मुना से झाग खत्म करने के लिए पानी का छिड़काव करने के पीछे क्या लॉजिक है?
दिल्ली में यमुना नदी में बन रहे झाग को खत्म करने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है. साथ ही झाग को नदी के तटों तक आने से रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए जा रहे हैं. न्यूज एजेंसी ANI ने एक वीडियो ट्वीट किया है. इसमें दिल्ली जल बोर्ड का एक कर्मचारी कहता है, झाग खत्म करने के लिए पानी छिड़काव से क्या होगा? यमुना में झाग बनना प्रदूषित नदी की निशानी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब भी शहर के कई हिस्सों का सीवर बिना ट्रीटमेंट के ही यमुना में गिर रहा है, जो झाग बनाता है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) में जल कार्यक्रम की वरिष्ठ प्रबंधक सुष्मिता सेनगुप्ता के मुताबिक, नदी में फॉस्फेट से झाग बनता है. यमुना का जलस्तर इस समय कम है. पानी का प्रवाह कम है. ऐसे में प्रदूषक कण एक परत बना लेते हैं. खास तौर पर यमुना में फास्फेट की मात्रा इस झाग की परत के लिए जिम्मेदार है. उन्होंने दी लल्लनटॉप को फोन पर बताया, दिल्ली में 50 प्रतिशत एरिया सीवर वाला है. 50 प्रतिशत वेस्ट नदी में ऐसे ही डंप हो रहा है. क्योंकि यहां के घर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से कनेक्टेड नहीं हैं. सीवेज के कारण यमुना एकदम से प्रदूषित हो गई है. झाग फास्फेट से बन रहा है. जो हाउसहोल्ड डिटर्जेंट या कम्युनटी लेवल लॉन्ड्री या बॉयलर के पानी से फास्फेट आ रहा है. जो इंडस्ट्री से यमुना में गिरने वाला पानी है उसी से झाग बन रहा है. इस साल की शुरुआत में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने एक रिपोर्ट निकाली थी. इसमें बताया गया है कि कहां-कहां फास्फेट बढ़ रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि झाग का निर्माण दो जगह पर होता है. आईटीओ के डाउनस्ट्रीम और ओखला बैराज. ओखला बैराज पर ऊंचाई से पानी गिरने से फास्फेट और सरफेक्टेंट पानी में घुलते हैं और झाग बनाते हैं.
