बिहार के’ शहरों की रैंकिंग में मुजफ्फरपुर की छलांग

June 25, 2018

2017 के 9वीं रैंकिंग के मुक़ाबले 2018 में पाई चौथी रैंकिंग

*स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के तहत बिहार के 32 शहरों में से मुज़फ़्फ़रपुर शहर ने हासिल की चौथी रैंकिंग

* नागरिक प्रतिपुष्टि और प्रत्यक्ष अवलोकन—आकलन करने वालों ने शहर की सफ़ाई में अभूतपूर्व सुधार पाया और आधे से ज़्यादा नागरिकों ने शहर की सफ़ाई के बारे में सकारात्मक प्रतिपुष्टि/फ़ीडबैक दी।

* दिसम्बर 2016 में शुरू किए गए स्वच्छता स्वास्थ्य समृद्धि कार्यक्रम के तहत शहर के 34 वार्डों ने  पहले से ही बेहतर पृथक्करण (सेग्रीगेशन) आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को अपना लिया था

* मुज़फ़्फ़रपुर शहर अक्टूबर 2018 तक 100% विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन का लक्ष्य हासिल करने का प्रयास कर रहा है।


नई दिल्ली, 24 जून 2018:
 आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 की रैंकिंग में मुज़फ़्फ़रपुर ने 4000 में से 1484 अंक हासिल किए। वर्तमान आकलन पद्धति, नगरपालिका द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ी प्रमाण, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा डाटा का स्वतंत्र परीक्षण, आकलनकर्ताओं द्वारा प्रत्यक्ष अवलोकन और नागरिक प्रतिपुष्टि के आधार पर शहर के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है। 

एक लाख से अधिक आबादी वाले 485 भारतीय शहरों में से मुज़फ़्फ़रपुर ने 348 वां स्थान प्राप्त किया है। बिहार के 32 शहरों में से मुज़फ़्फ़रपुर ने चौथा स्थान प्राप्त किया है। पिछले साल मुज़फ़्फ़रपुर नौवें स्थान पर था। 

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरॉन्मेंट (सीएसई) के उपनिदेशक चंद्र भूषण ने कहा, “यह दूसरा मौक़ा है जब शहर का आकलन किया गया है और इसके परिणाम उत्साहवर्धक हैं। मुज़फ़्फ़रपुर ने न सिर्फ़ प्रदेश के अंदर अपनी रैंकिंग में सुधार किया है बल्कि शहर में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर किए जा रहे कार्यों पर अच्छे अंक भी प्राप्त किए। हालाँकि अभी भी बहुत काम करना बाक़ी है, जिससे कि मुज़फ़्फ़रपुर को देश के सर्वश्रेष्ठ शहरों में शामिल करवाया जा सके।” 

शहर में ठोस कचरा (अपशिष्ट) प्रबंधन की स्थित में सुधार लाने के लिए स्वच्छता-स्वास्थ्य-समृद्धि कार्यक्रम के तहत चंद्र भूषण और सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरॉन्मेंट की टीम दिसम्बर 2016 से  मुज़फ़्फ़रपुर में काम कर रही है। 

मुज़फ़्फ़रपुर ने भले ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में अच्छे अंक हासिल किए हों, लेकिन स्वच्छता और नगरपालिका द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य सेवाओं के मामले में बेहद ख़राब अंक प्राप्त किए हैं। उदाहरण के लिए, प्रत्यक्ष अवलोकन में आकलनकर्ताओं द्वारा मुज़फ़्फ़रपुर को 1200 में से 802 अंक दिए गए हैं। इसके तहत साफ़-सफ़ाई की बेहतरी, श्रेष्ठ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था एवं पृथक्करण को बढ़ावा देना और विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन का आकलन शामिल हैं। इसी प्रकार, शहर की साफ़-सफ़ाई में सुधार को लेकर 50% नागरिकों ने सकारात्मक प्रतिपुष्टि दी। यह बिहार के अन्य शहरों के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा है। 

चंद्र भूषण ने अपनी बात को आगे बढ़ते हुए कहा, “ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के साथ ही मुज़फ़्फ़रपुर नगर निगम को स्वच्छता, जल निकासी और शौचालय सम्बंधी समस्याओं को भी सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए।” 

क़रीब डेढ़ साल पहले मुज़फ़्फ़रपुर नगर निगम, सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरॉन्मेंट और आईटीसी लिमिटेड मुज़फ़्फ़रपुर में स्वच्छता-स्वास्थ्य-समृद्धि कार्यक्रम को लागू करने के लिए एक साथ आए थे। तब से, 34 वार्डों में स्रोत पर ही पृथक्करण की शुरुआत हो चुकी है। साथ ही इन वार्डों ने विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन को भी अपनाया। कचरा संग्राहकों को पृथक किए गए कचरों को संग्रहित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही, परिवारों को घर पर ही गीले कचरों से कंपोस्ट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अक्टूबर 2018 तक मुज़फ़्फ़रपुर में पाँच विकेंद्रीकृत अपशिष्ट उपचार केंद्र स्थापित करने की योजना है, ताकि रौतिनिया डंप साइट में कचरे के निपटान को कम किया जा सके।

 “हमारा लक्ष्य मुज़फ़्फ़र को भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनाना है। यह तभी सम्भव है जब इसमें मुज़फ़्फ़रपुर के नागरिकों की सम्पूर्ण सहभागिता और स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नगर निगमों द्वारा सुदृढ़ कार्यवाही सुनिश्चित हो”, चंद्र भूषण ने कहा।

 

 

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