मौसम की मार, एयर पॉल्यूशन और गार्बेज संकट... क्लाइमेट क्राइसिस कैसे हम इंडियंस की जिंदगी बदल रहा?
भारत बदल रहा है. हमारा जीवन भी. इसे बदल रहा है मौसम, कचरा और वायु प्रदूषण. बेहद बुरी तरह से हो रहा है बदलाव. ये खतरनाक है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की सालाना रिपोर्ट 'स्टेट ऑफ इंडियाज़ एनवायरमेंट' तो यही कह रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे हमारा जीवन हम ही खराब कर रहे हैं.... बेका र कचरा प्रबंधन. बढ़ता वा यु प्रदूषण और लगा ता र आ रही घनघो र प्रा कृति क आपदा एं.एं ये हमा रे देश का हुलि या और हमा रा जी वन सब बदल रहे हैं. वो भी खतरना क तरी के से. भा रत में पि छले सा ल या नी 2022 में 1 जनवरी से लेकर 31 अक्टूबर तक 304 दि न हो ते हैं. इनमें से 271 दि न मौ सम खरा ब ही रहा है. वो भी एक्सट्री म लेवल पर. इस एक्सट्री म वेदर इवेंट्स (Extreme Weather Events) की वजह 2952 लो गों की जा न चली गई. 18.1 ला ख हेक्टेयर जमी न पर लगी फसल बर्बा द हो गई. एक्सट्री म वेदर इवेंट्स या नी मौ सम संबंधी भया नक घटना एं या आपदा एं.एं सि र्फ भा रत ही नहीं पूरी दुनि या में इंसा नों द्वा रा फैला ए जा रहे प्रदूषण और उत्सर्जन की वजह से जलवा यु संकट आया है. इससे 2003 से 2022 के बी च वि श्व में 504 भया नक एक्सट्री म वेदर इवेंट्स हुए हैं. इन 504 इवेंट्स में 71 फी सदी इंसा नों की वजह से पैदा की गई कंडि शन से हो रहा है.है अब आप ही बता इए कि आप मौ सम की दुहा ई देते हैं. प्रदूषण पर बो लते हैं. लेकि न इन्हें सुधा रने का प्रया स नहीं करते. सि र्फ यही नहीं . अगर सि र्फ पि छले सा ल की बा त करें तो 2022 में 107 देशों में 298 एक्सट्री व वेदर इवेंट्स हुए हैं. इनकी वजह से 11,786 लो गों की जा न गई है. अब सि र्फ भा रत की बा त करते हैं.हैंकि स मौ सम में कि तने एक्सट्री म वेदर इवेंट्स आए, और उनसे क्या असर हुआ, कि तने लो गों की मौ त हुई. कि तनी फसलें खरा ब हुईं. कि स रा ज्य की हा लत पस्त रही है. मध्य भा रत में 937 मौ तें, मध्यप्रदेश सबसे ज्या दा प्रभा वि त भा रत के मध्य इला के में या नी गुजरा त, मध्यप्रदेश, महा रा ष्ट्र, छत्ती सगढ़ और ओडि शा में 1 जनवरी से 31 अक्टूबर 2022 के बी च 198 दि नों तक खतरना क मौ सम था . मध्यप्रदेश सबसे ज्या दा प्रभा वि त रा ज्य रहा . कुल मि ला कर इन इला कों में 937 लो गों की मौ त हुई. 1.36 ला ख हेक्टेयर से ज्या दा जमी न पर लगी फसलें खरा ब हो गईं. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी रा ज्यों में 191 दि नों तक एक्सट्री म वेदर इवेंट्स हो ते रहे. या नी खरा ब मौ सम का सा मना करते रहे. यहां बि हा र, झा रखंड, सि क्कि म, पश्चि म बंगा ल, असम, अरुणा चल प्रदेश, नगा लैंड, मणि पुर, मि जो रम, त्रि पुरा और मेघा लय हैं. खरा ब मौ सम की वजह से 799 लो गों की मौ त हुई. 2.85 ला ख हेक्टेयर से ज्या दा जमी न पर लगी फसलें खरा ब हुईं. सबसे बुरी हा लत असम की रही . इन रा ज्यों ने सबसे ज्या दा दि न कि या खरा ब मौ सम का सा मना उत्तर और उत्तर-पश्चि म रा ज्यों या नी जम्मू-कश्मी र, पंजा ब, हि मा चल प्रदेश, उत्तरा खंड, हरि या णा , दि ल्ली , उत्तर प्रदेश और रा जस्था न ने सबसे ज्या दा 216 दि नों तक खरा ब मौ सम का सा मना कि या है. इनमें सबसे ज्या दा बुरी हा लत उत्तर प्रदेश की रही . यहां पर खरा ब मौ सम और आपदा ओं की वजह से 849 लो गों की मौ त हुई. 3.11 ला ख हेक्टेयर जमी न पर लगी फसलें खरा ब हो गईं. बेका र कचरा प्रबंधन... 53% कचरे का ट्री टमेंट ही नहीं हो ता हमा रे देश में कचरा प्रबंधन (Waste Management) की स्थि ति भी बहुत खरा ब है.है भा रत में नि कल रहा 53 फी सदी कचरे का ट्री टमेंट नहीं हो ता . देश में हर दि न 1.5 ला ख टन सॉ लि ड कचरा नि कलता है. इसमें से आधे से ज्या दा कचरे का ट्री टमेंट ही नहीं हो पा ता . इन्हें डंप कर दि या जा ता है. अगर मा त्रा की बा त करें तो इसे बां ट सकते हैं. 53 फी सदी में से 23 फी सदी कचरा ट्री ट नहीं हो ता . 27 फी सदी को डंप कर दि या जा ता है. 3 फी सदी कचरा तो उठा या ही नहीं जा ता . या नी जहां पड़ा है, वहीं पड़ा रहेगा .
