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Delhi Air Pollution : বাতাসে বাড়ছে দূষণ, দিওয়ালির পর ফের দমবন্ধ পরিস্থিতির আশঙ্কায় দিল্লি

দিল্লিতে (Delhi) বাড়ছে দূষণ আতঙ্ক। দীপাবলির পর দূষণ ভয়াবহ হতে পারে বলে ইঙ্গিত বিশষজ্ঞদের। শুক্রবার রাজধানীর এয়ার কোয়ালিটি ইনডেক্স (AQI)-এর সূচক হয়েছে ২৬২। দিওয়ালির পর রাজধানীতে তা ৩০০ মাত্রা অতিক্রিম করতে পারে পূর্বাভাস দিয়েছে কমিশন ফর এয়ার কোয়ালিটি ম্যানেজমেন্ট (CAQM)। শীতের কাছকাছি বাতাসের গুণমান আরও হ্রাস পেতে পারে বলে ইঙ্গিত। দিল্লির বাতাস যে ধোঁয়াশায় ছেয়েছে, তা শনিবার ইন্ডিয়া গেট এলাকার ছবিতে স্পষ্ট হয়ে ওঠে। দিল্লির পরিবেশমন্ত্রী গোপাল রাই (Gopal Rai) জানিয়েছেন যে বাতাসের দিক পরিবর্তন হলে, দীপাবলির পরে দিল্লিতে দূষণমাত্রা আরও বাড়তে পারে। এ ব্যাপারে মুখ্যমন্ত্রী অরবিন্দ কেজরিওয়াল (Arvind Kejriwal) একটি পর্যালোচনা বৈঠকও করেছেন বলে জানিয়েছেন রাই।

दिवाली से पहले ही दिल्ली में हवा हुई जहरीली, AQI गिरकर 'खराब' श्रेणी में पहुंचा

दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है. पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर असरदार रोक नहीं लगने से पहले ही इस बात की आशंका जाहिर की जा रही थी कि आनेवाले दिनों में दिल्ली गैस चैंबर में बदल सकती है. शनिवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता काफी बिगड़ गई और एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 262 पर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया. न्यूज एजेंसी एएनआई की एक खबर के मुताबिक सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार दिल्ली में सबसे खराब एक्यूआई विश्वविद्यालय इलाके में 327 में दर्ज किया गया जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है. हर साल दिल्ली में अक्टूबर से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है. पराली जलाना, स्मॉग आदि कई कारणों से ये साल के अंत तक कायम रहता है. शुक्रवार को भी दिल्ली का एक्यूआई खराब श्रेणी में रहा था. अब दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने 28 अक्टूबर से ‘रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है. दिल्ली में वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिए पहली बार 16 अक्टूबर, 2020 को शुरू किए गए इस अभियान के तहत ड्राइवरों को ट्रैफिक लाइट के हरे होने का इंतजार करते समय अपने वाहनों को बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. पेट्रोलियम कंजर्वेशन रिसर्च एसोसिएशन (पीसीआरए) के आंकड़ों से पता चलता है कि अगर लोग ट्रैफिक सिग्नल पर इंजन बंद कर देते हैं, तो प्रदूषण में 13-20% की कटौती की जा सकती है. सरकारी अनुमानों के अनुसार दिल्ली में PM2.5 उत्सर्जन में परिवहन क्षेत्र का हिस्सा 28% है. वाहनों से दिल्ली की हवा में 80% नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड बनता है. जबकि सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के एक रिसर्च में कहा गया कि जुलाई-सितंबर के दौरान दिल्ली का पीएम 2.5 प्रदूषण 5 साल में सबसे कम रहा. गौरतलब है कि शून्य से 50 के बीच एक्यूआई अच्छा, 51 और 100 संतोषजनक, 101 और 200 मध्यम, 201 और 300 खराब, 301 और 400 बहुत खराब, और 401 और 500 गंभीर माना जाता है.

Delhi PM 2.5 pollution in winters has dipped 20 pc compared to pre-pandemic period: Report

The assessment captured seven successive winters and pre-winter trends, starting from January 1, 2015 in Delhi and the National Capital Region (NCR). The average PM2.5 pollution in Delhi in the winter season has declined by about 20 per cent as compared to the pre-pandemic period, according to a new report released by the Centre for Science and Environment (CSE) on Thursday. The assessment captured seven successive winters and pre-winter trends, starting from January 1, 2015 in Delhi and the National Capital Region (NCR). It is based on real time data available from the 81 operational air quality monitoring stations in the region. The PM2.5 concentration for winter (October 1 to February 28) used to hover around 180-190 microgram per cubic metre before the pandemic. It has come down to 150-160 microgram per cubic metre since then, the report said. Anumita Roychowdhury, executive director of research and advocacy at the CSE, said the objective of the report is to understand the trend and ”the starting line of the onset of the winter pollution season or pre-winter levels in this region”. The seasonal average is still over 150 per cent above the 24-hour standard (60 microgram per cubic metre) and almost four times the annual standard (40 microgram per cubic metre) despite the improvement, the green thinktank noted. It said peak pollution showed a similar trend as the seasonal average. ”Peak pollution (worst 24-hour average) used to cross 800 microgram per cubic metre at individual stations pre-pandemic. It has been hovering in the 700-800 microgram per cubic metre range during the last three winters,” the report said. The CSE, however, said the peak pollution numbers did not project the actual level as the Central Pollution Control Board (CPCB) had capped it at 1,000 microgram per cubic metre in 2016-17, greatly compromising the assessment of peak pollution level. Researchers said the winter of 2021-22 was less polluted as compared to 2020-21 for most NCR cities. Ghaziabad registered a 30 per cent improvement, the highest among all major cities, but its PM2.5 level was still about 2.5 times the 24-hour standard, they said. ”Greater Noida (28 per cent), Noida (23 per cent) and Faridabad (16 per cent) also registered improvement in excess of Delhi (12 per cent),” the report said. Gurugram, with 11 per cent improvement, was the worst performer among the core NCR cities. In absolute concentration terms, Faridabad, with an average of 159 microgram per cubic metre, was the most polluted city of the NCR last winter. The report also highlighted that a different station in Delhi recorded peak pollution every winter over the last years. ”Shadipur, DTU, CRRI Mathura Road, JLN Stadium, Alipur, ITO and Rohini have occupied the worst peak pollution title in the last seven winters. These are spread across the city with no clear pattern. This indicates that the winter pollution is regional in nature and short-term peak build-up can happen anywhere based on local meteorology and pollution sources,” the report read.

Delhi PM2.5 Pollution in Winters Has Dipped 20 Pc Compared to Pre-pandemic Period: CSE

Get latest articles and stories on India at LatestLY. The average PM2.5 pollution in Delhi in the winter season has declined by about 20 per cent as compared to the pre-pandemic period, according to a new report released by the Centre for Science and Environment (CSE) on Thursday. The average PM2.5 pollution in Delhi in the winter season ha .. Read more at: https://www.latestly.com/agency-news/india-news-delhi-pm2-5-pollution-in-winters-has-dipped-20-pc-compared-to-pre-pandemic-period-cse-4358007.html

Delhi Air Pollution: दिवाली से पहले बिगड़ी दिल्ली की आबोहवा, सांस लेना हुआ दुश्वार

Delhi Air Pollution: दिवाली से पहले ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ( Delhi air quality ) और आसपास के इलाकों की आबोहवा बिगड़नी शुरू हो गई है. आज यानी रविवार सुबह दिल्ली धुआं-धुआं दिखाई दी. इसके साथ ही वायु प्रदूषण भी उच्चतम स्तर पर रिकॉर्ड किया गया. सुबह हवा में घुले जहर के कारण मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोगों को सांस लेने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा. हवा की ऐसी हालत ने सरकार और प्रदूषण विभाग को चिंता में डाल दिया है. हालांकि दिल्ली में दिवाली पर पटाखों का जलाया जाना बैन किया गया है, बावजूद इसके राजधानी में हवा की गुणवत्ता ( Air Quality Index ) खराब होने की आशंका जताई जा रही है. वहीं, हवा में आए इस बदलाव का मुख्य कारण किसानों द्वारा खेतों में जलाई जा रही पराली को माना जा रहा है. सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के अनुसार दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 266 (खराब) श्रेणी में है.जानकारी के अनुसार कल धनतेरस के दिन दिल्ली के जुड़े पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पराली जलाने के मामलों ने जोर पकड़ लिया. एक रिपोर्ट के अनुसार अकेले पंजाब में ही 582 स्थानों पर पराली जलाई गई. इसी तरह हरियाणा में 122 जगहों पर पराली जली. इस तरह से पंजाब में पराली जलाने के अब तक 3114 और हरियाणा में 771 मामले सामने आ चुके हैं. जैसे-जैसे उत्तर भारत के इलाकों में ठंड बढ़ती जा रही है । ठीक वैसे वैसे यहां के कई राज्यों की हवा प्रदूषण की वजह से खराब होती जा रही है। दिल्ली एनसीआर कि कई शहरों की हवा तो लगातार खतरनाक से गंभीर श्रेणी में पहुंचकर खराब होती जा रही है.इसका कारण CPCB और CSE ने पराली को बताया है. सरकारी एप्लीकेशन सफर के मुताबिक आज सुबह 7 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 266 पीएम 2.5 के साथ बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया. इसके अलावा नोएडा में भी प्रदूषण का बुरा हाल है. यहां आज सुबह 311 खतरनाक श्रेणी में दर्ज किया गया. हालांकि गुड़गांव में यह 139 के साथ मोडरेट केटेगरी में रहा. लेकिन अनुमान है कि दीवाली के बाद यह प्रदूषण दिन पर दिन खतरनाक हो जाएगा.

A Diwali warning: ‘Conditions ripe for severe smog episode’

Analysis by Centre for Science and Environment also shows that recent winters saw a 20% improvement in winter air quality compared to the pre-pandemic years from 2015 to 2018 Recent winters show a 20% improvement in winter air quality compared to the pre-pandemic years from 2015 to 2018, according to an analysis by the Centre for Science and Environment (CSE). However, Diwali this year may trigger yet another smog episode, the analysis shows. At the ten oldest air quality monitoring stations in Delhi for which data is available, the average PM2.5 level in the 2015-16 winter was 193 µg/m3. At these ten stations, which include the ones at Anand Vihar, Mandir Marg, Punjabi Bagh, Dwarka and R K Puram, the average PM2.5 concentration in the 2021-22 winter was 151 µg/m3, while it was 162 µg/m3 in the 2020-21 winter, and 153 µg/m3 in the 2019-20 winter. The period from October 1 to February 28 is taken as winter.

PM2.5 pollution in Delhi during July-Sept quarter 2nd lowest in 5 years: CSE

Delhi"s PM2.5 pollution average for the July-August-September quarter this year stood at 37 microgram per cubic metre, only marginally higher than the five-year low of 36 microgram per cubic metre recorded during 2020, according to an analysis by the Centre for Science and Environment (CSE). Pollution levels in the July-August-September quarter were preceded by one of the most polluted summers this year, unlike in 2020 when the trimester followed the cleanest ever summer (March-May) due to extraordinary conditions created because of hard pandemic lockdowns, the green think tank said. "Therefore, it is important to understand what aided in cleaning up the Delhi air. Looking at the rainfall data it becomes evident that distribution of rainfall has a relatively higher impact on seasonal air quality than the absolute quantity of rainfall," it said. There have been 45 rainy days in July, August and September this year as compared to just 39 rainy days in the quarter last year. "These six extra rainy days helped keep the seasonal average low despite total rainfall this monsoon having been just one-third of the previous monsoon," the CSE said. These additional rainy days also pushed the regular start of bad air quality days further down the month of October, it said. The PM2.5 average for the quarter stood at 38 microgram per cubic metre in 2021, 41 microgram per cubic metre in 2019 and 43 microgram per cubic metre in 2018. The CSE had on Thursday said the average PM2.5 pollution in Delhi in the winter season has declined by about 20 per cent as compared to the pre-pandemic period. The PM2.5 concentration for winter (October 1 to February 28) used to hover around 180-190 microgram per cubic metre before the pandemic. It has come down to 150-160 microgram per cubic metre since then, it said. However, the seasonal average is still over 150 per cent above the 24-hour standard (60 microgram per cubic metre) and almost four times the annual standard (40 microgram per cubic metre) despite the improvement, the green think tank noted. PTI GVS CK

Delhi News:दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण,GRAP के तहत कई पाबंदियां लागू

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर दीवाली से पहले ही तेजी से बढ़ रहा है. कई इलाकों में धुंध की चादर दिखाई दे रही है. पड़ोसी राज्य पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने से उठता धुआं और गिरते तापमान के कारण प्रदूषण की काली चादर दिल्ली-NCR के आसमान पर धुंध बनकर छा गई है. दीवाली और उसके बाद प्रदूषण के हालात और बिगड़ने की आशंका है. शनिवार तक दिल्ली-NCR का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 300 से 400 पार होने की आशंका है. यही वजह है कि दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स ऐक्शन प्लान यानी GRAP के दूसरे चरण में कई पाबंदियां लागू की जा रही हैं. कोयला और लकड़ी से चलने वाले तंदूर वाले होटलों पर पाबंदी रहेगी – डीज़ल से चलने वाले जनरेटर बंद होंगे – अस्पताल, रेल जैसी ज़रूरी सेवाओं को छोड़कर पार्किंग फ़ीस बढ़ेगी ताकि निजी वाहन लोग कम चलाएं – CNG और इलेक्ट्रिक बस और मेट्रो सर्विस बढ़ेगी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) के हवाले से गुरुवार को कहा कि इस साल दिवाली ऐसे वक्त में मनायी जा रही है जब पहले की अपेक्षा ज्यादा ठंड नहीं है लेकिन दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है. NCR में वायु गुणवत्ता प्रतिकूल मौसम विज्ञान संबंधी कारकों जैसे कम तापमान और हवा की गति के कारण अक्टूबर में बिगड़नी शुरू हुई थी जिससे प्रदूषकों का छितराव नहीं हुआ. पटाखों से होने वाला उत्सर्जन तथा पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु गुणवत्ता और बदतर होगी

दिवाली के समय पराली जलाने से बढ़ सकती है समस्या, वायु गुणवत्ता और बदतर हो सकती है : सीएसई

नयी दिल्ली: विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने गुरुवार को कहा कि इस साल दिवाली ऐसे वक्त में मनायी जा रही है जब पहले की अपेक्षा ज्यादा ठंड नहीं है लेकिन दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है. दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता प्रतिकूल मौसम विज्ञान संबंधी कारकों जैसे कम तापमान और हवा की गति के कारण अक्टूबर में बिगड़नी शुरू हुई थी जिससे प्रदूषकों का छितराव नहीं हुआ. पटाखों से होने वाला उत्सर्जन तथा पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु गुणवत्ता और बदतर होगी. सीएसई ने कहा कि इस साल दिवाली पहले ही आ रही है, ‘‘जिसका मतलब है कि गर्म मौसम और हवा की स्थितियां प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी जो दिवाली की रात के समारोहों का हिस्सा बन गया है. पिछले दो साल के मुकाबले इस बार पराली जलाने से निकलने वाले धुएं ने क्षेत्र में अभी तक वायु गुणवत्ता पर असर नहीं डाला है और अक्टूबर की शुरुआत में बारिश ने भी हवा को अभी तक अपेक्षाकृत साफ रखा है. ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|

Stubble Burning Around Diwali May Increase Problem: CSE – दिवाली के आसपास पराली जलाने से बढ़ सकती है समस्या : सीएसई

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने गुरुवार को कहा कि इस साल दिवाली ऐसे वक्त में मनायी जा रही है, जब पहले की अपेक्षा ज्यादा ठंड नहीं है लेकिन दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है. दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता प्रतिकूल मौसम विज्ञान संबंधी कारकों जैसे कम तापमान और हवा की गति के कारण अक्टूबर में बिगड़नी शुरू हुई थी, जिससे प्रदूषकों का छितराव नहीं हुआ

दिल्ली में शुक्रवार को साफ रह सकता है आसमान, लेकिन प्रदूषण में सुधार की गुंजाइश नहीं

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। सुबह होते-होते दिल्ली का आसमान जहरीले स्मॉग से ढंक जा रहा है। जैसे-जैसे तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, वैसे-वैसे प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से दो डिग्री अधिक है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में बनी हुई है। मौसम कार्यालय का पूर्वानुमान है कि शुक्रवार को आसमान मोटे तौर पर साफ रहेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 16.9 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री कम है। आईएमडी के अधिकारी ने बताया, 'शुक्रवार को मुख्यत: आसमान साफ रहेगा। शुक्रवार को अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: करीब 34 और 17 डिग्री रहने का अनुमान है।' दिल्ली में शाम साढ़े पांच बजे सापेक्षिक आर्द्रता 56 प्रतिशत दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से 24 घंटे के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बुलेटिन के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली का औसम एक्यूआई 228 रहा जो 'खराब' श्रेणी में आता है। पराली जली तो बढ़ेगा प्रदूषण विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने गुरुवार को कहा कि इस साल दिवाली ऐसे वक्त में मनाई जा रही है जब पहले की अपेक्षा ज्यादा ठंड नहीं है लेकिन दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है। सीएसई ने कहा कि पिछले दो साल के मुकाबले इस बार पराली जलाने से निकलने वाले धुएं ने क्षेत्र में अभी तक वायु गुणवत्ता पर असर नहीं डाला है और अक्टूबर की शुरुआत में बारिश ने भी हवा को अभी तक अपेक्षाकृत साफ रखा है। सीएसई ने कहा कि दिल्ली में सर्दी के दौरान औसत पीएम 2.5 प्रदूषण महामारी से पहले के मुकाबले 20 फीसदी घट गया है। आकलन के दौरान दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एक जनवरी 2015 से लगातार सर्दी के सात मौसमों और सर्दी पूर्व के रुझानों को शामिल किया गया। हालांकि, सीएसई ने पाया कि सुधार के बावजूद इस मौसम का औसत अब भी 24 घंटों के मानक स्तर (60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) के मुकाबले 150 प्रतिशत अधिक है और यह करीब-करीब वार्षिक मानक स्तर (40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) का चार गुना है। रिपोर्ट में कहा गया, 'महामारी से पहले चरम प्रदूषण (24 घंटों का सर्वाधिक खराब औसत) प्रति घन मीटर 800 माइक्रोग्राम के आंकड़े को पार कर जाया करता था, लेकिन पिछली तीन सर्दियों के दौरान यह स्तर प्रति घन मीटर 700-800 माइक्रोग्राम रहा।' हालांकि, सीएसई ने कहा कि चरम प्रदूषण का आंकड़ा असल स्तर को नहीं दर्शाता क्योंकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने वर्ष 2016-17 में प्रति घन मीटर 1000 माइक्रोग्राम की सीमा तय कर दी थी, जिससे चरम प्रदूषण स्तर का आकलन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। शोधकर्ताओं ने कहा कि वर्ष 2020-21 के मुकाबले वर्ष 2021-22 में एनसीआर के ज्यादातर शहरों में सर्दी में प्रदूषण सबसे कम था। गाजियाबाद में 30 फीसदी सुधार हुआ जो सभी बड़ी शहरों में सर्वाधिक है, लेकिन पीएम 2.5 स्तर अब भी 24 घंटों के मानक स्तर के मुकाबले करीब ढाई गुना था। ग्रेटर नोएडा (28 फीसदी), नोएडा (23 फीसदी) और फरीदाबाद (16 फीसदी) में भी सुधार दर्ज किया गया जो दिल्ली (12 फीसदी) से अधिक है। एनसीआर में सबसे खराब प्रदर्शन गुरुग्राम का रहा जहां प्रदूषण स्तर में केवल 11 फीसदी सुधार हुआ।

Delhi Weather News : दिल्ली में सुबह साफ रह सकता है आसमान, लेकिन प्रदूषण में सुधार की गुंजाइश नहीं

दिल्ली में सुबह साफ रह सकता है आसमान, लेकिन प्रदूषण में सुधार की गुंजाइश नहीं नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। सुबह होते-होते दिल्ली का आसमान जहरीले स्मॉग से ढंक जा रहा है। जैसे-जैसे तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, वैसे-वैसे प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से दो डिग्री अधिक है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। मौसम कार्यालय का पूर्वानुमान है कि शुक्रवार को आसमान मोटे तौर पर साफ रहेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 16.9 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री कम है। आईएमडी के अधिकारी ने बताया, ‘शुक्रवार को मुख्यत: आसमान साफ रहेगा। शुक्रवार को अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: करीब 34 और 17 डिग्री रहने का अनुमान है।’ दिल्ली में शाम साढ़े पांच बजे सापेक्षिक आर्द्रता 56 प्रतिशत दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से 24 घंटे के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बुलेटिन के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली का औसम एक्यूआई 228 रहा जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। पराली जली तो बढ़ेगा प्रदूषण विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने गुरुवार को कहा कि इस साल दिवाली ऐसे वक्त में मनाई जा रही है जब पहले की अपेक्षा ज्यादा ठंड नहीं है लेकिन दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है। सीएसई ने कहा कि पिछले दो साल के मुकाबले इस बार पराली जलाने से निकलने वाले धुएं ने क्षेत्र में अभी तक वायु गुणवत्ता पर असर नहीं डाला है और अक्टूबर की शुरुआत में बारिश ने भी हवा को अभी तक अपेक्षाकृत साफ रखा है। सीएसई ने कहा कि दिल्ली में सर्दी के दौरान औसत पीएम 2.5 प्रदूषण महामारी से पहले के मुकाबले 20 फीसदी घट गया है। आकलन के दौरान दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एक जनवरी 2015 से लगातार सर्दी के सात मौसमों और सर्दी पूर्व के रुझानों को शामिल किया गया। हालांकि, सीएसई ने पाया कि सुधार के बावजूद इस मौसम का औसत अब भी 24 घंटों के मानक स्तर (60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) के मुकाबले 150 प्रतिशत अधिक है और यह करीब-करीब वार्षिक मानक स्तर (40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) का चार गुना है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘महामारी से पहले चरम प्रदूषण (24 घंटों का सर्वाधिक खराब औसत) प्रति घन मीटर 800 माइक्रोग्राम के आंकड़े को पार कर जाया करता था, लेकिन पिछली तीन सर्दियों के दौरान यह स्तर प्रति घन मीटर 700-800 माइक्रोग्राम रहा।’ हालांकि, सीएसई ने कहा कि चरम प्रदूषण का आंकड़ा असल स्तर को नहीं दर्शाता क्योंकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने वर्ष 2016-17 में प्रति घन मीटर 1000 माइक्रोग्राम की सीमा तय कर दी थी, जिससे चरम प्रदूषण स्तर का आकलन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। शोधकर्ताओं ने कहा कि वर्ष 2020-21 के मुकाबले वर्ष 2021-22 में एनसीआर के ज्यादातर शहरों में सर्दी में प्रदूषण सबसे कम था। गाजियाबाद में 30 फीसदी सुधार हुआ जो सभी बड़ी शहरों में सर्वाधिक है, लेकिन पीएम 2.5 स्तर अब भी 24 घंटों के मानक स्तर के मुकाबले करीब ढाई गुना था। ग्रेटर नोएडा (28 फीसदी), नोएडा (23 फीसदी) और फरीदाबाद (16 फीसदी) में भी सुधार दर्ज किया गया जो दिल्ली (12 फीसदी) से अधिक है। एनसीआर में सबसे खराब प्रदर्शन गुरुग्राम का रहा जहां प्रदूषण स्तर में केवल 11 फीसदी सुधार हुआ।

आने वाले दिन साबित हो सकते हैं खतरनाक! दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में दिख सकती है भारी वृद्धि

सर्दियां आहट और त्योहारी सीजन के साथ ही दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बिगड़नी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी में पिछले कुछ दिनों से खराब वायु गुणवत्ता देखी जा रही है और इसके और भी खराब होने की आशंका है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने कहा कि इस साल दिवाली ऐसे वक्त में मनायी जा रही है नयी दिल्ली। सर्दियों के आते ही दिल्ली वालों का दम घुटने लगता हैं। पंजाब हारियाण में जलाई गयी पराली दिल्ली में प्रदूषणों के कारणों में से एक मुख्य कारण बनती हैं। सरकार ने दिल्ली में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए कई तरह के प्रतिबंद लगाएं हैं। दिवाली पर अगर किसी को पटाखें जलाते पाया गया तो उसपर एक्शन लिया जाएगा। वहीं कोयला प्रयोग करके चलाई जा रही फेक्टरी पर भी कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगाया गया हैं। सर्दियां आहट और त्योहारी सीजन के साथ ही दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बिगड़नी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी में पिछले कुछ दिनों से खराब वायु गुणवत्ता देखी जा रही है और इसके और भी खराब होने की आशंका है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने कहा कि इस साल दिवाली ऐसे वक्त में मनायी जा रही है जब पहले की अपेक्षा ज्यादा ठंड नहीं है लेकिन दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता प्रतिकूल मौसम विज्ञान संबंधी कारकों जैसे कम तापमान और हवा की गति के कारण अक्टूबर में बिगड़नी शुरू हुई थी जिससे प्रदूषकों का छितराव नहीं हुआ।

The coming days may prove to be dangerous! There may be a huge increase in the level of pollution in Delhi

With the onset of winters and the festive season, the air quality in Delhi has started deteriorating. The national capital has been witnessing poor air quality for the past few days and it is likely to get worse. The Center for Science and Environment (CSE) said that this year Diwali is being celebrated at such a time. New Delhi. With the arrival of winter, the people of Delhi start suffocating. The stubble burnt in Punjab Haryana becomes one of the main causes of pollution in Delhi. The government has imposed many restrictions to control pollution in Delhi. If anyone is found burning firecrackers on Diwali, action will be taken against him. At the same time, restrictions have also been imposed on factories being run using coal.

Can Delhi breathe easy this Diwali?

Delhi, the world’s most polluted city, is seeing a slight decline in pollution this year compared to pollution numbers pre-pandemic, a new study has found. The study probed pollution levels across seven consecutive pre-winters and winters and found a tiny dip in PM 2.5 concentration in Delhi’s air. The report, released by Centre for Science and Environment (CSE), an India-based green think tank says PM 2.5 concentration levels, which used to hover around 180-190 microgram per cubic metre between October to February pre-pandemic, have come down to 150-160 microgram per cubic metre since then. Breathing better The CSE study is based on real-time data from 81 air quality monitoring stations in the region. · Ghaziabad in Uttar Pradesh, part of the National Capital Region (NCR) saw the greatest improvement in PM 2.5 concentration – 30%. · Greater Noida saw a 28% decline in PM 2.5 concentration, Noida 23%, Faridabad 16% and Delhi 12%. · Gurugram, with 11% improvement, was the worst performer in this regard. Peak pollution, the worst 24-hour average, used to surpass 800 microgram per cubic metre at individual air quality monitoring stations before the pandemic. “It has been hovering in the 700-800 microgram per cubic metre range during the last three winters,” says the report. The winter of 2021-22 was less polluted as compared to 2020-21 for most NCR cities. But not breathing easy While the study does point to an improvement in air quality, the numbers are hardly big enough to make a significant difference. Ghaziabad, which saw the greatest improvement, still has a PM 2.5-level two-and-half times over the 24-hour standard, the report said.