दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा का कहर, AQI 500 पार; GRAP-4 बेअसर, सांस लेना हुआ मुश्किल
दिल्ली-एनसीआर में Delhi Air Pollution ने एक बार फिर खतरनाक स्तर पार कर लिया है। बीते तीन-चार दिनों से राजधानी और आसपास के इलाके गैस चैंबर में तब्दील हैं। वजीरपुर और रोहिणी जैसे क्षेत्रों में AQI 500 के पार पहुंच चुका है। GRAP-4 की सख्त पाबंदियां लागू होने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल रही है। शहर में धुएं और धुंध की मोटी परत छाई हुई है। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। अस्पतालों में सांस और आंखों से जुड़ी शिकायतों के मामले तेजी से बढ़े हैं। पूरी खबर विस्तार से दिल्ली की हवा इस समय “Severe Plus” श्रेणी में दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता लगातार खतरनाक स्तर पर बनी हुई है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण की मार तेज हो गई है। राजधानी के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे एनसीआर शहरों में भी हालात गंभीर हैं। सुबह और शाम के समय विजिबिलिटी बेहद कम हो जा रही है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस फूलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यूपी और हरियाणा भी प्रदूषण की चपेट में Delhi Air Pollution का असर अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में रेड अलर्ट जैसे हालात बन चुके हैं। हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और रोहतक में भी हवा बेहद जहरीली दर्ज की गई है। एयर क्वालिटी मैप पर ये सभी इलाके लाल निशान में दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार दिवाली बीत चुकी है और पराली जलाने की घटनाएं भी अपेक्षाकृत कम हुई हैं, इसके बावजूद प्रदूषण कम नहीं हो रहा। पराली नहीं, गाड़ियां बनीं बड़ी वजह वैज्ञानिकों ने Delhi Air Pollution के पीछे पराली से ज्यादा शहरी स्रोतों को जिम्मेदार बताया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की वैज्ञानिक शरणजीत कौर के अनुसार, बीते 10 दिनों में प्रदूषण में पराली का योगदान केवल 0.1 प्रतिशत रहा है। असल समस्या शहरों में बढ़ते वाहनों की संख्या और उनसे निकलने वाला धुआं है। सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने से यह धुआं वातावरण में ही फंस जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस बार लगभग 80 प्रतिशत कम पराली जली, फिर भी हवा साफ नहीं हो सकी। मौसम विभाग ने बताई नमी और हवा की रफ्तार भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक नरेश कुमार ने प्रदूषण की मौजूदा स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में बादलों के पैच बने हुए हैं। Western Disturbance के असर से वातावरण में नमी बढ़ गई है। फिलहाल कोई मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं है, जिससे हवा की गति बेहद कम बनी हुई है। इसी वजह से कोहरा और धुआं जमीन के पास जमा हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक तेज हवाएं नहीं चलेंगी, तब तक Delhi Air Pollution से राहत मिलना मुश्किल है।
