सूखे की रिपोर्टिंग कैसे करें?

सूखा सिर्फ बारिश की कमी नहीं है, बल्कि इसका असर खेती, जल संसाधनों, ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ता है। ऐसे में सूखे की सटीक और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के लिए जरूरी है कि पत्रकार सूखे की निगरानी की प्रक्रिया, उपलब्ध आंकड़ों और जमीनी हकीकत को समझें। 

इन्हीं पहलुओं पर चर्चा के लिए डाउन टू अर्थ हिंदी अपने पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘मंथन’ के तहत एक विशेष वेबिनार आयोजित कर रहा है। इस वेबिनार में पत्रकारों को बताया जाएगा कि देश में सूखे की निगरानी कैसे की जाती है, सूखे से जुड़ी खबरों में डेटा का प्रभावी इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है और इस विषय की रिपोर्टिंग करते समय किन महत्वपूर्ण पहलुओं का ध्यान रखना चाहिए। 

वेबिनार में आईआईटी गांधीनगर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में रिसर्च एसोसिएट हिरेन सोलंकी इंडिया ड्राउट मॉनिटरिंग के संदर्भ में सूखे की निगरानी की प्रक्रिया और डेटा आधारित रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देंगे। वह बताएंगे कि सूखे से जुड़े आंकड़ों को कैसे समझें, उनका खबरों में इस्तेमाल कैसे करें और आंकड़ों के आधार पर सूखे की स्थिति का आकलन करते समय किन बातों का ध्यान रखें। 

वहीं, डाउन टू अर्थ हिंदी के राजू सजवान गुजरात में सूखे की स्थिति पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम में डाउन टू अर्थ के मैनेजिंग एडिटर रिचर्ड महापात्रा भी शामिल होंगे। 

यह वेबिनार हिंदी पत्रकारों के लिए सूखे की रिपोर्टिंग को अधिक तथ्यपरक, डेटा आधारित और जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। 

सूखे को समझें, आंकड़ों को खबर से जोड़ें और अपनी रिपोर्टिंग को बनाएं अधिक सटीक और प्रभावी।

हिंदी पत्रकारों के लिए मंथन: सवाल, संवाद और वैज्ञानिक समझ की ओर एक पहल। 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:

सुकन्या नायर
सीएसई मीडिया रिसोर्स सेंटर

 

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