिल्ली मेंरोजाना एक हजार सेज्यादा प्लास्टिक कचरा डंप किया जा रहा है। जिसमेंसे 22 प्रतिशत को नालों या लैंडफिल साइट पर फेंका जाता है। ताजा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली सेरोज 1,100 टन (टीपीडी) प्लास्टिक कचरा निकलता है। लेकिन केवल 870 टीपीडी का रिसाइकिल या प्रबंधन किया जाता है। बचेहुए 22 प्रतिशत या 242 टीपीडी को नालों और लैंडफिल साइट पर फेंक दिया जाता हैजो बहकर यमुना मेंआ जातेह दिल्ली का लक्ष्य 2024 तक शत-प्रतिशत कूड़े का रिसाइकिल या प्रबंधन करके इस अंतर को कम करनेका है। इसपर विशेषज्ञों का कहना हैकि राजधानी को इसके लिए कड़ी मेहनत करनेकी जरूरत है। खासतौर सेतब जब 19 सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगानेमेंसफलता हासिल नहीं हो पाई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ठोस अपशिष्ट निगरानी समिति के साथ 25 अप्रैल को एक बैठक के दौरान नगर निगमों द्वारा साझा किए गए डेटा सेपता चलता हैकि दिल्ली का वर्तमान प्लास्टिक कचरा उत्पादन आंकड़ा 1,113.25 टीपीडी है। जिसमेंसे 871.25 टीपीडी का निस्तारण किया जा रहा है। इसमें 242 टीपीडी का अंतर है, जिस पर तुरंत ध्यान देनेकी जरूरत है, एजेंसियों नेइस अंतर को पाटनेके लिए जून 2024 की समयसीमा तय की है। सेंटर फॉर साइंस एंडएं एनवायरनमेंट (सीएसई) मेंम्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट सेक्टर के प्रोग्राम डायरेक्टर अतिन बिस्वास कहतेहैंकि कचरेको अलग-अलग (सेग्रेगेशन) करना किसी भी शहर के लिए अपनेकचरेकी समस्या को हल करनेका आधार है। बिस्वास नेकहा, 'वर्तमान में, 78% प्लास्टिक को रिसाइकिल करनेका आंकड़ा भी काफी ज्यादा लगता है, क्योंकि दिल्ली अन्य शहरों की तरह अपनेकचरेको अलग नहीं कर रहा है। कचरेको प्रभावी ढंग सेअलग किया जा सकता है। जब तक हम स्रोत पर कचरेको अलग-अलग नहीं कर लेतेतब तक जून 2024 तक इस लक्ष्य को हासिल करनेकी संभावना बेहद कम लगती है।' दिल्ली अपनेसिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) के लक्ष्य को प्राप्त करनेमेंपीछे रह गई है। 12 अगस्त, 2021 को जारी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2021 के तहत दिल्ली और देश भर के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों मेंएक साथ 1 जुलाई, 2022 से 19 एसयूपी वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, सूची मेंशामिल कई आइटम अब भी दिल्ली के बाजारों मेंमिल जातेहैं। एनजीओ इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के संस्थापक और निदेशक आशीष जैन नेकहा कि प्लास्टिक प्रदूषण पर कार्रवाई की तत्काल जरूरत है।
