बडेमन और बडेकदम से साफ होगी हमारी हवा और पानी
सरकारेंतो लगातार एक गनतरोध के िाद दसू रेगनतरोध सेजूझ रही हैं। उनके पास इन कामों के ललए समय ही नहीीं। (पयाावरणववद् सुनीता नारायण सेमुकेश के जरीवाल की बातचीत पर आधाररत) भूलेतो नहीीं हैंआप! मोर्र गाडियों की रेलम-पेल वाले इलाकों मेंभी र्चडियों की चूीं-चूीं सुनाई देरही थी। नददयों का पानी बिल्कुल साफ था, आसमान बिल्कुल नीला... पहाड़ दरू सेही ददखनेलगेथे... ककतनी अच्छी हो गई थी आिो-हवा। लेककन इसकी कीमत क्या देनी पड़ी? लॉकिाउन नेकरोड़ों लोगों की रोजी छीन ली, उन्हेंिेघर कर ददया। हम लोग गोल आसमान ननहार रहेथे, िहुत सेलोग गोल रोदर्यों को याद कर रहेथे। हमेंर्चडियों की चहचहाहर् सुनाई देरही थी, उन्हेंिच्चों का रोना। यानी, हमेंहवा-पानी साफ तो करनी है, लेककन यह साफ हैकक उपाय यह नहीीं हो सकता। यह भी साफ है कक ऐसा होगा भी ककसी िहुत िड़ेकदम सेही। वनाि छोर्े-मोर्ेकदमों सेहम अपनेआप को िहलातेरहेंगे। कभी कुछ साफ िसेंउतार दीीं, चींद सिक़ों पर साइककल लेन िना दी, एक-दो प्रदषूण वालेउद्योगों को िींद कर ददया.. इतनेसेकुछ नहीीं होगा। गाींवों मेंननवेश करना होगा लॉकिाउन की वजह सेदेश नेपहली िार आर्थिक मींदी देखी है, हमेंकफर सेतरक्की करनी है। ऐसा पहली िार हुआ था कक लोग शहरों सेगाींवों की लौर्े। दरूदृजष्र् हो तो यह हमारेललए एक अनोखा अवसर हो सकता था। गाींवों मेंही उन्हेंरोजगार और रोजी देसकतेहैं। लेककन इसके ललए हमेंबिल्कुल साहस भरा और िड़ा कदम उठाना होगा। ननवेश गाींवों मेंही करना होगा। आत्मननभिर गाींव और कस्िेिना सकतेहैं। लेककन सरकारेंतो लगातार एक गनतरोध के िाद दसू रेगनतरोध सेजूझ रही हैं। उनके पास इन कामों के ललए समय ही नहीीं। पैदावार को पौजष्र्क िनानी होगी खेती मेंहमारी प्राथलमकता अि पैदावार िढ़ाना नहीीं िजल्क यह हो कक उसेककतना पौजष्र्क और सेहतमींद िना सकतेहैं। इसी सेककसान की कमाई िढ़ेगी और पूरे देश के लोग जहरीलेरसायन सेभरा खाना खानेको मजिूर नहीीं रह जाएींगे। पहलेहमारेदेश मेंहर मेल का अनाज होता था। आज जहाीं जमीन मेंपानी नहीीं भी है वहाीं भी हमारी वजह सेककसान गेहूीं और चावल ही उगानेपर तुला हुआ है। पयािवरण का सवाल षवकास का सवाल है। ककसान आज सिक़ों पर क्यों हैं? जलवायु पररवतिन के कारण कभी सूखेमेंतो कभी िाढ़ मेंउनकी फसल ििािद हो जाती है। उस पर सेहमारा मध्य वगि मशीन की िनी चीज के ललए जेि खाली कर देगा, लेककन ककसानों की उगाई चीजों की कीमत थोड़ी भी िढ़ी तो आसमान सर पर उठा लेता है। जैसेही ककसी उपज की कीमत िढ़ती हैिरी सरकारेंआयात कर लेती हैंऔर ककसान िेचारा कफर वहीीं के वहीीं। क्या ककसानों को जेल मेंिालेंगे? शहरों मेंहमारेललए पानी सरकार हमारेघर तक पहुींचाती है, लेककन ककसान को अपना पानी खुद ननकालना होता है। पराली जलानेके ललए आप क्या पींजाि और हररयाणा के हजारों ककसानों को जेल में िालेंगे? उन्हेंसींसाधन देनेहोंगे, सशक्त करना होगा। कारखानेइतना प्रदषूण फै लातेहैं, कारों सेइतना प्रदषूण होता है, इन्हेंक्यों नहीीं िींद कर ददया जाता? नए साल मेंऐसा हो ग्रीन एजेंि नए साल मेंहमेंकोयलेजैसेअपनेईंधन को िदलना होगा। प्राइवेर् गाडियों की सींख्या कािूकरें। साविजननक यातायात को िढ़ावा देना होगा। सारेसींसाधन महानगरों मेंकें दद्रत नहीीं करें। षवकास और खेती को सस्र्ेनेिल या सींवहनीय िनाएीं। राष्रीय हररत प्रार्धकरण (एनजीर्ी) और राज्यों के प्रदषूण ननयींिण िोििजैसेसभी सींस्थानों को मजिूत करना होगा। पयािवरण का नुकसान तो हर ककसी को भुगतना होगा आप घर मेंपानी और हवा के प्यूरीफायर लगा कर ननजश्चींत नहीीं हो सकते। पयािवरण ििािद होगा तो भुगतना सभी को पड़ेगा। चाहेवह अमीर हो या गरीि।
