स्वच्छ पवन..नील गगन ऑनलाईन कार्यशाला का आयोजन, 100 प्रतिभागियों ने लिया भाग
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल एवं सेंटर फॉर साइंस एंड एण्डवायरमेंट की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जुड़े सभी विभागों को शामिल करते हुए राजस्थान के कई शहरों में मंगलवार को ऑनलाईन कार्यशाला का आयोजन किया। प्रदेश के जयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर और उदयपुर को सूची में शामिल किया। कार्यशाला में मानव स्वास्थ्य की रक्षा एवं वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों को बढावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्वच्छ पवन-नील गगन को अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में साल का विषय ‘‘स्वस्थ वायु, स्वस्थ ग्रह’’ रखा गया। वहीं कोविड-19 महामारी के दौरान वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों पर जोर देता है। इसका उद्देश्य सभी के लिए स्वस्थ हवा की आवश्यकता को प्राथमिकता देना है। इस कार्यक्रम को स्वास्थ्य, उत्पादकता, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए स्वच्छ हवा के महत्व के बारे में व्यक्तियों, समुदायों, कॉर्पोरेट्स और सरकार के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए संरेखित किया गया था। इस सभा में आईएएस वीना गुप्ता, सदस्य सचिव आनंद मोहन, मुख्य पर्यावरण अभियंता डॉ विजय सिंघल, कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी, कार्यकारी निदेशक, सीएसई, अतिन विश्वास एवं पार्थ कुमार, सीएसई, ने अपने क्षेत्र के मुद्दों पर अपनी विस्तार से जानकारी साझा की। इस कार्यशाला ने शहरी स्थानीय निकायों, उद्योग संघ, शिक्षाविदों और बड़ी संख्या में विद्यालयों, नागरिक समाज समूहों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य लोगों के एक विविध समूह को भी एक मंच पर साझा किया। इस आयोजन में राजस्थान के लगभग 287 स्कूलों को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत में, डॉ विजय कुमार सिंघल, सीईई, रा.प्र.नि.मं. ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए किए गए प्रयासों के बारे में बताया। इन प्रयासों का असर अब दिखने लगा है। एक छोटा सा प्रयास बड़ा बदलाव ला सकता है। साथ ही आनंद मोहन, सदस्य सचिव, आरएसपीसीबी ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और राजस्थान के पांच गैर-प्राप्ति शहरों का एक सिंहावलोकन पेश किया और सीएसई और हितधारक एजेंसियों के साथ अपनी उल्लेखनीय टिप्पणियों को साझा किया। अनुमिता रॉयचौधरी, कार्यकारी निदेशक, सीएसई, ने राजस्थान के वायु प्रदूषण एवं सम्बन्धित विषय पर किए गए विभिन्न अध्ययनों के आकडे साझा कर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में पार्थ कुमार, डिप्टी प्रोग्रामर, सीएसई, ने राजस्थान के विभिन्न शहरों में आ़ैद्योगिक प्रदूषण के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त किये। इसके साथ अतिन विश्वास, सीएसई, ने कचरा प्रबंधन और कचरे से संसाधन विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। वेबिनार के अंत में कई प्रतिभागियों/विषय विषेषज्ञों ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किये। इस वेबिनार में लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान कई मुद्दों पर हुई चर्चा लॉकडाउन और साफ नीला आकाशः कार्यशाला में, वायु प्रदूषण और कोविड -19 के बीच एक कड़ी दिखाने वाले वैज्ञानिक प्रमाण और अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में भेद्यता कैसे बढ़ती है, इस पर चर्चा की गई। कार्यशाला में कैसे 2020 में लॉकडाउन चरणों के दौरान अर्थव्यवस्था को बंद करने से सभी क्षेत्रों में प्रदूषण में सफाई /कटौती हुई। स्वास्थ्य जोखिमों को संबोधित करनाः स्वच्छ वायु कार्यवाही से शहर में वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य जोखिम को दूर करने की उम्मीद है। 2016 के राज्य स्तरीय रोग भार अनुमान के अनुसार, वायु प्रदूषण राजस्थान में अकाल मृत्यु के लिए दूसरा सबसे बड़ा जोखिम कारक है। राजस्थान में वायु प्रदूषण के कारण प्रति 100,000 जनसंख्या पर मृत्यु दर 112.5 भारत में सबसे अधिक थी। यह अनुमान लगाया गया था कि यदि वायु प्रदूषण की सघनता को कम किया जा सकता है।
